जंगल के बीच रोमांच, संरक्षण का संदेश… क्यों बन रही है नंदनवन सफारी पर्यटकों की पहली पसंद?
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
320 हेक्टेयर में फैली नंदनवन जंगल सफारी में हर साल बढ़ रही पर्यटकों की संख्या, वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति शिक्षा का बना प्रमुख केंद्र।
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर (अटल नगर) का नंदनवन जंगल सफारी आज केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। लगभग 320.15 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह आधुनिक जंगल सफारी हर वर्ष लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक वातावरण में वन्यजीवों को करीब से देखने के साथ-साथ जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी लेकर लौटते हैं।

नंदनवन जंगल सफारी की शुरुआत वर्ष 1979 में रायपुर में मिनी जू के रूप में हुई थी, जिसे वन्यजीवों के रेस्क्यू एवं संरक्षण केंद्र के रूप में विकसित किया गया। बाद में बढ़ती जरूरतों को देखते हुए नवा रायपुर में आधुनिक जंगल सफारी विकसित की गई। वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका लोकार्पण किया, जिसके बाद यह देशभर के पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बन गया।

यहां पर्यटकों के लिए शाकाहारी सफारी, बाघ सफारी, सिंह सफारी, भालू सफारी तथा जू जोन जैसी रोमांचक सुविधाएं उपलब्ध हैं। सफारी के दौरान पर्यटक चीतल, सांभर, नीलगाय, काला हिरण, भालू, बाघ और एशियाई शेरों को उनके प्राकृतिक वातावरण के बेहद करीब से देख सकते हैं। इसके अलावा जू जोन में विभिन्न प्रजातियों के पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्यजीव भी लोगों को आकर्षित करते हैं।
नंदनवन जंगल सफारी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल पर्यटन पर ही नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। विद्यार्थियों और पर्यटकों के लिए समय-समय पर पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनके माध्यम से जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण का संदेश दिया जाता है।

सफारी में विभिन्न राज्यों के चिड़ियाघरों के साथ पशु विनिमय कार्यक्रम के माध्यम से कई दुर्लभ वन्यजीव भी लाए गए हैं। यहां सफेद बाघ, दरियाई घोड़ा, घड़ियाल तथा क्लोन जंगली भैंसा ‘दीपाशा’ जैसे दुर्लभ जीव पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं।
वन विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में नंदनवन जंगल सफारी में आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी है। वर्ष 2025-26 में यहां 3 लाख 24 हजार 785 से अधिक पर्यटकों ने भ्रमण किया, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं।
वनमंडलाधिकारी थेजस शेखर के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की मंशानुरूप नंदनवन जंगल सफारी को पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण का आदर्श केंद्र बनाने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। यहां विश्व बाघ दिवस, अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस और वन्यजीव सप्ताह जैसे अवसरों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता है।

नवा रायपुर के सेक्टर-39 में स्थित यह जंगल सफारी स्वामी विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लगभग 15 किलोमीटर और रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पर्यटकों की सुविधा के लिए यहां सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। प्रत्येक सोमवार को जंगल सफारी बंद रहती है।
आज नंदनवन जंगल सफारी केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा का ऐसा अनूठा संगम बन चुका है, जहां रोमांच के साथ-साथ प्रकृति को समझने और उसे बचाने की प्रेरणा भी मिलती है।
प्रदीप मिश्रा
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