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एक समझौता, दो शिकायतें और कई सवाल! 5 लाख की कहानी पहुंची SP कार्यालय

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी

लैलूंगा के कोडकेल मामले में पहले समझौते की रकम को लेकर आरोप, फिर रेप केस में फंसाने की धमकी और दूसरी शादी का दावा,SP कार्यालय पहुंचीं अलग-अलग शिकायतें
एक ही मामले में बदलते बयान, समझौते की रकम और कथित धमकियों ने खड़े किए कई सवाल

रायगढ़ ACGN:- रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र के ग्राम कोडकेल से जुड़ा एक विवाद अब पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंच गया है। करीब 15 साल पुराने कथित संबंधों से जुड़े इस मामले में फरवरी 2026 में ₹5 लाख की राशि पर समझौता होने की बात सामने आई है। इसके बाद समझौते की रकम के कथित बंटवारे, पुलिस और पत्रकार के नाम पर पैसे लेने के आरोप तथा दोबारा बलात्कार के मामले में फंसाने की धमकी जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं।
मामले की खास बात यह है कि अगस्त 2026 में एक ही दिन दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग शिकायतें पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्रस्तुत की गईं, जिनमें एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतों में सामने आए विरोधाभासी दावों ने पूरे घटनाक्रम को और पेचीदा बना दिया है।
हालांकि, इन शिकायतों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तविक घटनाक्रम क्या है।


5 लाख रुपये में हुआ था समझौता, अब उसी रकम पर सवाल
प्राप्त शिकायतों के अनुसार ग्राम कोडकेल निवासी उजागर सिदार और फूलवती यादव के बीच लंबे समय से संबंध होने की बात कही गई है। दोनों पक्षों की ओर से दिए गए आवेदनों में फरवरी 2026 में विवाद को समाप्त करने के उद्देश्य से ₹5 लाख की राशि पर इकरारनामा किए जाने का उल्लेख है।
बताया गया कि समझौते के अनुसार भविष्य में दोनों पक्ष एक-दूसरे के जीवन में हस्तक्षेप नहीं करेंगे और किसी प्रकार की कानूनी शिकायत नहीं करेंगे।
लेकिन समझौते के कुछ ही समय बाद पूरा मामला एक बार फिर विवाद में आ गया।


₹2 लाख के कथित बंटवारे का आरोप, पत्रकार की भूमिका पर उठे सवाल
फूलवती यादव की ओर से 22 अप्रैल 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दिए गए आवेदन में छत्तीसगढ़ मीडिया एसोसिएशन के संभाग उपाध्यक्ष एवं पत्रकार रवि गुप्ता के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि ₹5 लाख की समझौता राशि में से फूलवती को कथित रूप से ₹3 लाख ही प्राप्त हुए, जबकि शेष ₹2 लाख लोकल पत्रकारों और तत्कालीन थाना प्रभारी, घरघोड़ा को मैनेज करने के नाम पर पत्रकार द्वारा रख लिए गए।
यह आरोप बेहद गंभीर है। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल व्यक्तिगत विवाद का मामला नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस और पत्रकारिता जैसे संस्थानों के नाम के कथित दुरुपयोग का सवाल भी खड़ा करेगा। हालांकि, इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है और संबंधित व्यक्ति का पक्ष जांच में सामने आना बाकी है।
अगस्त में फिर खुला मामला, दोनों पक्षों की अलग-अलग शिकायतें
मामला अगस्त में उस समय और उलझ गया जब 3 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग शिकायतें प्रस्तुत की गईं।
उजागर सिदार की शिकायत में आरोप लगाया गया कि ₹5 लाख की राशि दिए जाने के बाद भी पत्रकार रवि गुप्ता और फूलवती यादव द्वारा उससे और पैसों की मांग की जा रही है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम नहीं देने पर उसे बलात्कार के झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी जा रही है।
वहीं, इसी तारीख को फूलवती यादव की ओर से उजागर सिदार के खिलाफ अलग शिकायत प्रस्तुत की गई। इसमें करीब 15 वर्षों तक पति-पत्नी की तरह साथ रहने और संतान होने का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया कि उजागर ने उसे कथित रूप से धोखे में रखकर दूसरी शादी कर ली। शिकायत में उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।


समझौते के बाद फिर शिकायतें क्यों? जांच में सामने आएगा सच
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि फरवरी 2026 में दोनों पक्षों के बीच ₹5 लाख की राशि पर लिखित समझौता हुआ था, तो कुछ महीनों बाद विवाद दोबारा इतना गंभीर क्यों हो गया?
क्या समझौते की रकम को लेकर वास्तव में कोई विवाद हुआ? क्या पुलिस और पत्रकार के नाम का इस्तेमाल कर किसी प्रकार की अवैध वसूली की गई? क्या किसी पक्ष पर झूठे मुकदमे में फंसाने का दबाव बनाया गया? या फिर बाद में सामने आई शिकायतों के पीछे अलग परिस्थितियां हैं?
इन सभी सवालों का जवाब अब पुलिस जांच से ही सामने आ सकेगा।
                    पुलिस जांच पर टिकी नजरें
मामले में पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। अब जांच एजेंसी के सामने शिकायतों, इकरारनामे, लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, संबंधित व्यक्तियों के बयानों और लगाए गए आरोपों की वास्तविकता की पड़ताल करना महत्वपूर्ण होगा।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें व्यक्तिगत विवाद के साथ-साथ समझौते की रकम, कथित ब्लैकमेलिंग, पुलिस के नाम पर कथित वसूली और पत्रकार की भूमिका जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं।
अब निगाहें पुलिस जांच पर हैं। क्या शिकायतों में लगाए गए आरोपों में सच्चाई सामने आएगी? क्या ₹5 लाख के समझौते की पूरी कहानी स्पष्ट होगी? और क्या पुलिस अथवा पत्रकार के नाम पर कथित तौर पर रकम मांगने या लेने के आरोपों की भी जांच होगी?
फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिल सकेंगे। जब तक जांच पूरी नहीं होती, किसी भी पक्ष को दोषी मानना उचित नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर है कि विरोधाभासी शिकायतों ने इस पूरे मामले को सवालों के घेरे में ला दिया है और निष्पक्ष जांच अब सबसे जरूरी है।


प्रदीप मिश्रा
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