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कीचड़ में थमते थे कदम, अब पक्की सड़क पर दौड़ती जिंदगी

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009


पीएम जनमन से मांझीपारा तक पहुंची पक्की सड़क, स्कूल से अस्पताल और बाजार तक आसान हुई ग्रामीणों की राह

कोरबा ACGN:- कभी बारिश शुरू होते ही जिस रास्ते पर चलना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था, आज उसी रास्ते ने मांझीपारा की जिंदगी की रफ्तार बदल दी है। कोरबा विकासखंड की दूरस्थ ग्राम पंचायत मदनपुर के आश्रित ग्राम मांझीपारा में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के लिए मदनपुर से गांव तक पहुंचने वाला करीब 2.2 किलोमीटर का कच्चा रास्ता लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ था। गर्मी में धूल और बारिश में कीचड़ इस रास्ते की पहचान बन चुके थे।
बारिश के दिनों में स्थिति और कठिन हो जाती थी। रास्ते पर कीचड़ के कारण पैदल चलना मुश्किल होता था, पैर धंस जाते थे, कपड़े खराब हो जाते थे और दोपहिया सहित अन्य वाहनों से आवागमन भी जोखिम भरा हो जाता था। अस्पताल जाना हो, बच्चों को स्कूल पहुंचाना हो या फिर रोजमर्रा के जरूरी काम से मदनपुर और शहर की ओर जाना हो, ग्रामीणों को इसी रास्ते से गुजरना पड़ता था।
ऐसे में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत जरूरतों तक पहुंच का सवाल बन गई थी।
              पीएम जनमन ने खोली विकास की राह
विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों की बसाहट वाले दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान यानी पीएम जनमन के तहत सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी गई। इसी पहल के तहत मदनपुर से मांझीपारा तक पक्की सड़क का निर्माण कराया गया।
लगभग 2.2 किलोमीटर लंबी इस सड़क के लिए करीब 129.65 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। निर्माण कार्य 20 जनवरी 2025 को प्रारंभ हुआ और लगभग एक वर्ष में पूरा कर लिया गया। सड़क बनने के बाद मांझीपारा सीधे मदनपुर से जुड़ गया और आगे मुख्य मार्ग के माध्यम से ग्रामीणों के लिए शहर तक पहुंचना भी पहले की तुलना में सुगम हो गया।
               स्कूल जाने में अब नहीं रुकते कदम
मदनपुर निवासी युवक अरूण कुमार राठिया बताते हैं कि पहले बारिश के दिनों में रास्ते पर कीचड़ के कारण आना-जाना बेहद मुश्किल हो जाता था। स्कूल और अन्य जरूरी कामों के लिए भी कई बार परेशानियों के बीच रास्ता तय करना पड़ता था। अब पक्की सड़क बनने के बाद मोटरसाइकिल, साइकिल और दूसरे वाहन आसानी से चल रहे हैं। कम समय में रास्ता तय हो जाता है और रोजमर्रा की आवाजाही में बड़ी सुविधा मिली है।
कक्षा छठवीं में पढ़ने वाले आदित्य के लिए भी सड़क ने स्कूल की राह आसान कर दी है। वह बताते हैं कि पहले रास्ते में कीचड़ होने से स्कूल आने-जाने में काफी परेशानी होती थी। अब पक्की सड़क बनने के बाद स्कूल जाना आसान और सुविधाजनक हो गया है।
        बीमारी में अस्पताल तक पहुंचना हुआ आसान
गांव की वृद्धा नीरो बाई सड़क बनने के बाद आए बदलाव को बेहद अहम मानती हैं। उनका कहना है कि पहले खराब रास्ते के कारण गांव से बाहर निकलना ही मुश्किल हो जाता था। जब कोई बीमार पड़ता था, तब परिवार की चिंता और बढ़ जाती थी।
अब पक्की सड़क बनने से पैदल चलने में सुविधा हुई है और वाहन भी गांव तक आसानी से पहुंच जाते हैं। नीरो बाई के मुताबिक मरीज को अस्पताल ले जाने की स्थिति में वाहन और एंबुलेंस के गांव तक पहुंचने में पहले जैसी परेशानी नहीं होती। इससे समय पर इलाज तक पहुंचने की उम्मीद भी आसान हुई है।
     गांव से बाजार और शहर तक आसान हुआ सफर
गांव के टीकाराम भी सड़क बनने के बाद की स्थिति को बदलाव के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि अब आने-जाने में काफी सुविधा हो गई है। वहीं मांझीपारा निवासी लल्लूराम बताते हैं कि पहले मदनपुर से मांझीपारा तक का रास्ता तय करना कठिन था, लेकिन अब पक्की सड़क से यह दूरी आसानी से पूरी हो जाती है। मदनपुर पहुंचने के बाद मुख्य मार्ग से शहर की ओर जाना भी सरल हो गया है।
पक्की सड़क ने मांझीपारा को केवल मदनपुर से जोड़ने का काम नहीं किया, बल्कि ग्रामीणों की शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार, रोजगार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी आसान की है। गांव में बाहर से आने वाले लोगों और वाहनों की आवाजाही बेहतर हुई है। सरकारी योजनाओं और जरूरी सेवाओं की पहुंच भी पहले की तुलना में अधिक सुगम हुई है।
                सड़क बनी तो बदली गांव की रफ्तार
कभी जिस रास्ते पर बारिश में कुछ कदम चलना भी चुनौती हुआ करता था, आज उसी रास्ते पर मोटरसाइकिल और अन्य वाहन आसानी से दौड़ रहे हैं। बच्चों के स्कूल जाने की राह सुगम हुई है, बुजुर्गों को आने-जाने में राहत मिली है और बीमार व्यक्ति को अस्पताल तक पहुंचाने की चिंता पहले की तुलना में कम हुई है।
मांझीपारा की यह पक्की सड़क सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं है। यह दूरस्थ आदिवासी अंचल को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाली कड़ी बनकर सामने आई है। सड़क के माध्यम से ग्रामीणों की सुविधाओं तक पहुंच आसान हुई है और गांव के लोगों में आगे बढ़ने का विश्वास भी मजबूत हुआ है।
जहां कभी बारिश का कीचड़ रास्ता रोक देता था, आज वहीं पक्की सड़क विकास की नई राह खोल रही है। पीएम जनमन के माध्यम से मांझीपारा तक पहुंची यह सड़क विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के लिए सुविधा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।


प्रदीप मिश्रा
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