ओडिशा के 15 जिलों में बाढ़ का कहर, 7.91 लाख लोग प्रभावित; 2.68 लाख अब भी जलमग्न क्षेत्रों में फंसे
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भुवनेश्वर, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता : स्वामी बिजयानंद जी महाराज (ओडिशा ब्यूरो)
57 ब्लॉकों के 1,362 गांव प्रभावित, 647 राहत शिविरों में जारी राहत कार्य; महानदी का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन अलर्ट।
भुवनेश्वर, ACGN। ओडिशा में लगातार हुई भारी वर्षा और प्रमुख नदियों के उफान पर आने से राज्य के 15 जिलों में बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण लाखों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री सुरेश पुजारी ने शुक्रवार को बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करते हुए बताया कि 57 ब्लॉकों, 446 ग्राम पंचायतों, 1,362 गांवों तथा 11 शहरी क्षेत्रों के 174 वार्ड बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इन क्षेत्रों में कुल 7,91,846 लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि 2,68,943 लोग अब भी जलमग्न इलाकों में फंसे हुए हैं।

राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ भोजन, स्वच्छ पेयजल, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 21,380 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है, जिससे धान सहित खरीफ की कई फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं करीब 700 मकान पूर्ण या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। प्रशासन द्वारा नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जा रहा है, जिसके बाद प्रभावित परिवारों को शासन की ओर से नियमानुसार सहायता प्रदान की जाएगी।

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राज्यभर में 647 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, बच्चों के लिए आवश्यक सामग्री तथा अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जलमग्न गांवों तक नावों के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है तथा बीमार, बुजुर्ग और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य लगातार जारी है।
मंत्री श्री सुरेश पुजारी ने बताया कि राज्य के शेष 15 जिले फिलहाल बाढ़ के खतरे से बाहर हैं। प्रभावित जिलों में बिजली, पेयजल और सड़क संपर्क बहाल करने के लिए विभिन्न विभागों की टीमें लगातार कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का पूरा ध्यान राहत कार्यों को गति देने और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।
राहत की बात यह है कि देवी, कुसभद्रा, इब, ब्राह्मणी, बैतरणी, बुढ़ाबलंग, सुवर्णरेखा, बांसधारा, ऋषिकुल्या और जलका नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे खतरे के निशान से नीचे आने लगा है। हालांकि महानदी का जलस्तर अब भी बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार मुंडली बैराज से लगभग 9.5 लाख क्यूसेक से अधिक बाढ़ का पानी गुजरने की संभावना है, जिससे महानदी के निचले क्षेत्रों में खतरा बना हुआ है।
राज्य सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, जलमग्न क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचें तथा आवश्यकता पड़ने पर तुरंत निकटतम राहत शिविर में पहुंचें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्थिति सामान्य होने तक राहत, बचाव और पुनर्वास अभियान लगातार जारी रहेगा।
प्रदीप मिश्रा
प्रधान संपादक
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ (ACGN)
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