ओडिशा के मुस्लिम कलाकार डॉ. नूर रज्जा ने ओडिसी में जीता स्वर्ण, गंजाम का बढ़ाया मान
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गंजाम, ओड़िशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनिल कुमार चौधरी, गंजाम
बरहमपुर की धरती से निकली प्रतिभा ने ओडिसी नृत्य के मंच पर रचा नया इतिहास, राष्ट्रीय स्तर पर भी मिली बड़ी उपलब्धि
गंजाम ACGN:- ओडिशा की धरती को कला, संस्कृति, मूर्तिकला, शिल्प और समृद्ध परंपराओं की भूमि कहा जाता है। यहां की सांस्कृतिक विरासत ने सदियों से देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसी गौरवशाली परंपरा में अब बरहमपुर की धरती से निकले डॉ. नूर रज्जा ने अपनी प्रतिभा और साधना से एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। ओडिसी नृत्य के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें ओडिशा स्तर पर स्वर्ण पदक और राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक प्राप्त हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से गंजाम जिले के कला जगत और बरहमपुर के कलाकार एवं बौद्धिक वर्ग में खुशी की लहर है।
ओडिसी के मंच पर चमका गंजाम का नाम चंडीगढ़ के प्रसिद्ध ओल्ड कला केंद्र में आयोजित समाचारनाथ महोत्सव के रंगारंग कार्यक्रम के दौरान डॉ. नूर रज्जा ने ओडिसी नृत्य की अपनी प्रस्तुति से दर्शकों और कला प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। उनकी कला-साधना और उत्कृष्ट प्रदर्शन को मिली यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि गंजाम की सांस्कृतिक पहचान के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है। बरहमपुर शहर में उनकी इस सफलता को लेकर बधाइयों और प्रशंसा का सिलसिला जारी है।
दस वर्ष की उम्र से शुरू हुई साधना डॉ. नूर रज्जा ने बहुत कम उम्र में ओडिसी नृत्य की ओर कदम बढ़ाया। महज दस वर्ष की उम्र से उन्होंने औपचारिक रूप से ओडिसी नृत्य का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। गुरु जयंत आचार्य, गुरु आरती कर, शुभा लक्ष्मी पाढ़ी, पर्वतावत कुमार स्वैन और शिवराम बारिक जैसे गुरुओं के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी नृत्य प्रतिभा को निरंतर निखारा। वर्षों की कठोर साधना, अनुशासन और निरंतर अभ्यास ने उन्हें ओडिसी नृत्य के क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई।
परंपरा और प्रतिभा का अनूठा संगम डॉ. नूर रज्जा की यात्रा इसलिए भी उल्लेखनीय मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने अपनी व्यक्तिगत पृष्ठभूमि से आगे बढ़कर ओडिशा की शास्त्रीय कला परंपरा को अपनी साधना का माध्यम बनाया। कला किसी एक समुदाय की सीमा में बंधी नहीं होती, बल्कि वह समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम बनती है। डॉ. नूर की उपलब्धि इसी सांस्कृतिक समन्वय की एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है।
पिछले वर्ष भी हासिल की थी महत्वपूर्ण उपलब्धि डॉ. नूर रज्जा ने पिछले वर्ष भी गंजाम जिले से ओडिसी नृत्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। इसके साथ ही उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर कला के क्षेत्र में अपने अध्ययन और शोध को भी आगे बढ़ाया। नृत्य को केवल मंचीय प्रस्तुति तक सीमित न रखते हुए वे इसके शोध और शिक्षण से भी जुड़े हुए हैं।
‘प्रसन्नाक्षी’ के माध्यम से दे रहे नई पीढ़ी को प्रशिक्षण बरहमपुर में डॉ. नूर रज्जा ने ‘प्रसन्नाक्षी’ नाम से एक डांस इंस्टीट्यूट की शुरुआत की है। यहां वे ओडिसी नृत्य के प्रशिक्षण के साथ-साथ इसके शोध और शिक्षण कार्य को भी आगे बढ़ा रहे हैं। उनका प्रयास है कि ओडिशा की इस गौरवशाली शास्त्रीय नृत्य परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए और प्रतिभाशाली कलाकारों को उचित मंच मिले।
राष्ट्रीय स्तर के महोत्सव से कलाकारों को मंच डॉ. नूर प्रत्येक वर्ष ‘पंचम वेद’ नाम से राष्ट्रीय स्तर के नृत्य एवं संगीत आधारित शास्त्रीय महोत्सव का आयोजन भी करते हैं। इस आयोजन में देश के अलग-अलग हिस्सों से कलाकारों और नर्तकों को आमंत्रित किया जाता है। इसके माध्यम से शास्त्रीय कला के विभिन्न रूपों को एक मंच पर लाने और कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर देने का प्रयास किया जाता है।
देश-विदेश के मंचों पर भी मिली पहचान डॉ. नूर रज्जा ने देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ओडिसी डांस फेस्टिवल, घूमुरा फेस्टिवल, कलांजलि लोक फेस्टिवल, गोपालपुर बीच फेस्टिवल, मार्गी फेस्टिवल और घुंगुर फेस्टिवल जैसे अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उनकी प्रस्तुतियों को कला प्रेमियों से सराहना मिली है। वे दूरदर्शन और प्रसार भारती से ग्रेड-1 प्रमाणित डांसर हैं तथा उन्हें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से वरिष्ठ छात्रवृत्ति भी प्राप्त हुई है।
कला प्रेमियों ने बताया गंजाम के लिए गौरव डॉ. नूर रज्जा की उपलब्धि पर कला प्रेमियों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने खुशी जताई है। उनका कहना है कि गंजाम और ओडिशा की धरती पर ऐसी बहुआयामी प्रतिभाओं का उभरना सांस्कृतिक विरासत के लिए सकारात्मक संकेत है। डॉ. नूर ने अपनी मेहनत, लगन और निरंतर साधना के माध्यम से यह साबित किया है कि कला की कोई सीमा नहीं होती और प्रतिभा को अवसर तथा समर्पण मिले तो वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बना सकती है।
डॉ. नूर रज्जा की स्वर्ण पदक की यह उपलब्धि बरहमपुर और गंजाम के लिए गौरव का क्षण है। ओडिसी जैसी समृद्ध शास्त्रीय नृत्य परंपरा को साधना, उसका अध्ययन करना और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। उनकी यह यात्रा आने वाले कलाकारों के लिए प्रेरणा का माध्यम बन सकती है।
प्रदीप मिश्रा / देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ / हम लाते हैं निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबरें
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