खनिज से आगे बढ़ने की तैयारी, हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग पर दांव
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
करीब 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों से बदलेगी औद्योगिक तस्वीर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मा, एआई और ग्रीन स्टील पर सरकार का जोर
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान लंबे समय से खनिज संपदा और प्राथमिक प्रसंस्करण से जुड़ी रही है। राज्य के पास कोयला, लौह अयस्क और अन्य खनिज संसाधनों का मजबूत आधार है, लेकिन अब सरकार इस पारंपरिक पहचान से आगे बढ़कर कच्चे संसाधनों को तैयार और उच्च मूल्य वाले उत्पादों में बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य की औद्योगिक रणनीति में इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, रक्षा उपकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्रीन स्टील जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 को इस बदलाव का आधार माना जा रहा है। नीति में स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और मूल्य संवर्धन के साथ आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों में निवेश को प्रोत्साहित करने का प्रावधान है। इसका बड़ा लक्ष्य यही है कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कच्चे माल की आपूर्ति करने वाला राज्य न रहे, बल्कि यहां तैयार उत्पादों और हाई-टेक उद्योगों का मजबूत नेटवर्क विकसित हो।

करीब 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव, रोजगार की बड़ी उम्मीद
औद्योगिक नीति लागू होने के बाद राज्य में निवेशकों की रुचि बढ़ने का दावा किया जा रहा है। राज्य के निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के अनुसार पिछले करीब 18 महीनों में लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के जरिए 1.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है।
इन निवेश प्रस्तावों में पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों की भी हिस्सेदारी बताई जा रही है। नवा रायपुर में एआई और डेटा सेंटर से जुड़े निवेश प्रस्ताव तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्ताव राज्य की बदलती औद्योगिक दिशा का संकेत दे रहे हैं।
इसी क्रम में राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर यानी EMC 2.0 को मंजूरी मिली है। इससे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और करीब 9,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है।

स्टील उत्पादन से ग्रीन स्टील की ओर नजर
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख स्टील उत्पादक राज्यों में शामिल है। अब राज्य इस स्थापित औद्योगिक आधार को अगली पीढ़ी के उत्पादन से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। दुनिया में कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन की मांग बढ़ने के साथ ग्रीन स्टील को भविष्य के बड़े औद्योगिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
हाल ही में आयोजित छत्तीसगढ़ ग्रीन स्टील डायलॉग के दौरान करीब 13,840 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आने की बात कही गई है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य अपने मौजूदा स्टील उद्योग, खनिज संसाधन और ऊर्जा आधार का इस्तेमाल कम कार्बन उत्सर्जन वाले और अधिक मूल्य वाले स्टील उत्पादों के निर्माण में करना चाहता है।
फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स से खुल रहे नए दरवाजे
फार्मास्यूटिकल्स भी छत्तीसगढ़ की बदलती औद्योगिक तस्वीर में महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभर रहा है। पिछले करीब 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र में लगभग 992.53 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आने की जानकारी दी गई है, जबकि 216 करोड़ रुपये के चार प्रोजेक्ट कार्यान्वयन के चरण में बताए गए हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भी देशभर में तेजी से विस्तार हो रहा है। केंद्र सरकार की इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर बड़े निवेश को मंजूरी मिल रही है। ऐसे समय में राजनांदगांव का EMC 2.0 छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन से जोड़ने का अवसर दे सकता है।
बस्तर और सरगुजा में स्थानीय संसाधनों से रोजगार की उम्मीद
औद्योगिक विकास की यह रणनीति केवल बड़े शहरों और बड़े उद्योगों तक सीमित रखने के बजाय बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों के स्थानीय संसाधनों को भी इससे जोड़ने की कोशिश है। वन उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय कच्चे माल पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय रोजगार तथा उद्यमिता के अवसर बढ़ सकते हैं।
सरकार निवेश को जमीन पर उतारने के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था, राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड और ऑनलाइन स्वीकृति तंत्र को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। 100 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाओं के लिए प्राथमिकता आधारित सुविधाएं और त्वरित अनुमोदन की व्यवस्था भी की गई है।
छत्तीसगढ़ के पास खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक आधार की ताकत पहले से मौजूद है। अब चुनौती और अवसर दोनों इस बात में हैं कि इन संसाधनों का अधिकतम मूल्य राज्य के भीतर ही कैसे तैयार किया जाए। यदि प्रस्तावित निवेश वास्तव में जमीन पर उतरते हैं और स्थानीय युवाओं को पर्याप्त रोजगार मिलता है, तो खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर छत्तीसगढ़ का यह बदलाव प्रदेश की औद्योगिक तस्वीर को लंबे समय के लिए बदल सकता है।
प्रदीप मिश्रा
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