मंत्री राजेश अग्रवाल के सख्त संदेश के 24 घंटे के भीतर बड़ी कार्रवाई, राजहंस बस संचालक इरशाद आलम सहित छह लोगों पर एफआईआर दर्ज
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अंबिकापुर, सरगुजा (छत्तीसगढ़)
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता सौरभ साहू
मंत्री के अपराध के खिलाफ सख्त रुख के बाद कोतवाली अंबिकापुर में छह लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज, पुलिस ने शुरू की विवेचना।
अंबिकापुर। सरगुजा में अपराध और अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई को लेकर कैबिनेट मंत्री एवं अंबिकापुर विधायक राजेश अग्रवाल के सार्वजनिक बयान के महज 24 घंटे के भीतर कोतवाली थाना अंबिकापुर में राजहंस बस संचालक इरशाद आलम सहित छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने का मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम ने पूरे सरगुजा संभाग में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज कर दी है।
जानकारी के अनुसार, मंत्री राजेश अग्रवाल ने एक दिन पूर्व जारी अपने सार्वजनिक वीडियो संदेश में स्पष्ट कहा था कि सरगुजा जैसे शांत क्षेत्र में अपराधियों और उन्हें संरक्षण देने वालों के विरुद्ध कानून के दायरे में कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके अगले ही दिन कोतवाली थाना अंबिकापुर में अपराध क्रमांक 0510/2026 दर्ज किया गया।
एफआईआर के अनुसार इरशाद आलम, ज़िसान आलम, दिलशाद आलम, सलमान सहित छह लोगों पर फरार आरोपी शाबिर आलम एवं उसके पुत्र कामरान साबरी के साथ मिलकर एक व्यक्ति को जान से मारने की धमकी देने तथा सार्वजनिक स्थान पर गाली-गलौज करने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं मामले – उपलब्ध पुलिस अभिलेखों के अनुसार संबंधित व्यक्तियों से जुड़े मामलों में पूर्व में भी विभिन्न अपराध दर्ज किए जा चुके हैं। वर्ष 2024 में अपराध क्रमांक 151/2024 के तहत शाबिर आलम के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 294, 323, 506 एवं 34 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया था।
इसी प्रकार अपराध क्रमांक 0505/2025 में कामरान साबरी, सलमान उर्फ करिया एवं सोनू के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2024 के मामले में पुलिस सक्षम न्यायालय में चालान भी प्रस्तुत कर चुकी है।
गैंगस्टर नेटवर्क को लेकर पहले भी उठे थे सवाल – 29 जून 2026 को विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी सामने आई थी कि झारखंड के चर्चित गैंगवार से जुड़े कुछ दोषसिद्ध एवं फरार आरोपियों के कई वर्षों से अंबिकापुर क्षेत्र में रहने के संबंध में जानकारी सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने राजहंस बस संचालक बैदुल खान के विरुद्ध कथित रूप से फरार आरोपियों को शरण देने के आरोप में अपराध क्रमांक 454/2026 (05 जुलाई 2026) दर्ज किया था। इस मामले की जांच अभी भी जारी है।
सोशल मीडिया के दावों के बीच नया घटनाक्रम – एफआईआर दर्ज होने से पहले विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर इरशाद आलम सार्वजनिक रूप से यह दावा करते रहे थे कि बैदुल खान का कथित गैंगस्टरों से कोई संबंध नहीं है तथा उन्होंने प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग भी की थी। अब ताजा घटनाक्रम में इरशाद आलम स्वयं अपराध क्रमांक 0510/2026 में सह-आरोपी के रूप में नामजद किए गए हैं। हालांकि, आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायालय में विचारण और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।
पारिवारिक संबंधों को लेकर भी चर्चा – शहर में लंबे समय से बैदुल खान, जावेद आलम उर्फ बाबू और इरशाद आलम के बीच पारिवारिक संबंध होने की चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में कोई भी निष्कर्ष केवल पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।
पुलिस की निगरानी में जांच – सूत्रों के अनुसार सरगुजा रेंज के आईजी दीपक कुमार झा पूरे घटनाक्रम की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। विवेचना के दौरान यदि नए तथ्य और साक्ष्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
मंत्री ने संयम बरतने की अपील की – कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल ने अपने सार्वजनिक बयान में कहा है कि प्रकरण संवेदनशील है, इसलिए ऐसी अपुष्ट सूचनाओं के प्रसार से बचना चाहिए जिनसे पुलिस जांच प्रभावित हो। उन्होंने कानून व्यवस्था पर भरोसा जताते हुए कहा कि दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होगी तथा जांच पूरी होने तक केवल तथ्यात्मक और प्रमाणित जानकारी ही सार्वजनिक की जानी चाहिए।
प्रदीप मिश्रा
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