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लोतलोता राखड़ डैम पर फिर टकराव: प्रशासनिक अमला पहुंचा, काम शुरू कराने की कोशिश हुई,  लेकिन ग्रामीण फिर दीवार बनकर खड़े हो गए

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009


राखड़ डैम में फिर क्यों मची हलचल? 2023 में बंद हुआ डैम, 22 सितंबर को काम की कोशिश और ग्रामीणों ने फिर रोक दिया रास्ता

24 सितंबर को प्रबंधन, प्रशासन और ग्रामीणों की बैठक तय, लेकिन उससे पहले ही काम शुरू कराने की कोशिश पर उठे सवाल; अनुमति, सुरक्षा, सर्वे, राख रखने की जगह और ग्रामीणों की 13 सूत्रीय मांगों को लेकर बढ़ा विवाद


कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के कटघोरा विकासखंड के ग्राम पंचायत लोतलोता में सीएसईबी के पुराने राखड़ डैम को दोबारा उपयोग में लाने की कोशिश ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है। वर्ष 2023 में भराव पूरा होने के बाद बंद किए गए बताए जा रहे इस राखड़ डैम में अब दोबारा राख पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने की तैयारी को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया है। 22 सितंबर 2026 को पुनः काम शुरू कराने की कोशिश की गई, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के बाद फिलहाल काम रोक दिया गया है। अब 24 सितंबर को सीएसईबी प्रबंधन, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच होने वाली बैठक के बाद आगे की स्थिति तय किए जाने की बात सामने आई है।

यह मामला केवल पाइपलाइन बिछाने का नहीं है। ग्रामीणों के सवाल डैम की सुरक्षा, पर्यावरणीय अनुमति, राख के भंडारण की व्यवस्था, पुराने कार्यों, मुआवजे, रोजगार, विकास और भविष्य में किसी संभावित दुर्घटना की स्थिति में जवाबदेही तक पहुंच गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले से ही डैम में राख भरी हुई है और उसे खाली कराने की व्यवस्था नहीं की गई है, तो नई पाइपलाइन बिछाकर राख आखिर जाएगी कहां?

                  1985-86 में बना था राखड़ डैम
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1985-86 के आसपास सीएसईबी ने जमीन अधिग्रहित कर लोतलोता क्षेत्र में राखड़ डैम का निर्माण कराया था। थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख को वर्षों तक यहां पहुंचाया जाता रहा। समय के साथ डैम में राख का भराव बढ़ता गया और ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2023 में इसकी भराव क्षमता पूरी होने के बाद इसे बंद कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि इसके बाद क्षेत्र में मिट्टी भराई, पौधरोपण सहित अन्य कार्य किए गए तथा राख परिवहन के लिए उपयोग में लाई जाने वाली पाइपलाइन भी हटा दी गई। ऐसे में अब उसी क्षेत्र में दोबारा पाइपलाइन बिछाने और राखड़ डैम के उपयोग की तैयारी ने ग्रामीणों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

          बंद डैम फिर क्यों? ग्रामीणों का सीधा सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि यदि डैम पहले भर चुका था और उसे बंद कर दिया गया था, तो दोबारा उसे उपयोग में लेने से पहले पूरी व्यवस्था और तकनीकी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जानी चाहिए। ग्रामीणों के अनुसार अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि डैम में पहले से मौजूद राख को खाली कराने की क्या व्यवस्था है, नई राख के लिए कितनी जगह उपलब्ध है और डैम की वर्तमान वास्तविक भंडारण क्षमता कितनी है।
ग्रामीण यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या दोबारा उपयोग में लेने से पहले डैम का विस्तृत तकनीकी सर्वे, तटबंधों की जांच, जल निकासी व्यवस्था और सुरक्षा से संबंधित आवश्यक परीक्षण किए गए हैं?

     21 अप्रैल के नवागांव झाबु हादसे के बाद बढ़ी चिंता
21 अप्रैल 2026 को झाबुआखार क्षेत्र में राखड़ डैम टूटने की घटना में एक युवक की मौत के बाद आसपास के क्षेत्रों में राखड़ डैम की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ी। लोतलोता के ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना के बाद उनके मन में अपने गांव के डैम को लेकर भी सुरक्षा संबंधी आशंकाएं पैदा हुईं।
ग्रामीणों के अनुसार लोतलोता राखड़ डैम का निरीक्षण विशेषज्ञ टीम द्वारा किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन उस निरीक्षण की रिपोर्ट और उसमें सामने आए निष्कर्षों को लेकर अभी भी स्पष्ट जानकारी ग्रामीणों के सामने नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि यदि कोई तकनीकी जांच हुई है तो उसकी स्थिति स्पष्ट की जाए और सुरक्षा संबंधी जानकारी सार्वजनिक की जाए।

नोटिस का मामला भी बना ग्रामीणों की नाराजगी का कारण
राखड़ डैम के काम का विरोध करने के बाद सीएसईबी की ओर से जनपद सदस्य जीवन लाल यादव, ग्रामीण प्रतिनिधि सुदीम यादव तथा पूर्व सरपंच केशव उर्फ केसर भारिया को अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजे जाने की बात भी सामने आई।
कंपनी की ओर से शासकीय कार्य में बाधा और आर्थिक नुकसान जैसे आरोप लगाए जाने की बात ग्रामीण पक्ष द्वारा कही गई है। वहीं ग्राम पंचायत की ओर से यह पक्ष रखा गया कि ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं है तथा वे सुरक्षा, पर्यावरण और गांव से जुड़े सवालों को सामने रख रहे हैं।
यहीं से एक दूसरा सवाल भी उठता है, क्या जनता की समस्याओं को उठाने वाले जनप्रतिनिधियों को नोटिस देकर दबाव में लाना समाधान का रास्ता है?
ग्रामीणों का कहना है कि जनता अपनी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने और उनके समाधान के लिए ही जनप्रतिनिधियों का चुनाव करती है। यदि कोई जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को सामने रखता है, तो उसे संवाद की प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। ग्रामीणों के अनुसार जनप्रतिनिधियों को दरकिनार करने या उन्हें नोटिस देने के बजाय बैठक के माध्यम से समाधान तलाशना अधिक उचित होगा।
हालांकि नोटिस की वास्तविक परिस्थितियां, उसमें दर्ज आरोप और संबंधित पक्ष की आधिकारिक स्थिति अलग से स्पष्ट की जानी आवश्यक है।

    23 जून की अनुमति और CPCB की सहमति पर सवाल
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से ग्रामीणों द्वारा मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखने की बात भी सामने आई। ग्रामीणों के अनुसार पूर्व मंत्री ने मामले में जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया तथा ADM कोरबा और सीई, सीएसईबी दर्री से चर्चा की। कलेक्टर कोरबा को पत्र भेजकर मामले की जांच तथा ग्रामीणों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग किए जाने की बात भी कही गई है।
इसी क्रम में 23 जून 2026 को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा लोतलोता राखड़ डैम के Pond-A के लगभग 22 हेक्टेयर क्षेत्र के अस्थायी उपयोग के लिए दी गई सशर्त अनुमति का मुद्दा सामने आया।
ग्रामीण पक्ष का कहना है कि इस अनुमति में CPCB की सहमति से जुड़ी शर्त का उल्लेख है। इसलिए उनका सवाल है कि जब आवश्यक सहमति और अनुमति की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होना जरूरी है, तो उससे पहले पाइपलाइन बिछाने का काम किस आधार पर शुरू किया जा रहा है?
इस संबंध में अनुमति की शर्तों और उनकी अनुपालना की अंतिम स्थिति संबंधित विभागों और सीएसईबी प्रबंधन की आधिकारिक जानकारी से ही स्पष्ट होगी।
              16 जुलाई को भी हुआ था विरोध
इसके पूर्व भी 16 जुलाई 2026 को सीएसईबी के अधिकारी और कर्मचारी काम शुरू कराने के लिए मौके पर पहुंचे थे। उनके साथ सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी की भी बात कही गई है। ग्रामीणों ने उस समय भी काम का विरोध किया।
ग्रामीणों के अनुसार अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेश पांडे भी मौके पर पहुंचे थे। बातचीत के दौरान उनके कथित बयान को लेकर विवाद हुआ, जिसके बाद अधिकारी की ओर से यह स्पष्टीकरण दिए जाने की बात सामने आई कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया था।
इस घटनाक्रम के बाद भी ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच राखड़ डैम के भविष्य को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी।

     24 सितंबर को बैठक, फिर 22 सितंबर को काम क्यों?
अब विवाद का सबसे ताजा और महत्वपूर्ण पहलू 22 सितंबर 2026 का घटनाक्रम है।
ग्रामीणों के अनुसार 24 सितंबर 2026 को सीएसईबी प्रबंधन, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ बैठक होना तय था, जिसमें राखड़ डैम से जुड़े विवाद और ग्रामीणों की मांगों पर चर्चा की जानी थी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि बैठक से केवल दो दिन पहले, 22 सितंबर को ही काम शुरू कराने की कोशिश की गई।
यही बात ग्रामीणों के बीच नाराजगी का प्रमुख कारण बनी।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब 24 सितंबर को सभी पक्षों के साथ बैठकर स्थिति पर चर्चा होनी थी, तो उससे पहले ही काम शुरू कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
ग्रामीणों के अनुसार प्रबंधन द्वारा न तो पहले से जमा राख को खाली कराया गया है, न ही नई राख रखने के लिए पर्याप्त स्थान की व्यवस्था स्पष्ट है। उनका यह भी कहना है कि मौके पर आवश्यक सर्वे और रेसिंग अथवा लेआउट से संबंधित कार्य की स्थिति भी स्पष्ट नहीं की गई है।
ऐसे में ग्रामीणों का सवाल है कि यदि पाइपलाइन बिछा दी जाती है और राख परिवहन शुरू होता है, तो राख को आखिर रखा कहां जाएगा?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले पूरी व्यवस्था की जाती है, आवश्यक अनुमति प्राप्त होती है और तकनीकी रूप से डैम को सुरक्षित एवं उपयोग योग्य पाया जाता है, तो उसके बाद पाइपलाइन बिछाने का काम किया जा सकता है। उनका यह भी कहना है कि पहले से पाइपलाइन बिछाकर बाद में व्यवस्था तलाशने के बजाय पहले व्यवस्था और अनुमति सुनिश्चित करना जरूरी है।

22 सितंबर को प्रशासनिक अमले की मौजूदगी में फिर प्रयास
ग्रामीणों के अनुसार 22 सितंबर को सीएसईबी/सीएसपीजीसीएल के मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारी, ठेकेदार तथा प्रशासनिक और पुलिस अमले के साथ मौके पर पहुंचे। तहसीलदार, अनुविभागीय अधिकारी और पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू कराने का प्रयास किया गया।
लेकिन ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए और उन्होंने काम का विरोध किया। ग्रामीणों ने मुख्य अभियंता को अपना ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि उनकी मांगों पर पहले चर्चा और कार्रवाई हो, उसके बाद ही राखड़ डैम से संबंधित कार्य आगे बढ़ाया जाए।
विरोध के बाद फिलहाल काम रोक दिया गया है। अब 24 सितंबर 2026 की प्रस्तावित बैठक के बाद आगे की दिशा तय किए जाने की बात सामने आई है।
                  ग्रामीणों की 13 सूत्रीय मांगें
ग्रामीणों ने विरोध के साथ ही वहां उपस्थित मुख्य अभियंता अनविभागीय अधिकारी एवं तहसीलदार अपनी 13 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सोपा गया, अपने ज्ञापन में राखड़ डैम को लेकर केवल विरोध ही नहीं जताया, बल्कि प्रभावित क्षेत्र के अधिकार, सुरक्षा, रोजगार, मुआवजा और विकास से जुड़ी 13 मांगें भी रखी हैं।


1. पिछले पांच वर्षों की क्षतिपूर्ति प्रत्येक राशन कार्ड पर 6-6 हजार रुपये दिए जाएं।
2. राखड़ डैम के लिए अधिग्रहित जमीन से जुड़े लंबित मामलों का निराकरण किया जाए।
3. प्रभावित परिवारों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
4. डैम में फंसी जमीन के बदले उचित मुआवजा और स्थायी नौकरी दी जाए।
5. ग्राम पंचायत लोतलोता में 2 करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जाएं।
6. गांव में बिजली और पानी निःशुल्क उपलब्ध कराया जाए।
7. प्रत्येक व्यक्ति को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।
8. राखड़ और पानी से पूर्व में खेतों को हुए नुकसान का उचित क्षतिपूर्ति भुगतान किया जाए।
9. गांव के प्रत्येक स्कूल को कंपनी द्वारा गोद लेकर आवश्यक सामग्री एवं विकास कार्य कराए जाएं।
10. गांव में खेल मैदान विकसित किया जाए।
11. स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए।
12. राखड़ डैम से जुड़े कार्यों में गांव के स्व-सहायता समूहों तथा स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाए।
13. यदि डैम चालू होने के बाद किसी व्यक्ति की जान-माल की क्षति होती है तो प्रभावित व्यक्ति को उचित मुआवजा और उसके परिवार को आवश्यक सहायता दी जाए। साथ ही राखड़ डैम क्षेत्र में पूर्व में किए गए मिट्टी फिलिंग कार्य से संबंधित लंबित भुगतान का निराकरण किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि इन मांगों पर प्राथमिकता से कार्रवाई और स्पष्ट आश्वासन मिलने तक राखड़ डैम का काम शुरू नहीं किया जाना चाहिए। ज्ञापन की प्रतियां क्षेत्रीय विधायक प्रेमचंद पटेल, कलेक्टर कोरबा तथा संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों को दिए जाने की बात भी सामने आई है।
       अब विवाद राख का नहीं, भरोसे का बन गया है
लोतलोता राखड़ डैम का मामला अब केवल राख को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने का तकनीकी विषय नहीं रह गया है। इसके साथ ग्रामीणों की जमीन, सुरक्षा, पर्यावरण, रोजगार, मुआवजा, गांव के विकास और प्रशासनिक संवाद जैसे सवाल जुड़ चुके हैं।
एक ओर विद्युत उत्पादन के बाद निकलने वाली राख के सुरक्षित निस्तारण की आवश्यकता है। दूसरी ओर ग्रामीण चाहते हैं कि राख के निस्तारण की व्यवस्था उनकी सुरक्षा और पर्यावरणीय हितों से समझौता किए बिना हो।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्ष 2023 में डैम बंद होने के बाद अब उसे दोबारा उपयोग में लेने से पहले उसकी वर्तमान क्षमता और संरचनात्मक सुरक्षा की स्थिति क्या है? क्या तटबंधों और जल निकासी व्यवस्था की तकनीकी जांच हुई है? क्या आवश्यक पर्यावरणीय और नियामकीय शर्तों का पालन पूरा हो चुका है? क्या CPCB से संबंधित आवश्यक सहमति उपलब्ध है? क्या नई राख के लिए पर्याप्त भंडारण क्षमता मौजूद है? क्या पुराने भराव की स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन किया गया है? और क्या 21 अप्रैल के झाबुआखार हादसे के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लोतलोता डैम की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन किया गया है?
इन सवालों का जवाब किसी आरोप से नहीं, बल्कि दस्तावेजों, तकनीकी जांच, अनुमति और संबंधित विभागों की आधिकारिक जानकारी से मिलना चाहिए।
             24 सितंबर की बैठक पर टिकी निगाहें
22 सितंबर को ग्रामीणों के विरोध के बाद काम रुक गया है। अब 24 सितंबर को होने वाली प्रस्तावित बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बैठक में ग्रामीणों की 13 सूत्रीय मांगों, डैम की सुरक्षा, पर्यावरणीय अनुमति, राख के भंडारण की व्यवस्था और पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास या विद्युत उत्पादन की प्रक्रिया के विरोध में नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि उनके गांव की सुरक्षा, अधिकार और समस्याओं का समाधान भी उसी गंभीरता से हो।
अब देखना यह है कि 24 सितंबर की बैठक के बाद प्रबंधन और प्रशासन किस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं। क्या पहले ग्रामीणों की चिंताओं और तकनीकी-पर्यावरणीय पहलुओं को स्पष्ट किया जाएगा या राखड़ डैम के काम को आगे बढ़ाने का रास्ता निकलेगा, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।


फिलहाल 22 सितंबर को ग्रामीणों के विरोध के बाद काम रोक प्रशासन, प्रबंधन और ठेकेदार द्वारा अपना सामान लेकर पुनः वापस चल दिया गया है और आगे की स्थिति बैठक के बाद तय होने की बात सामने आई है। लोतलोता के लोगों की नजर अब केवल राखड़ डैम पर नहीं, बल्कि उस निर्णय पर है जो उनके गांव की सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा हुआ है।

प्रदीप मिश्रा
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