राखीगढ़ी की ऐतिहासिक विरासत से रूबरू हुए मंत्री राजेश अग्रवाल
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू
हरियाणा के विश्वप्रसिद्ध राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल का किया अवलोकन, विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक पर्यटन को नई दिशा देने की कही बात। छत्तीसगढ़ की धरोहरों के संरक्षण पर दिया जोर
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने हरियाणा प्रवास के दौरान विश्व की प्राचीनतम नगरीय सभ्यताओं में शामिल सिंधु-घाटी (हड़प्पा) सभ्यता के प्रमुख पुरातात्विक स्थल राखीगढ़ी का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने यहां प्राप्त पुरातात्विक अवशेषों, प्राचीन नगर नियोजन, शिल्पकला, जल प्रबंधन प्रणाली तथा औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्यों का विस्तार से अध्ययन किया। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी भारतीय सभ्यता की प्राचीन सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और सामाजिक प्रगति का अद्भुत प्रमाण है, जो विश्व पटल पर भारत की समृद्ध विरासत को स्थापित करता है।

अवलोकन के दौरान मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि राखीगढ़ी केवल एक पुरातात्विक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के गौरवशाली इतिहास का जीवंत दस्तावेज है। यहां मिले अवशेष इस बात के प्रमाण हैं कि हजारों वर्ष पूर्व भी भारत में सुव्यवस्थित नगर नियोजन, विकसित शिल्प परंपरा, सशक्त व्यापारिक व्यवस्था और समृद्ध सांस्कृतिक जीवन विद्यमान था। ऐसे ऐतिहासिक स्थल हमारी सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध करते हैं और इतिहास को पुस्तकों से बाहर निकालकर प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने कहा कि देश की अमूल्य पुरातात्विक धरोहरों का संरक्षण, संवर्धन और उनके ऐतिहासिक महत्व को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यह कार्य केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि समाज, शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से ही हमारी विरासत सुरक्षित रह सकती है।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा के राखीगढ़ी जैसे पुरातात्विक स्थलों का संरक्षण पूरे देश के लिए प्रेरणादायक है। इसी प्रकार छत्तीसगढ़ भी हजारों वर्षों की समृद्ध सांस्कृतिक और पुरातात्विक विरासत का धनी प्रदेश है। प्रदेश के सिरपुर, बारसूर, भोरमदेव, मदकूद्वीप, ताला, मल्हार, रतनपुर, राजिम और दंतेवाड़ा जैसे ऐतिहासिक स्थल भारतीय संस्कृति, स्थापत्य कला और धार्मिक सहिष्णुता के अमूल्य प्रतीक हैं। इन स्थलों में स्थित प्राचीन मंदिर, बौद्ध विहार तथा शैव, वैष्णव और जैन परंपराओं से जुड़े स्मारक आज भी प्रदेश की गौरवशाली सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ शासन का पर्यटन एवं संस्कृति विभाग प्रदेश की पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन, शोध, अभिलेखीकरण तथा पर्यटन विकास के लिए लगातार कार्य कर रहा है। विभाग का प्रयास है कि ऐतिहासिक स्थलों को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ते हुए उनकी मूल ऐतिहासिक गरिमा को अक्षुण्ण रखा जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक, शोधार्थी और विद्यार्थी भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का समग्र अनुभव प्राप्त कर सकें।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरें भी प्रदेश की सबसे बड़ी पूंजी हैं। इन धरोहरों का वैज्ञानिक संरक्षण, प्रभावी प्रचार-प्रसार और जनभागीदारी के साथ विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए व्यापक कार्य किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ भी इसी सोच के अनुरूप अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण, सांस्कृतिक गौरव के संवर्धन और विरासत पर्यटन के विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।
अपने संबोधन के अंत में श्री अग्रवाल ने कहा कि इतिहास और विरासत किसी भी समाज की पहचान और उसकी आत्मा होते हैं। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम अपनी पुरातात्विक धरोहरों को सुरक्षित रखें, उनके महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं तथा उन्हें सांस्कृतिक चेतना, शोध और पर्यटन विकास का सशक्त माध्यम बनाएं। इससे न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और प्रदेश में सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति प्राप्त होगी।
प्रदीप मिश्रा
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