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पत्थरों में छिपा इतिहास अब खुलेगा राज, धनपुर की धरोहरों पर विशेषज्ञों की नजर

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर विशेषज्ञ दल ने धनपुर समेत बेनीबाई, भस्मासुर टापू और शहरखेरवा का किया सर्वेक्षण, संरक्षण और पर्यटन विकास की संभावनाएं तलाशी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ACGN:- गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की धरती में बिखरी प्राचीन सभ्यता और इतिहास की निशानियों को अब संरक्षण और संवर्धन की नई उम्मीद मिली है। संस्कृति एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर पुरातत्व विशेषज्ञों की टीम ने जिले के प्रमुख ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों का व्यापक मैदानी सर्वेक्षण किया। विशेषज्ञों ने धनपुर, बेनीबाई, भस्मासुर टापू और शहरखेरवा पहुंचकर वहां मौजूद मूर्तियों, मंदिरों, पुरावशेषों और स्मारकों की स्थिति को करीब से देखा तथा उनके ऐतिहासिक महत्व और संरक्षण की जरूरतों का आकलन किया।


मंत्री के निर्देश के बाद धरोहरों की खोज में उतरी विशेषज्ञ टीम
मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के जिले के प्रवास के दौरान कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने जिले में बिखरी प्राचीन पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता से उन्हें अवगत कराया था। इसके बाद मंत्री के निर्देश पर संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय तथा महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर से विशेषज्ञ दल को जिले के पुरातात्विक स्थलों के सर्वेक्षण के लिए भेजा गया।
चार सदस्यीय दल में पुरातत्ववेत्ता श्री प्रभात कुमार सिंह, उत्खनन सहायक श्री प्रवीण तिर्की, शोधकर्ता डॉ. राजीव जॉन मिंज और शोधकर्ता श्री अमर भारद्वाज शामिल रहे। टीम ने मौके पर पहुंचकर पुरातात्विक अवशेषों और स्मारकों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया तथा उनकी वर्तमान स्थिति को समझने का प्रयास किया।


धनपुर में मंदिरों और मूर्तियों ने खींचा विशेषज्ञों का ध्यान
सर्वेक्षण के दौरान विशेषज्ञ दल ने ग्राम धनपुर स्थित प्राचीन मंदिर और वहां स्थापित ऐतिहासिक मूर्तियों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। मंदिर की स्थापत्य संरचना, परिसर में मौजूद पुरावशेषों और संरक्षण की वर्तमान स्थिति का अध्ययन किया गया।
विशेषज्ञों ने धनपुर-धोबहर धरोहर केंद्र में संग्रहित प्राचीन मूर्तियों और अन्य पुरावशेषों को भी देखा। इन धरोहरों के ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के साथ इनके रखरखाव, संरक्षण और बेहतर प्रबंधन की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। प्राचीन मंदिर परिसर में संरचना के संरक्षण और आवश्यक सुदृढ़ीकरण की संभावनाओं का भी जायजा लिया गया।


बेनीबाई और भस्मासुर टापू में भी पुरानी निशानियों की पड़ताल
सर्वेक्षण दल ने बेनीबाई और भस्मासुर टापू पहुंचकर वहां मौजूद प्राचीन मूर्तियों और अन्य धरोहरों का निरीक्षण किया। विशेषज्ञों ने धरोहरों की वर्तमान स्थिति, रखरखाव और संरक्षण से जुड़े पहलुओं को बारीकी से देखा। मौके पर उपलब्ध पुरातात्विक सामग्री और स्मारकों को देखते हुए आवश्यक संरक्षण उपायों की संभावनाओं का भी आकलन किया गया।


        शहरखेरवा में इतिहास की नई कड़ियों की तलाश
विशेषज्ञों ने ऐतिहासिक महत्व वाले शहरखेरवा क्षेत्र का भी विस्तृत सर्वेक्षण किया। यहां मौजूद पुरातात्विक अवशेषों और संभावित धरोहर स्थलों का निरीक्षण करते हुए क्षेत्र की पुरातात्विक संभावनाओं को समझने का प्रयास किया गया। उपलब्ध साक्ष्यों और स्थल की विशेषताओं के आधार पर आगे संरक्षण तथा शोध की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।


      कलेक्टर ने विशेषज्ञों से जानी सर्वेक्षण की पूरी तस्वीर
फील्ड सर्वेक्षण पूरा होने के बाद कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. ने रायपुर से पहुंचे विशेषज्ञ दल के साथ बैठक की। उन्होंने सर्वेक्षण के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी ली। बैठक में विभिन्न पुरातात्विक स्थलों की वर्तमान स्थिति, संरक्षण की जरूरत और आवश्यक कार्यों को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
कलेक्टर ने पुरातात्विक मूर्तियों और स्मारकों के संरक्षण तथा सुदृढ़ीकरण से जुड़े जरूरी कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि धनपुर क्षेत्र की प्राचीन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें जिले की अमूल्य पहचान हैं। इनके संरक्षण और संवर्धन के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा, ताकि जिले की इस विरासत को व्यापक पहचान मिल सके।


              धरोहर बचेगी तो पर्यटन भी बढ़ेगा
धनपुर सहित जिले के अन्य पुरातात्विक स्थलों का सर्वेक्षण केवल पुराने अवशेषों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं को भी मजबूत कर सकता है। यदि इन स्थलों का व्यवस्थित संरक्षण, बेहतर रखरखाव और जरूरी सुविधाओं का विकास किया जाता है तो आने वाले समय में ये स्थान जिले के प्रमुख सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र बन सकते हैं।
फील्ड सर्वेक्षण के दौरान जिला प्रशासन और ग्राम पंचायत धनपुर की टीम भी विशेषज्ञों के साथ मौजूद रही। स्थानीय स्तर पर आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया गया। विशेषज्ञों की इस पहल से उम्मीद जगी है कि धनपुर और आसपास बिखरी ऐतिहासिक धरोहरों को अब संरक्षण की ठोस दिशा मिलने के साथ उनका इतिहास भी लोगों के सामने और अधिक स्पष्ट रूप से आ सकेगा।

प्रदीप मिश्रा
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