100 सीटर आदिवासी कन्या छात्रावास में बवाल, अधीक्षिका को हटाने की मांग पर छात्राओं ने किया चक्का जाम
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता
पौड़ी उपरोड़ा विकासखंड के छात्रावास में छात्राओं का फूटा आक्रोश, अधीक्षिका पर दुर्व्यवहार के आरोप; अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दिया निष्पक्ष जांच का आश्वासन।
कोरबा ACGN :- कोरबा जिले के पौड़ी उपरोड़ा विकासखंड स्थित 100 सीटर आदिवासी कन्या छात्रावास में गुरुवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई, जब बड़ी संख्या में छात्राओं ने छात्रावास की अधीक्षिका के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सड़क पर चक्का जाम कर दिया। छात्राओं के अचानक सड़क पर उतर आने से कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित रहा और क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार छात्राओं ने अधीक्षिका को तत्काल हटाने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि उनके साथ लंबे समय से अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। छात्राओं का कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर उन्हें डांट-फटकार लगाई जाती है, मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है तथा उनकी समस्याओं और शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुना जाता। लगातार बढ़ते असंतोष के बाद छात्राओं ने विरोध का रास्ता अपनाते हुए चक्का जाम कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।

सूत्रों के अनुसार अधीक्षिका की कार्यशैली को लेकर शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष भी छात्राओं एवं अन्य संबंधित लोगों द्वारा शिकायत की गई थी, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से छात्राओं में नाराजगी बनी रही, जो अब खुले विरोध के रूप में सामने आई है।
प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि छात्रावास परिसर में एक युवक बिना किसी वैध अनुमति के प्रवेश करता है। छात्राओं का कहना है कि इससे उनकी सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

घटना की सूचना मिलते ही विकासखंड प्रशासन, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्राओं से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्राओं ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो गई।
यह घटना केवल एक छात्रावास तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी छात्रावासों की व्यवस्था, सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। दूरस्थ ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की छात्राएं इन छात्रावासों में रहकर शिक्षा प्राप्त करती हैं, ऐसे में उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
समाचार लिखे जाने तक अधीक्षिका अथवा संबंधित विभाग की ओर से आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। छात्राओं ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाए तथा छात्रावास में सुरक्षा, अनुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
प्रदीप मिश्रा (मुख्य संपादक)
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