नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 7647981711 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , रेत का खेल या सिस्टम की चूक? महंगे दामों से परेशान जनता, अवैध भंडारण की जांच की मांग – Anjor Chhattisgarh News

Anjor Chhattisgarh News

सच की तह तक

रेत का खेल या सिस्टम की चूक? महंगे दामों से परेशान जनता, अवैध भंडारण की जांच की मांग

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

गंजाम, ओडिशा

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनिल कुमार चौधरी, गंजाम

रेत घाट बंद होने के बावजूद रात में बड़े पैमाने पर रेत जमा करने का आरोप; आम आदमी पार्टी ने माइंस विभाग और प्रशासन से सोर्स, परमिट, रॉयल्टी व दस्तावेजों की जांच की मांग की, एनजीटी और हाई कोर्ट जाने की चेतावनी

गंजाम ACGN:- गंजाम जिले में रेत की समस्या को लेकर अब सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। आरोप है कि रेत की उपलब्धता प्रभावित होने के कारण आम लोगों को घर बनाने और अन्य निर्माण कार्यों के लिए महंगे दाम पर रेत खरीदनी पड़ रही है। दूसरी ओर रेत परिवहन से जुड़े वाहन चालकों के सामने भी आमदनी का संकट पैदा होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में रेत की वास्तविक कमी कहां है और बाजार में महंगी रेत आखिर पहुंच कैसे रही है, इसे लेकर जांच की मांग तेज हो गई है।
आम आदमी पार्टी के गंजाम जिला यूथ प्रेसिडेंट नीलकंठ रेड्डी ने आरोप लगाया है कि जिले में रेत घाट बंद होने के बावजूद अलग-अलग स्थानों पर बड़ी मात्रा में रेत जमा की जा रही है। उनका आरोप है कि रात के समय रेत लाकर विभिन्न जगहों पर उसका भंडारण किया जाता है और बाद में अनुमति अथवा परमिट के नाम पर उसका परिवहन किया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायत में उठाए गए सवालों को लेकर संबंधित विभागों से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
              घाट बंद, फिर रेत कहां से आ रही है?
नीलकंठ रेड्डी का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से जनता की ओर से रेत और मिट्टी की समस्या को लेकर लगातार विरोध और शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि समस्या का स्थायी समाधान करने के बजाय अलग-अलग स्तर पर केवल परिवहन करने वाली गाड़ियों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि रेत घाटों से खनन और आपूर्ति पर रोक या प्रतिबंध है, तो बड़े पैमाने पर रेत के भंडारण की जानकारी प्रशासन तक क्यों नहीं पहुंच रही है?
  ड्राइवरों पर कार्रवाई से पहले असली स्रोत की जांच जरूरी
उन्होंने कहा कि सड़क पर रेत ले जा रहे वाहन चालकों को पकड़कर जुर्माना लगाने मात्र से समस्या का समाधान नहीं होगा। परिवार का पेट पालने के लिए वाहन चलाने वाले ड्राइवरों के बजाय सबसे पहले यह पता लगाया जाना चाहिए कि रेत का वास्तविक स्रोत क्या है, इसे कौन ला रहा है, कहां जमा कर रहा है और आखिर इसका व्यापार कौन कर रहा है।
उनकी मांग है कि माइंस विभाग और प्रशासन को जिले में रेत के भंडारण वाले संभावित स्थानों की निगरानी करनी चाहिए। वहां मौजूद रेत के स्रोत, परिवहन परमिट, रॉयल्टी भुगतान और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जानी चाहिए, ताकि वैध और अवैध आपूर्ति के बीच स्पष्ट अंतर सामने आ सके।
       दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप भी जांच के घेरे में
नीलकंठ रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि बाद में जांच और कार्रवाई के दौरान दस्तावेजों में हेराफेरी किए जाने की आशंका है। इस आरोप को भी निष्पक्ष जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की गड़बड़ी या हेरफेर सामने आती है तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
        सरकारी राजस्व और पर्यावरण पर भी सवाल
रेत के अवैध उत्खनन, भंडारण और परिवहन से सरकारी राजस्व को नुकसान होने की आशंका जताई गई है। इसके साथ ही यदि नियमों को दरकिनार कर प्राकृतिक स्रोतों से रेत निकाली जा रही है तो इसका पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में केवल सड़क पर चलने वाले वाहनों की जांच के बजाय रेत के स्रोत से लेकर डिपो, परिवहन और अंतिम बिक्री तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला की जांच की मांग की गई है।
नीलकंठ रेड्डी ने कहा कि यदि किसी स्थान पर अवैध तरीके से रेत का भंडारण या परिवहन पाया जाता है तो उसे नियमानुसार जब्त किया जाना चाहिए और पूरी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। उनका कहना है कि आम जनता को उचित दर पर रेत उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे अवैध कारोबार और कथित सिंडिकेट पर प्रभावी अंकुश लग सके।
  समस्या नहीं सुलझी तो एनजीटी और हाई कोर्ट का रुख
आम आदमी पार्टी की ओर से चेतावनी दी गई है कि यदि गंजाम जिले में रेत और मिट्टी की समस्या का स्थायी एवं पारदर्शी समाधान नहीं निकाला गया तथा अवैध उत्खनन, भंडारण और परिवहन के आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पार्टी राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का रुख करेगी। जरूरत पड़ने पर हाई कोर्ट जाने की बात भी कही गई है।
अब सवाल यह है कि गंजाम में रेत की वास्तविक कमी है या फिर आपूर्ति व्यवस्था के बीच कहीं कोई ऐसा खेल चल रहा है, जिसका बोझ सीधे आम जनता की जेब पर पड़ रहा है? शिकायतों और आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन रेत के स्रोत से लेकर बिक्री तक पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी जांच होने से कई सवालों का जवाब मिल सकता है।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।
आपके क्षेत्र में भी कोई महत्वपूर्ण खबर, जनसमस्या या जनहित का मुद्दा हो तो हमें इस नंबर पर भेजें। 7647981711, 9303948009।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now