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सच की तह तक

क्या सड़क के नाम पर उजड़ेंगे आशियाने? बालको की फोर-लेन योजना पर उठे बड़े सवाल

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

मार्ग के दोनों किनारे टू लेन और बीच के हिस्से को ही फोर-लेन बनाने पर उठे सवाल, स्थानीय लोगों ने रोजगार, पुनर्वास और परियोजना की पारदर्शिता को लेकर जिला प्रशासन से की हस्तक्षेप की मांग

कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के बालकोनगर क्षेत्र में वेदांता-बालको की प्रस्तावित सड़क निर्माण परियोजना अब केवल एक विकास कार्य नहीं रह गई है, बल्कि यह स्थानीय लोगों की आजीविका, रोजगार और भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। दर्री डैम से ग्राम रिसदी चौक तक प्रस्तावित सड़क के बीच स्थित परसाभाटा से रिसदा चौक तक के हिस्से को फोर-लेन बनाए जाने की योजना ने क्षेत्र के छोटे व्यापारियों, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रभावित लोगों का कहना है कि यदि इस परियोजना को वर्तमान स्वरूप में लागू किया गया तो वर्षों से सड़क किनारे मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे अनेक छोटे दुकानदारों के सामने बेदखली और बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बालको क्षेत्र में दशकों से संचालित वेदांता-बालको जैसे बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान से क्षेत्र के युवाओं और महिलाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद रहती है। प्रभावित लोगों का आरोप है कि स्थानीय लोगों को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जबकि विभिन्न कार्यों के लिए बाहरी क्षेत्रों से लोगों को लाकर रोजगार और कौशल आधारित कार्यों में प्राथमिकता दी जा रही है। उनका कहना है कि रोजगार के सीमित अवसरों के कारण अनेक परिवारों ने अपनी जीविका चलाने के लिए सड़क किनारे छोटी-छोटी दुकानें, गुमटियां, चाय-नाश्ते के ठेले, किराना, फल-सब्जी और अन्य छोटे व्यवसाय शुरू किए। इन्हीं व्यवसायों से उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है, बच्चों की पढ़ाई चलती है और घर का खर्च पूरा होता है।


अब इन्हीं दुकानदारों का आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया के दौरान उन्हें लगातार दुकानें हटाने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि अधिकारियों द्वारा दुकानों की तस्वीरें ली जा रही हैं, चेतावनी पत्र दिए जा रहे हैं और जल्द स्थान खाली करने के संकेत दिए जा रहे हैं। इससे प्रभावित परिवारों में भविष्य को लेकर गहरी चिंता और असुरक्षा का माहौल बन गया है।


प्रभावित व्यवसायी रामेश्वरी साहू का कहना है कि उद्योग में रोजगार नहीं मिलने के कारण उन्होंने सड़क किनारे छोटी दुकान खोलकर परिवार का जीवन-यापन शुरू किया। उनका कहना है कि यदि यही दुकान भी हटा दी गई तो परिवार के सामने आय का कोई दूसरा साधन नहीं बचेगा। उनका सवाल है कि जिन लोगों को उद्योग में रोजगार नहीं मिला, यदि उनसे उनका स्वरोजगार भी छीन लिया जाएगा तो वे अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे।

विवाद का सबसे बड़ा कारण सड़क निर्माण की प्रस्तावित रूपरेखा को लेकर सामने आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरी सड़क परियोजना में एक समान मानक अपनाने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग चौड़ाई निर्धारित की गई है, जिससे कई तरह की आशंकाएं जन्म ले रही हैं।

परियोजना के अनुसार पहला खंड दर्री डैम स्थित ध्यानचंद चौक से परसाभाटा के बजरंग चौक तक दो-लेन सड़क का है, जिसका निर्माण प्रशासन द्वारा कराया जाना प्रस्तावित है। दूसरा खंड परसाभाटा के बजरंग चौक से रिसदा चौक (भदरापारा) तक का है, जिसे फोर-लेन बनाए जाने की योजना बताई जा रही है और इस हिस्से का निर्माण वेदांता-बालको द्वारा किया जाना प्रस्तावित है। तीसरा खंड नया रिसदा भदरापारा चौक से ग्राम रिसदी चौक तक पुनः दो-लेन सड़क का है, जिसका निर्माण प्रशासन द्वारा कराया जाना प्रस्तावित है।

यही वह बिंदु है जिस पर सबसे अधिक सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिक पूछ रहे हैं कि जब सड़क का पहला और अंतिम हिस्सा दो-लेन है तो केवल बीच के हिस्से को फोर-लेन बनाने का औचित्य क्या है। उनका कहना है कि यदि यातायात का दबाव ही आधार है तो पूरी सड़क को एक समान चौड़ाई में विकसित किया जाना चाहिए। यदि केवल बीच का हिस्सा ही चौड़ा किया जाता है तो इससे सबसे अधिक प्रभावित वहीं के छोटे दुकानदार और स्थानीय परिवार होंगे, जो वर्षों से इसी मार्ग पर अपना व्यवसाय कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों की मांग है कि सड़क निर्माण की पूरी विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर), स्वीकृत नक्शा और तकनीकी मानकों को सार्वजनिक किया जाए ताकि आम नागरिकों के बीच व्याप्त भ्रम और आशंकाओं का समाधान हो सके। उनका कहना है कि यदि परियोजना पूरी तरह जनहित में है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
प्रभावित व्यापारियों ने यह भी मांग की है कि यदि किसी भी कारण से सड़क चौड़ीकरण आवश्यक है तो सबसे पहले प्रभावित परिवारों के लिए व्यवस्थित वेंडिंग ज़ोन विकसित किया जाए, उन्हें वैकल्पिक व्यापारिक स्थल उपलब्ध कराया जाए तथा बिना पुनर्वास किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई न की जाए। उनका कहना है कि विकास तभी सार्थक माना जाएगा जब उससे स्थानीय लोगों का जीवन बेहतर बने, न कि उनका रोजगार समाप्त हो जाए।


स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, उद्योग प्रबंधन, प्रशासन और प्रभावित नागरिकों के बीच खुली बैठक आयोजित करने तथा सभी पक्षों की सहमति से समाधान निकालने की मांग की है। साथ ही उन्होंने वेदांता-बालको में स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार में प्राथमिकता देने की भी मांग दोहराई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, बल्कि उनकी मांग केवल इतनी है कि विकास की कीमत स्थानीय लोगों की आजीविका और सम्मानजनक जीवन नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि प्रशासन यदि समय रहते पारदर्शी संवाद और मानवीय दृष्टिकोण अपनाता है तो विकास और जनहित के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है।

समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में वेदांता-बालको प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका था। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

प्रदीप मिश्रा
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