नई खदानों पर सवाल: पहले पुनर्वास, फिर होगा खनन का विस्तार
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रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनिता गर्ग
रायगढ़ में एसईसीएल की तीन नई खदानों पर संभागायुक्त सख्त, विस्थापित गांवों के पुनर्वास की विस्तृत योजना प्रस्तुत करने के बाद ही आगे बढ़ेगी प्रक्रिया।
रायगढ़ ACGN :- रायगढ़ जिले में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा प्रस्तावित तीन नई कोयला खदानों के विकास पर फिलहाल पुनर्वास का मुद्दा सबसे बड़ी प्राथमिकता बनकर सामने आया है। बिलासपुर में आयोजित समीक्षा बैठक में संभागायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि खदानों के लिए अधिग्रहित होने वाले गांवों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत किए बिना आगे की प्रक्रिया नहीं बढ़ाई जाएगी।
सोमवार को बिलासपुर में आयोजित बैठक में एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी), रायगढ़ एवं कोरबा के कलेक्टर सहित संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में संभागायुक्त ने कहा कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित परिवारों के अधिकारों और सम्मानजनक पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि विस्तृत पुनर्वास योजना प्रस्तुत होने के बाद ही जिला पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन समिति (डीआरआरसी) की बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि एसईसीएल ने सबसे पहले पेलमा कोयला परियोजना को विकसित करने की प्रक्रिया प्रारंभ की है। लगभग 15 मिलियन टन वार्षिक उत्पादन क्षमता वाली यह परियोजना 2077 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होगी। इसके लिए पेलमा, उरबा, मडुवाडुमर, लालपुर, हिंझर, जरहीडिह, खर्रा, सक्ता और मिलूपारा सहित नौ गांवों की भूमि अधिग्रहित की जा रही है। इनमें से आठ गांव पूरी तरह विस्थापित होंगे।
संभागायुक्त ने अधिकारियों से पूछा कि इन गांवों के लोगों को कहां बसाया जाएगा और उनके लिए आवास, पेयजल, सड़क, विद्यालय, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं की क्या व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि केवल भूमि अधिग्रहण पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के लिए समुचित पुनर्वास और आजीविका सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि पेलमा, दुर्गापुर तथा पोरडा-चिमटापानी परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। अवैध निर्माण रोकने के उद्देश्य से ड्रोन सर्वेक्षण भी कराया गया है। एसईसीएल की वर्तमान पुनर्वास नीति के अनुसार प्रत्येक दो एकड़ भूमि अधिग्रहण पर एक स्थायी नौकरी का प्रावधान है, लेकिन पूरे गांवों के पुनर्वास के लिए समग्र आधारभूत सुविधाओं का विकास भी अनिवार्य होगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जब तक पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन की विस्तृत और संतोषजनक कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं की जाती, तब तक अधिग्रहण और परियोजनाओं की आगे की प्रक्रिया को अंतिम स्वीकृति नहीं दी जाएगी।
प्रदीप मिश्रा (मुख्य संपादक)
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