लक्ष्मणानन्द सरस्वती जांच रिपोर्ट गुमशुदगी मामले की जांच क्राइम ब्रांच को
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भुवनेश्वर, ओड़िशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजयानंद जी महाराज, ओड़िशा ब्यूरो
मुख्यमंत्री कार्यालय से गायब दो न्यायिक जांच आयोगों की रिपोर्टों के मामले में सरकार ने लिया सख्त निर्णय, निष्पक्ष जांच के निर्देश
भुवनेश्वर ACGN:- मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से दो महत्वपूर्ण न्यायिक जांच आयोगों की रिपोर्ट कथित रूप से गायब होने के मामले में अब जांच का जिम्मा अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) को सौंप दिया गया है। स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती हत्याकांड से जुड़ी जांच रिपोर्ट के गुम होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए ओड़िशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को इसकी जांच अपराध शाखा से कराने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चूक मानते हुए निष्पक्ष और विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। अपराध शाखा अब यह पता लगाएगी कि मुख्यमंत्री कार्यालय के रिकॉर्ड से जांच आयोग की रिपोर्ट कब और किन परिस्थितियों में गायब हुई। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि संबंधित दस्तावेजों की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी के पास थी और क्या इसके पीछे किसी प्रकार की साजिश या जानबूझकर दस्तावेज हटाने का प्रयास किया गया।
गौरतलब है कि स्वामी लक्ष्मणानन्द सरस्वती हत्याकांड और भुवनेश्वर स्थित सम अस्पताल में आग लगने की घटना की जांच के लिए गठित दो न्यायिक आयोगों की अंतिम रिपोर्टें मुख्यमंत्री कार्यालय से गायब होने की जानकारी सामने आई थी। इस मामले में पहले ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी थी, जिसके बाद प्रारंभिक जांच शुरू की गई थी। अब अपराध शाखा पूरे मामले की गहराई से पड़ताल करेगी।
जांच के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में पूर्व में कार्यरत अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच के दायरे में पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के कार्यकाल में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इनमें तत्कालीन मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव राजेश वर्मा, पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव यूएन बेहरा, पूर्व आईएएस अधिकारी एवं मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष कार्य अधिकारी रहे मनोज मिश्र तथा पूर्व आईएएस अधिकारी और बीजू जनता दल के पूर्व नेता वीके पांडियन के नाम सामने आए हैं।
जानकारी के अनुसार मनोज मिश्र पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। वहीं राजेश वर्मा और यूएन बेहरा को भी जांच में सहयोग के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। इसके अलावा वीके पांडियन को भी पूछताछ के लिए बुलाए जाने की जानकारी सामने आई है।
अपराध शाखा अब दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था, रिकॉर्ड प्रबंधन प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की जांच करेगी। इस संवेदनशील मामले में सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या जानबूझकर की गई कार्रवाई सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सके।
प्रदीप मिश्रा
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