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‘कोशल फैब’ से कोसा को मिली वैश्विक पहचान की नई उड़ान

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लॉन्च किया प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड, बुनकरों और शिल्पकारों को 10.90 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता एवं पुरस्कार राशि वितरित।

रायपुर ACGN :- राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ के हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्र को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राज्य के प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ करते हुए कहा कि अब छत्तीसगढ़ का पारंपरिक कोसा और हथकरघा उत्पाद केवल देश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी अलग पहचान बनाएंगे।

उन्होंने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के हितग्राहियों, बुनकरों और मेधावी विद्यार्थियों को 10 करोड़ 90 लाख रुपये से अधिक की सहायता एवं पुरस्कार राशि वितरित की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल एक आयोजन नहीं बल्कि देश के करोड़ों बुनकरों और शिल्पकारों के श्रम, कौशल और स्वदेशी परंपरा को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1905 में शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 से 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य देश के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योग को नई ऊर्जा देना है।


मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का कोसा वस्त्र, बस्तर की बुनाई और प्रदेश की पारंपरिक कला आज अपनी गुणवत्ता और विशिष्टता के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुकी है। अब सरकार इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से ‘लूम टू लग्जरी’ की अवधारणा पर आधारित ‘कोशल फैब’ ब्रांड तैयार किया गया है, जो राज्य के उत्कृष्ट हथकरघा उत्पादों को प्रीमियम पहचान दिलाएगा।

इसके साथ ही उन्होंने हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का शुभारंभ कर डिजिटलीकरण की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बुनकरों और शिल्पकारों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में 469 बुनकर परिवारों को बुनकर शेड सह आवास की स्वीकृति दी गई है। 47 प्रदर्शनियों के माध्यम से लगभग 10 करोड़ रुपये के हथकरघा उत्पादों की बिक्री कराई गई, जिससे बुनकरों को बेहतर बाजार मिला। वहीं 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया गया है। इसके अलावा शासकीय विभागों द्वारा 436 करोड़ रुपये के हथकरघा वस्त्रों की खरीदी कर स्थानीय बुनकरों को आर्थिक मजबूती प्रदान की गई है।


उन्होंने बताया कि राज्य सरकार देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर छत्तीसगढ़ के हैंडलूम एवं हस्तशिल्प उत्पादों के शोरूम स्थापित कर रही है। रायपुर में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल स्थानीय उत्पादों के लिए आधुनिक विपणन केंद्र बनेगा। नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्थापित की जा रही है, जिससे 4,500 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलेगा। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) की स्थापना से प्रदेश के युवाओं को डिजाइन और टेक्सटाइल क्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होंगे।


कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश के लगभग एक लाख बीस हजार परिवार हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से प्रत्येक वर्ष कम से कम एक हथकरघा उत्पाद खरीदने का आग्रह करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों का उपयोग ही बुनकरों और शिल्पकारों के सम्मान का सबसे बड़ा माध्यम है। ग्रामोद्योग मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ी देशभर में अपनी अलग पहचान रखती है और सरकार इसे विश्व बाजार तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।


समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वदेशी प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा हथकरघा, खादी, हस्तशिल्प, माटीकला और रेशम उत्पादों के विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने कारीगरों से संवाद कर उनकी समस्याओं और संभावनाओं की जानकारी ली तथा स्वयं भुगतान कर एक कोसा साड़ी खरीदी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों की खरीद से बुनकरों और शिल्पकारों के जीवन में आर्थिक मजबूती आती है और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिलता है।


कार्यक्रम का सबसे प्रेरक दृश्य तब देखने को मिला जब बस्तर की आत्मसमर्पित महिलाओं ने पारंपरिक कोसा परिधानों में रैंप वॉक किया। यह प्रस्तुति मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ रही महिलाओं के आत्मविश्वास और बदलते बस्तर की सकारात्मक तस्वीर का प्रतीक बनी। उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया और मुख्यमंत्री ने भी महिलाओं से आत्मीय संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया।


इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने 935 मेधावी छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि, 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मान राशि, 49 बुनकरों के लिए आवास निर्माण स्वीकृति, पांच बुनकर सहकारी समितियों को भवन निर्माण सहायता, 85 बुनकरों को उन्नत करघे एवं उपकरण, 21 रेशम कृषकों को सहायता, 30 शिल्पकारों को आधुनिक टूल किट तथा 70 माटी शिल्पियों को विद्युत चाक वितरित किए। उत्कृष्ट बुनकरों को राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों से ‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि यदि हर नागरिक स्थानीय उत्पादों को अपनाएगा तो लाखों बुनकरों और शिल्पकारों के जीवन में समृद्धि आएगी और छत्तीसगढ़ का कोसा विश्व के प्रमुख ब्रांडों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

प्रदीप मिश्रा
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