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कीचड़ भरे रास्तों से पीड़ितों तक पहुंचे डॉ. प्रेमा साईं

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बीजापुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

दुर्गम इलाकों में नक्सल पीड़ित चार परिवारों से मिले, आर्थिक मदद के साथ बच्चों को बांटी शैक्षणिक सामग्री; बेटी की शादी का पूरा खर्च उठाने की घोषणा

बीजापुर ACGN:- बस्तर के घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में बारिश और कीचड़ से भरे रास्तों की मुश्किलों के बीच मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों तक पहुंचे। उनका उद्देश्य पीड़ित परिवारों का हाल जानना, उनकी परिस्थितियों को करीब से समझना और जरूरत की घड़ी में उनके साथ खड़े होने का संदेश देना रहा।
यमपुर (पामेड़) से नेलाकांकेर तक की इस यात्रा में रास्ते की कठिनाइयों ने कई बार चुनौती खड़ी की। यमपुर पहुंचने के दौरान बारिश और कीचड़ के कारण काफिले का एक वाहन कीचड़ में फंस गया, जबकि एक अन्य वाहन खराब हो गया। इसके बावजूद यात्रा नहीं रोकी गई और डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ग्रामीणों के बीच पहुंचे।
यमपुर में उन्होंने नक्सल हिंसा में जान गंवाने वाले सुन्नम सम्मैया और वेक्को संदीप के परिवारों से मुलाकात की। सुन्नम सम्मैया की पत्नी नर्सम्मा और उनके दो छोटे बच्चों से बातचीत कर परिवार की स्थिति जानी। वहीं वेक्को संदीप की पत्नी आरती और उनके नौ वर्षीय पुत्र से भी मुलाकात की।
दोनों परिवारों को 21-21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके अलावा महिलाओं को साड़ी और बच्चों को कपड़े, कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स व चप्पल वितरित की गई। ग्रामीणों को दिव्य कवच और भभूति भी प्रदान की गई।


      ग्रामीणों के साथ बैठकर किया भोजन, सुनी समस्याएं
दुर्गम रास्तों और खराब मौसम के बावजूद डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने ग्रामीणों के बीच समय बिताया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठकर भोजन किया और उनकी समस्याएं सुनीं। उनके इस सहज व्यवहार से ग्रामीणों में अपनत्व और भरोसे का भाव देखने को मिला।
यमपुर के बाद उनका काफिला नेलाकांकेर पहुंचा, जहां ग्रामीणों ने उनका आत्मीय स्वागत किया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उनसे मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। यहां उन्होंने वर्ष 2026 में नक्सल हिंसा में मारे गए 40 वर्षीय तिरुपति सोढ़ी के परिवार से मुलाकात की। पत्नी शांति और पांच संतानों वाले परिवार की परिस्थितियों को समझने के बाद उन्होंने 31 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।


          बेटी की शादी का पूरा खर्च उठाने की घोषणा
तिरुपति सोढ़ी के परिवार से बातचीत के दौरान डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने उनकी बेटी संध्या की शादी को लेकर बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि संध्या की शादी का पूरा खर्च वे स्वयं उठाएंगे और कन्यादान भी करेंगे।
इस घोषणा के बाद परिवार के सदस्यों के साथ ग्रामीण भी भावुक हो उठे। इस पहल को केवल आर्थिक सहायता के रूप में नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार की जिम्मेदारी में सहभागी बनने के प्रयास के तौर पर देखा गया।
नेलाकांकेर में उन्होंने 23 वर्षीय रवि कट्टम के परिवार से भी मुलाकात की। रवि की वर्ष 2026 में नक्सल हिंसा में मृत्यु हुई थी और वह अपने परिवार की इकलौती संतान थे। परिवार की स्थिति जानने के बाद डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने 31 हजार रुपये की सहयोग राशि प्रदान की तथा भविष्य में भी यथासंभव मदद का भरोसा दिया।
               बच्चों के पैरों में खुद पहनाई चप्पल
सहायता वितरण के दौरान बच्चों के प्रति डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज का आत्मीय व्यवहार भी चर्चा का विषय रहा। उन्होंने बच्चों को कपड़े, स्कूल बैग, कॉपी, पेन, कंपास बॉक्स और चप्पल वितरित कीं। कई बच्चों के पैरों में उन्होंने स्वयं चप्पल पहनाई और उन्हें दुलार किया।
बच्चों को अपने हाथों से चप्पल पहनाते देखकर ग्रामीण भावुक हो उठे। सहायता सामग्री मिलने के बाद बच्चों के हाथों में स्कूल का सामान और पैरों में चप्पल देखकर परिवारों के चेहरों पर खुशी दिखाई दी। महिलाओं को भी साड़ी वितरित की गई।
बोले, पीड़ित परिवारों को भरोसा होना चाहिए कि वे अकेले नहीं
ग्रामीणों से बातचीत के दौरान डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा का उल्लेख करते हुए उन्हें ‘देव पुरुष’ बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से बस्तर में शांति और सामान्य जीवन की उम्मीद मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि शांति और विकास की दिशा में हो रहे प्रयासों का सबसे बड़ा लाभ आम ग्रामीणों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों तक पहुंचना चाहिए।
डॉ. प्रेमा साईं जी महाराज ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों की पीड़ा केवल उनकी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की जिम्मेदारी है। ऐसे परिवारों के बीच पहुंचना, उनकी बात सुनना और जरूरत के समय उनके साथ खड़ा होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सहायता का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवारों को यह विश्वास दिलाना है कि वे अकेले नहीं हैं। समाज उनके साथ खड़ा है और कठिन परिस्थितियों में उनका हाथ थामने के लिए लोग आगे आ रहे हैं।
बारिश, कीचड़, खराब वाहन और दुर्गम रास्तों के बावजूद अंदरूनी गांवों तक पहुंची यह यात्रा नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए राहत के साथ-साथ सम्मान, अपनत्व और भावनात्मक सहारे का संदेश देती नजर आई।

प्रदीप मिश्रा
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