संस्कृत की गूंज से सजा हिंदी विश्वविद्यालय : संस्कृत दिवस पर ज्ञान, संस्कृति और रचनात्मकता का दिखा संगम
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हावड़ा/कोलकाता, पश्चिम बंगाल
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- विनोद यादव
सुभाषित पाठ से लेकर संस्कृत नाट्य-मंचन और शोभायात्रा तक, विद्यार्थियों ने दिखाई भाषा के प्रति रचनात्मक अभिरुचि
हावड़ा/कोलकाता ACGN:- हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल में संस्कृत भाषा की समृद्ध परंपरा और उसकी समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए संस्कृत दिवस का भव्य आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों ने विश्वविद्यालय परिसर को ज्ञान, रचनात्मकता और भारतीय संस्कृति के रंग से सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रार्थना सभा से हुआ। इस दौरान संस्कृत ध्येय-मंत्र और सुभाषितों का सस्वर पाठ किया गया। इसके बाद सुभाषित-पाठ, संस्कृत गीत, कहानी-वाचन, सहज संस्कृत वार्तालाप, संस्कृत भाषण और अनुवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए संस्कृत भाषा के प्रति अपनी रुचि और प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

नाट्य-मंचन और शोभायात्रा ने बढ़ाई रौनक
संस्कृत दिवस समारोह में संस्कृत नाट्य-मंचन, संस्कृत प्रदर्शनी और संस्कृत शोभायात्रा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। नाट्य-मंचन के माध्यम से विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा की अभिव्यक्ति क्षमता और सांस्कृतिक विरासत को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
वहीं संस्कृत प्रदर्शनी के माध्यम से भाषा, साहित्य और उससे जुड़ी विविध जानकारियों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। संस्कृत शोभायात्रा ने पूरे आयोजन को उत्सवी स्वरूप प्रदान किया। इन गतिविधियों से विश्वविद्यालय परिसर में संस्कृत के प्रति उत्साह और सांस्कृतिक अभिरुचि का वातावरण देखने को मिला।

संस्कृत साहित्य की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नंदिनी साहू ने अपने संबोधन में संस्कृत भाषा और साहित्य की समृद्ध परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण आधार है, जिसने विश्व साहित्य, दर्शन, व्याकरण, काव्यशास्त्र और विभिन्न ज्ञान-विधाओं को समृद्ध किया है।

उन्होंने विश्व साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपरा में संस्कृत के योगदान का उल्लेख करते हुए पाणिनि, पतंजलि, यास्क, भर्तृहरि, कौटिल्य, गौतम, कणाद, कपिल, जैमिनि, बादरायण, आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, अभिनवगुप्त, आनंदवर्धन, मम्मट, भरत मुनि, वामन, कुंतक और विश्वनाथ कविराज जैसे महान विद्वानों एवं दार्शनिकों के योगदान को रेखांकित किया।

अध्ययन और शोध के लिए किया प्रेरित
कुलपति प्रो. साहू ने संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों को संस्कृत साहित्य के गंभीर अध्ययन के साथ इस क्षेत्र में शोध कार्य के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ते हुए नए अध्ययन और शोध की संभावनाओं को तलाशना आवश्यक है।
संस्कृत दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए भाषा सीखने के साथ भारतीय ज्ञान, साहित्य और संस्कृति को समझने का अवसर भी बना। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से संस्कृत को जीवंत और समकालीन संदर्भों से जोड़ने का प्रयास समारोह की विशेष उपलब्धि रहा।
प्रदीप मिश्रा
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