छिंदिया जंगल में सागौन तस्करी नाकाम, तीन गिरफ्तार; बड़े लकड़ी माफिया अब भी रहस्य के घेरे में
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू
45 हजार रुपये की सागौन लकड़ी और पिकअप वाहन जब्त, कार्रवाई के बाद पूरे तस्करी नेटवर्क की निष्पक्ष जांच की उठी मांग।
सूरजपुर ACGN: सूरजपुर जिले के रामानुजनगर वन परिक्षेत्र में एक बार फिर अवैध सागौन तस्करी का मामला सामने आया है। वन विभाग ने छिंदिया जंगल में देर रात गश्त के दौरान घेराबंदी कर सागौन की इमारती लकड़ी से लदे एक पिकअप वाहन को जब्त करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। विभाग के अनुसार जब्त सागौन लकड़ी की अनुमानित कीमत लगभग 45 हजार रुपये आंकी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लकड़ी को छिंदिया जंगल से सुमेरपुर की ओर ले जाया जा रहा था, जहां उसकी बिक्री की तैयारी थी।

वन विभाग की इस कार्रवाई को अवैध तस्करी के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही कई गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के जंगलों से वर्षों से बहुमूल्य सागौन सहित अन्य इमारती लकड़ियों की अवैध कटाई और तस्करी की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद बड़ी कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा है कि क्या कार्रवाई केवल परिवहन करने वाले छोटे आरोपियों तक सीमित रहेगी या फिर पूरे तस्करी नेटवर्क का भी खुलासा होगा।

जानकारों का मानना है कि जंगल से लकड़ी काटने वाला व्यक्ति इस अवैध कारोबार की अंतिम कड़ी होता है। वास्तविक लाभ उन लोगों को मिलता है जो लकड़ी की खरीद-फरोख्त, भंडारण और बड़े स्तर पर व्यापार करते हैं। यदि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच की जाए तो तस्करी से जुड़े कई बड़े नाम भी सामने आ सकते हैं।
जिले में संचालित लकड़ी मिलों को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सभी लाइसेंसी लकड़ी मिलों की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वहां रखी गई लकड़ी वैध स्रोतों से प्राप्त हुई है या नहीं। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी यह मामला बेहद गंभीर माना जा रहा है। लगातार हो रही अवैध कटाई से जंगलों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और वन्यजीवों का आवास भी प्रभावित हो रहा है। यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो भविष्य में इसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं।
वन परिक्षेत्राधिकारी पूजा यादव ने बताया कि नियमित गश्त के दौरान संदिग्ध पिकअप वाहन को रोककर जांच की गई, जिसमें सागौन की लकड़ी बरामद हुई। तीन आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है तथा मामले की विस्तृत जांच जारी है।
अब जिलेवासियों की निगाह इस बात पर है कि क्या यह कार्रवाई केवल तीन आरोपियों तक सीमित रहेगी या फिर वन विभाग पूरे तस्करी नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर उन लोगों तक भी पहुंचेगा, जो कथित रूप से इस अवैध कारोबार से सबसे अधिक लाभ उठा रहे हैं। यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रदीप मिश्रा
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