5001 रक्षा सूत्रों में गूंजा देशप्रेम, छठे वर्ष भी जवानों को समर्पित विद्यार्थियों का अनूठा अभियान
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बिलासपुर छत्तीसगढ़
By ACGN- 7647981711, 9303948009
बिलासपुर – महमंद — बिलासपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महमंद में सीमा पर तैनात फौजी भाइयों के सम्मान, कृतज्ञता और राष्ट्रप्रेम की अनूठी परंपरा लगातार छठे वर्ष भी जारी रही। विद्यार्थियों ने अपने हाथों से लगभग 5001 रक्षा सूत्र तैयार कर देश की सीमाओं की रक्षा में जुटे जवानों के प्रति अपनी भावनाएं और शुभकामनाएं प्रकट कीं।
छठे वर्ष भी जारी रही सैनिकों के नाम रक्षा सूत्र की परंपरा – विद्यालय के विद्यार्थी पिछले पांच वर्षों से सीमाओं पर तैनात वीर जवानों के लिए स्नेह और शुभकामनाओं से भरे रक्षा सूत्र बनाकर भेजते आ रहे हैं। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ रक्षा सूत्र तैयार किए।

शांति सोनी के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने दिखाया उत्साह – सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी व्याख्याता शांति सोनी के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को फौजी भाइयों के लिए रक्षा सूत्र निर्माण के निर्देश दिए गए। पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, अखंडता, देशप्रेम और सैनिकों के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना रहा। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता का परिचय देते हुए लगभग 5001 रक्षा सूत्र तैयार किए।
710 रक्षा सूत्र बनाकर परी विश्वकर्मा रहीं प्रथम – संख्या के आधार पर कुमारी परी विश्वकर्मा ने सर्वाधिक 710 रक्षा सूत्र तैयार कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। वहीं कुमारी डिंपल यादव एवं कुमारी इशिका द्वितीय स्थान पर रहीं।

तिरंगे के रूप वाली राखी ने जीता रचनात्मकता का सम्मान – रचनात्मकता के आधार पर कुमारी डिंपल यादव द्वारा तिरंगे के स्वरूप में तैयार की गई राखी को निर्णायक मंडल ने प्रथम स्थान प्रदान किया। वहीं कुमारी पूजा यादव की राखी को द्वितीय स्थान मिला। विद्यार्थियों की कलात्मक प्रतिभा और देशभक्ति की भावना इस पूरी गतिविधि में साफ दिखाई दी।
रक्षा सूत्र नहीं, जवानों तक पहुंचेंगे स्नेह और सम्मान के भाव– व्याख्याता शांति सोनी ने कहा कि ये रक्षा सूत्र केवल धागे नहीं हैं, बल्कि सीमा पर डटे सैनिकों तक विद्यार्थियों के स्नेह, सम्मान और राष्ट्रभक्ति का संदेश पहुंचाने वाले भावनात्मक सेतु हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों को देश के प्रति अपने कर्तव्यों और सैनिकों के त्याग से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।

शिक्षा को राष्ट्रसेवा से जोड़ने की पहल – यह गतिविधि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की रचनात्मक, अनुभवात्मक और कौशल आधारित शिक्षा की अवधारणा को भी साकार करती है। रक्षा सूत्र निर्माण के माध्यम से विद्यार्थियों ने हस्तकौशल, सृजनात्मकता, कल्पनाशीलता, सामूहिक कार्य और व्यावहारिक कौशल को विकसित किया। साथ ही विद्यालय ने शिक्षा को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उसे राष्ट्रसेवा और सामाजिक संवेदना से जोड़ने का संदेश दिया।
प्रदीप मिश्रा
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