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प्रेमचंद जयंती पर हिंदी विश्वविद्यालय में विशेष व्याख्यान, साहित्य की प्रासंगिकता पर हुई सार्थक चर्चा

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हावड़ा, पश्चिम बंगाल

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- विनोद यादव

प्रेमचंद के साहित्य में सामाजिक न्याय, मानवता और यथार्थवाद के मूल्यों को आज भी बताया गया प्रासंगिक।

हावड़ा ACGN :- हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल में मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने की। इस अवसर पर साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने प्रेमचंद के साहित्य की वर्तमान समय में प्रासंगिकता तथा उनके विचारों की सामाजिक उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।


कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली के हिंदी विभाग एवं विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर जितेंद्र श्रीवास्तव रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी ने किया।


अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की कहानियों और उपन्यासों में किसानों का शोषण, सामाजिक और आर्थिक विषमता, भ्रष्टाचार, जातिगत भेदभाव तथा नारी उत्पीड़न जैसे जिन मुद्दों को उठाया गया था, वे आज भी समाज के सामने गंभीर चुनौतियों के रूप में मौजूद हैं। इसलिए उनका साहित्य वर्तमान समय में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना अपने दौर में था।


विशिष्ट वक्ता प्रोफेसर जितेंद्र श्रीवास्तव ने अपने व्याख्यान में कहा कि प्रेमचंद का मानवतावादी दृष्टिकोण और शोषण के विरुद्ध उनका संघर्ष आज भी साहित्य, समाज और आम जनमानस के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपने लेखन के माध्यम से समाज के वंचित और शोषित वर्ग की पीड़ा को जिस संवेदनशीलता से अभिव्यक्त किया, वह उन्हें भारतीय साहित्य का कालजयी रचनाकार बनाता है।


कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी ने कहा कि समकालीन संदर्भों में भी प्रेमचंद का साहित्य पूरी तरह प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद केवल उपन्यास सम्राट ही नहीं, बल्कि समाज के सच्चे चिकित्सक भी थे। वैश्वीकरण और बाजारवाद के इस दौर में उनकी यथार्थवादी दृष्टि समाज को आत्ममंथन करने और मानवीय मूल्यों की ओर लौटने की प्रेरणा देती है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही।

प्रदीप मिश्रा
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