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पारेमेर पंचायत में 15वें वित्त आयोग के भुगतानों पर उठे सवाल, प्रशासनिक जांच जारी

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रायगढ़ (धरमजयगढ़), छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी

शिकायतकर्ता ने जीएसटी पंजीकृत फर्म के वास्तविक अस्तित्व पर जताया संदेह, सचिव ने कहा– फर्म संचालित है; मामले की जांच में जुटा प्रशासन

रायगढ़ ACGN:- जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के अंतर्गत ग्राम पंचायत पारेमेर में 15वें वित्त आयोग की राशि से किए गए भुगतानों को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। शासकीय राशि के उपयोग में कथित वित्तीय अनियमितता की शिकायत के बाद पूरा मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गया है। संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया जा रहा है और जांच एजेंसियां शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता का परीक्षण कर रही हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता ने भारत सरकार के लोक शिकायत निवारण पोर्टल के माध्यम से विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद शिकायत को आवश्यक जांच एवं कार्रवाई के लिए कलेक्टर कार्यालय रायगढ़ भेजा गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम पंचायत पारेमेर ने 15वें वित्त आयोग की राशि से जीएसटी पंजीकृत फर्म निधि ट्रेडर्स के नाम भुगतान किया, जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि फर्म के पंजीकृत पते के भौतिक सत्यापन के दौरान वहां न तो दुकान मिली, न गोदाम और न ही किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि संचालित होती दिखाई दी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जिस फर्म के नाम पर लाखों रुपये के शासकीय भुगतान किए गए, उसके वास्तविक व्यावसायिक अस्तित्व को लेकर गंभीर संदेह है। उनका आरोप है कि यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह केवल एक भुगतान का मामला नहीं होगा, बल्कि पंचायत स्तर पर शासकीय धनराशि के उपयोग और वित्तीय पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
शिकायत में उपलब्ध दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया गया है कि मेसर्स निधि ट्रेडर्स द्वारा जारी बिल क्रमांक 72 में क्रेशर गिट्टी के लिए 50 हजार रुपये तथा मिक्सर मशीन किराया 21,700 रुपये दर्शाते हुए कुल 71,700 रुपये का भुगतान दिखाया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बिल पर “टैक्स इनवॉइस” अंकित होने के बावजूद उसमें सीजीएसटी एवं एसजीएसटी का विवरण दर्ज नहीं है और बिल पर तिथि का भी उल्लेख नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस प्रकार के दस्तावेज वित्तीय एवं कर संबंधी नियमों के पालन पर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
मामले में पंचायत सचिव का पक्ष भी सामने आया है। पत्रकारों से दूरभाष पर चर्चा के दौरान सचिव ने संबंधित फर्म के संचालित होने का दावा किया और कहा कि फर्म अस्तित्व में है। वहीं शिकायतकर्ता इस दावे से असहमत हैं। उनका कहना है कि पंजीकृत पते और आसपास के क्षेत्र में उन्हें फर्म का कोई बोर्ड, दुकान, गोदाम अथवा व्यावसायिक गतिविधि दिखाई नहीं दी। उनका यह भी दावा है कि स्थानीय ग्रामीणों एवं क्षेत्र के व्यापारियों से पूछताछ करने पर भी ऐसी किसी सक्रिय फर्म की जानकारी नहीं मिली।
शिकायत में यह आरोप भी लगाया गया है कि संबंधित वेंडर के बिल केवल ग्राम पंचायत पारेमेर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य ग्राम पंचायतों में भी भुगतान के लिए उपयोग किए गए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो पूरे मामले की व्यापक एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं पंचायत कर्मियों और संबंधित वेंडर के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत तो नहीं रही।
शिकायतकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी), राज्य कर विभाग तथा जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित फर्म के पंजीकृत पते का भौतिक सत्यापन कराया जाए, प्रस्तुत जीएसटी बिलों एवं टैक्स इनवॉइस की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए तथा ग्राम पंचायत पारेमेर द्वारा 15वें वित्त आयोग मद से किए गए सभी भुगतानों का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराया जाए। साथ ही यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं वेंडर के विरुद्ध प्रचलित वित्तीय नियमों एवं विधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत पारेमेर में विकास कार्यों एवं वित्तीय लेन-देन को लेकर पूर्व में भी सवाल उठते रहे हैं। फिलहाल यह पूरा मामला प्रशासनिक जांच के अधीन है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच पूरी होने के उपरांत ही आगे की वैधानिक कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।

प्रदीप मिश्रा
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