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क्या सुलझेगा महानदी विवाद? ट्रिब्यूनल ने ओडिशा-छत्तीसगढ़ को बातचीत का रास्ता दिखाया

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भुवनेश्वर, ओडिशा

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजयानंद जी महाराज

वर्षों पुराने जल विवाद पर नई उम्मीद, 21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

भुवनेश्वर ACGN :- ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच वर्षों से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत मिला है। नई दिल्ली में गुरुवार को महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) की सुनवाई के दौरान दोनों राज्यों को लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझने के बजाय आपसी संवाद और सहयोग के माध्यम से विवाद का समाधान निकालने की सलाह दी गई। इससे लंबे समय से लंबित इस विवाद के सुलझने की नई उम्मीद जगी है।


सुनवाई के दौरान ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) और जल शक्ति मंत्रालय दोनों राज्यों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए आपसी सहमति बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। न्यायाधिकरण का मानना है कि संवाद के माध्यम से निकला समाधान दोनों राज्यों के हित में अधिक प्रभावी और स्थायी होगा।
गौरतलब है कि महानदी के जल बंटवारे और जल प्रबंधन को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। दोनों राज्य अपने-अपने पक्ष पर कायम हैं, जिसके कारण यह मामला कई वर्षों से न्यायाधिकरण में विचाराधीन है।
ट्रिब्यूनल ने मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त निर्धारित की है। इस दौरान उम्मीद जताई गई है कि दोनों राज्यों के बीच आपसी चर्चा आगे बढ़ेगी और विवाद के समाधान की दिशा में ठोस पहल हो सकेगी।


सुनवाई के बाद ओडिशा के महाधिवक्ता पीताम्बर आचार्य ने कहा कि यदि दोनों राज्य सकारात्मक सोच के साथ बातचीत करें तो इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान संभव है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सहयोग और समन्वय से दोनों राज्यों के हितों की रक्षा करते हुए स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
महानदी को ओडिशा की जीवनरेखा माना जाता है। राज्य में कृषि, पेयजल, उद्योग और लाखों लोगों की आजीविका इस नदी पर निर्भर है। वहीं छत्तीसगढ़ के लिए भी महानदी सिंचाई, पेयजल और विकास परियोजनाओं का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में इस विवाद का समाधान केवल दोनों राज्यों के लिए ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय जल प्रबंधन और विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत के माध्यम से सहमति बनती है तो यह वर्षों पुराने जल विवाद का स्थायी समाधान साबित हो सकता है और भविष्य में जल संसाधनों के संतुलित एवं साझा उपयोग का नया मॉडल भी स्थापित करेगा।

प्रदीप मिश्रा
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