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गांवों का विकास किसने रोका? आखिर DMF की फाइलों पर किसकी खामोशी का ताला!

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मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :-

सरपंच संघ ने कलेक्टर को सौंपा छह सूत्रीय ज्ञापन, विकास कार्यों, मनरेगा भुगतान, DMF राशि और मानदेय सहित कई लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण की मांग; कांग्रेस ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप।

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर ACGN:- गांवों के विकास, सुशासन और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के सरकारी दावों के बीच मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में पंचायतों की समस्याएं एक बार फिर सामने आई हैं। जिले के सरपंचों को अपनी मांगों के निराकरण के लिए कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपना पड़ा। जिला सरपंच संघ का कहना है कि पंचायतों से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य लंबे समय से लंबित हैं, जिससे ग्रामीण विकास प्रभावित हो रहा है। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो गांवों में विकास कार्यों की गति और धीमी पड़ सकती है।


सरपंच संघ ने अपने ज्ञापन में मांग की है कि ग्राम पंचायतों के लंबित निर्माण कार्यों को तत्काल स्वीकृति प्रदान की जाए, क्योंकि स्वीकृति के अभाव में अनेक विकास कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
संघ ने दूसरी मांग में कहा है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत सामग्री एवं मजदूरी का लंबित भुगतान तत्काल किया जाए। लंबे समय से भुगतान अटका होने के कारण मजदूरों और सामग्री आपूर्तिकर्ताओं को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है तथा कई विकास कार्य अधूरे पड़े हैं।
तीसरी प्रमुख मांग जिला खनिज न्यास (DMF) योजना के अंतर्गत स्वीकृत विकास कार्यों की लंबित राशि तत्काल जारी करने की है। सरपंच संघ का कहना है कि भुगतान नहीं होने से कई पंचायतों में सड़क, भवन और अन्य विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं तथा पंचायतों की वित्तीय स्थिति कमजोर होती जा रही है।
संघ ने चौथी मांग में कहा है कि सरपंचों एवं पंचों का लगभग चार माह से लंबित मानदेय तत्काल जारी किया जाए। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि लगातार जनसेवा करने के बावजूद समय पर मानदेय नहीं मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पांचवीं मांग के तहत वर्ष में कम से कम तीन बार जिले के सभी सरपंचों की कलेक्टर के साथ बैठक आयोजित करने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि नियमित संवाद से पंचायतों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान होगा और प्रशासनिक समन्वय भी बेहतर बनेगा।
छठी मांग में जनपद स्तर पर मनोनीत सरपंचों की नियुक्ति शीघ्र किए जाने की बात कही गई है। संघ के अनुसार यह प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है, जिससे पंचायत व्यवस्था के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
ज्ञापन में उठाए गए मुद्दों में सबसे अधिक चर्चा DMF की लंबित फाइलों को लेकर हो रही है। सरपंच संघ का कहना है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए स्वीकृत राशि समय पर पंचायतों तक नहीं पहुंचने से अनेक निर्माण कार्य अधूरे हैं और विकास की रफ्तार थम सी गई है। वहीं मनरेगा भुगतान में देरी से मजदूरों और आपूर्तिकर्ताओं के सामने आर्थिक संकट की स्थिति बनी हुई है।
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि सरकार गांवों के विकास और सुशासन के दावे तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर पंचायतें आर्थिक संकट और प्रशासनिक उदासीनता का सामना कर रही हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि DMF की लंबित फाइलों का तत्काल निराकरण कर भुगतान किया जाए, मनरेगा एवं निर्माण कार्यों के सभी बकाया भुगतान जारी किए जाएं, सरपंच-पंचों का लंबित मानदेय तत्काल दिया जाए तथा पंचायतों के विकास में बाधा बनने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
हालांकि यह उल्लेखनीय है कि जिला सरपंच संघ द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में किसी राजनीतिक दल अथवा भाजपा सरकार पर प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाए गए हैं। भाजपा सरकार पर लगाए गए आरोप कांग्रेस के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में जिला प्रशासन अथवा राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पंचायतों की इन छह मांगों पर प्रशासन कितनी शीघ्र कार्रवाई करता है और क्या लंबे समय से लंबित विकास कार्यों को नई गति मिल पाती है या फिर विकास की फाइलें सरकारी दफ्तरों में यूं ही लंबित रहती हैं।


प्रदीप मिश्रा (मुख्य संपादक)
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