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ओड़िशा में बाढ़ का कहर, 12.87 लाख लोग प्रभावित

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भुवनेश्वर, ओड़िशा

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजयानंद जी महाराज, ओड़िशा ब्यूरो

ब्राह्मणी-बैतरणी का पानी घटा, सुवर्णरेखा अब भी खतरे के निशान से ऊपर; बालेश्वर के निचले इलाकों पर प्रशासन की कड़ी नजर

भुवनेश्वर ACGN:- ओड़िशा के उत्तरी हिस्सों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, हालांकि पिछले 24 घंटे में बारिश कम होने के बाद प्रमुख नदियों के जलस्तर में धीरे-धीरे गिरावट के संकेत मिले हैं। इसके बावजूद राज्य के छह जिलों में 12.87 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल के अनुसार जलस्तर में कमी आने से जाजपुर, भद्रक और बालेश्वर के कुछ क्षेत्रों में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन निचले इलाकों में प्रशासन की निगरानी लगातार जारी है।
प्रशासन के अनुसार जैनापुर गेट स्टेशन पर ब्राह्मणी नदी का जलस्तर घटकर 21.38 मीटर पर आ गया है, जबकि यहां खतरे का निशान 23 मीटर है। इसी तरह अखुआपड़ा में बैतरणी नदी 17.98 मीटर पर बह रही है, जबकि खतरे का निशान 18.33 मीटर है। बूढ़ाबलांग नदी का जलस्तर राष्ट्रीय राजमार्ग-5 के पास घटकर 5.76 मीटर हो गया है, जबकि खतरे का निशान 8.13 मीटर है। जलका नदी भी घटकर 6.28 मीटर पर आ गई है, जबकि इसका खतरे का निशान 6.50 मीटर है।


दूसरी ओर झारखंड से पानी छोड़े जाने के कारण सुवर्णरेखा नदी में अचानक उफान की स्थिति बनी थी। राजघाट में गुरुवार तड़के करीब तीन बजे नदी का जलस्तर 11.82 मीटर तक पहुंच गया था, जबकि यहां खतरे का निशान 10.36 मीटर है। हालांकि इसके बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई। केंद्रीय जल आयोग के अनुमान के अनुसार शाम छह बजे तक सुवर्णरेखा का जलस्तर करीब 10.45 मीटर तक पहुंचने की संभावना जताई गई थी। इसके बावजूद बालेश्वर के निचले इलाकों में प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।


बाढ़ से राज्य के 34 प्रखंडों के 743 गांव प्रभावित हुए हैं। कुल प्रभावित 12.87 लाख से अधिक लोगों में करीब छह लाख लोगों पर बाढ़ का गंभीर असर पड़ा है। प्रशासन द्वारा अब तक करीब 84,667 लोगों को सुरक्षित निकालकर 185 राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है। इन राहत केंद्रों में प्रभावित लोगों के लिए पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
बालेश्वर जिला बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है। यहां करीब 55 ग्राम पंचायतों में लगभग 28 हजार लोग अब भी बाढ़ की स्थिति से प्रभावित बताए जा रहे हैं। भद्रक जिले की 36 पंचायतों में करीब 1.90 लाख लोगों पर बाढ़ का असर पड़ा है। जाजपुर जिले में भी करीब 31 हजार लोग बाढ़ की चपेट में आए हैं। वहीं केंदुझर जिले में स्थिति काफी हद तक सामान्य होने की जानकारी सामने आई है।
बाढ़ के बीच प्रशासन ने पशुधन को बचाने के लिए भी राहत कार्य तेज किया है। सरकार की ओर से 14 अगस्त से अब तक बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर और केंद्रापड़ा जिलों में करीब 940 मीट्रिक टन पशु चारा वितरित किया गया है, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों को राहत मिल सके।
जलस्तर में कमी आने के साथ ही क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत का काम भी शुरू कर दिया गया है। बैतरणी और सालंदी नदियों के किनारे हुए कटाव तथा तटबंधों को हुए नुकसान की मरम्मत के लिए संबंधित विभागों की टीमें जुटी हुई हैं। जिला कलेक्टरों और क्षेत्रीय अधिकारियों की निगरानी में राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में लगातार काम कर रहे हैं।
विशेष राहत आयुक्त के अनुसार बालेश्वर जिले से बाढ़ का पानी पूरी तरह उतरने में अभी करीब तीन से पांच दिन का समय लग सकता है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना, प्रभावित परिवारों तक भोजन एवं आवश्यक सहायता पहुंचाना और क्षतिग्रस्त तटबंधों तथा बुनियादी ढांचे की मरम्मत करना है।
बारिश में कमी और प्रमुख नदियों के जलस्तर में गिरावट से राहत की उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन सुवर्णरेखा सहित कुछ नदियों के जलस्तर को देखते हुए प्रशासन अभी किसी तरह की लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव कार्य लगातार जारी है।


प्रदीप मिश्रा
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