शिक्षा विभाग में आखिर ऐसी कौन-सी लापरवाही हुई कि कलेक्टर को जारी करना पड़ा नोटिस?
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
जनदर्शन के आवेदनों के निराकरण में ढिलाई और निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना की धीमी प्रगति पर जिला शिक्षा अधिकारी से तीन दिन में मांगा जवाब
कोरबा ACGN:- जिले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों के समयबद्ध निराकरण में लापरवाही और शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्री कुणाल दुदावत ने जिला शिक्षा अधिकारी श्री टी.पी. उपाध्याय को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि जनहित और शासन की प्राथमिकता वाले कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
कलेक्टर द्वारा जारी सूचना पत्र के अनुसार 28 जुलाई 2026 को आयोजित समय-सीमा (टी.एल.) बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी के विभाग से संबंधित जनदर्शन के लंबित मामलों की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई महत्वपूर्ण प्रकरणों का गंभीरता से निराकरण नहीं किया गया तथा प्रस्तुत जानकारी भी संतोषजनक नहीं थी।
समीक्षा में हाईस्कूल गोपालपुर में मानदेय व्याख्याता (गणित) की भर्ती में अधिक अंक प्राप्त अभ्यर्थी के चयन नहीं होने की शिकायत, सेवानिवृत्त शिक्षक को देय राशि के भुगतान से संबंधित आवेदन, मानदेय शिक्षक चयन प्रक्रिया में अधिक मेरिट होने के बावजूद चयन से वंचित अभ्यर्थी की शिकायत तथा छात्र सुरक्षा बीमा योजना के पात्र हितग्राही को सहायता राशि उपलब्ध कराने जैसे महत्वपूर्ण मामलों में अपेक्षित कार्रवाई लंबित पाई गई। इन मामलों में समय पर समाधान नहीं होने पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त की।
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि शासन की महत्वपूर्ण निःशुल्क पाठ्यपुस्तक योजना 2026-27 के अंतर्गत कक्षा पहली से दसवीं तक की पाठ्यपुस्तकों की स्कैनिंग एवं उसकी प्रगति के संबंध में भी जिला शिक्षा अधिकारी संतोषजनक जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सके। इसे शासन के प्राथमिकता वाले कार्यों के प्रति अपेक्षित जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं माना गया।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने कहा कि जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निराकरण जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है कि आम नागरिकों की समस्याओं का संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ समाधान सुनिश्चित करे तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन समय-सीमा के भीतर किया जाए।
इन परिस्थितियों को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी का आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत माना है। जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे तीन दिवस के भीतर संबंधित लिपिक, प्रधान पाठक अथवा प्रभारी अधिकारी के साथ आवश्यक अभिलेखों सहित उपस्थित होकर अपना स्पष्ट एवं तथ्यात्मक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।
सूचना पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी की होगी।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने दोहराया कि जनहित से जुड़े मामलों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भविष्य में भी नियमानुसार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी तथा प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
प्रदीप मिश्रा
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