सीएसआर से बदलेगी आंगनबाड़ी की तस्वीर! क्या उद्योगों की साझेदारी मिटाएगी कुपोषण की चुनौती?
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
महिला एवं बाल विकास विभाग ने उद्योगों के साथ बनाई दीर्घकालिक रणनीति, पोषण, बाल विकास और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों को मिलेगी नई गति।
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में शुक्रवार को रायपुर के सर्किट हाउस में राज्य स्तरीय बैठक आयोजित कर विभाग और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों के बीच दीर्घकालिक सहयोग की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार ने की। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों का सर्वांगीण विकास राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। शासन की योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उद्योगों की सामाजिक भागीदारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने उद्योग जगत से दीर्घकालिक सहयोग का आह्वान करते हुए कहा, “आप सबके सहयोग से हम स्वर्णिम छत्तीसगढ़ बनाएंगे।”

प्रमुख सचिव ने कहा कि सीएसआर सहयोग के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों का आधुनिकीकरण, कुपोषण उन्मूलन, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल शिक्षा, पोषण संवर्धन और नवाचार आधारित गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी बच्चों और महिलाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने बैठक में विभाग की प्राथमिकताओं की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग महिला सशक्तिकरण, बच्चों के संरक्षण तथा उनके स्वास्थ्य एवं पोषण के तीन प्रमुख आयामों पर निरंतर कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि सीएसआर सहयोग से आंगनबाड़ी केंद्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सामग्री, डिजिटल संसाधन, स्वच्छ पेयजल, खेल सामग्री, स्वच्छता सुविधाएं तथा नवाचार आधारित गतिविधियों का विस्तार किया जा सकेगा।
बैठक में विभाग द्वारा तैयार संभावित सीएसआर परियोजनाओं की विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई। इनमें कुपोषण उन्मूलन, आंगनबाड़ी केंद्रों का उन्नयन, पोषण वाटिका निर्माण, मुनगा पौधारोपण, प्रारंभिक बाल विकास गतिविधियां, दिव्यांग अनुकूल सुविधाएं, किशोरियों के स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम तथा क्षमता निर्माण जैसी योजनाओं को प्राथमिकता दी गई।

उद्योगों के प्रतिनिधियों ने विभाग के प्रस्तावों में रुचि दिखाते हुए विभिन्न योजनाओं में सहयोग की संभावनाओं पर अपने सुझाव भी साझा किए। बैठक में निर्णय लिया गया कि विभाग और उद्योगों के बीच नियमित समन्वय स्थापित कर प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जाएगी तथा चरणबद्ध तरीके से सीएसआर परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा।
बैठक में इस बात पर भी विशेष बल दिया गया कि सीएसआर सहयोग केवल भवन निर्माण या अधोसंरचना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों के समग्र विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा, पोषण, डिजिटल सशक्तिकरण, नवाचार और सामुदायिक सहभागिता को भी समान प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए विभाग उद्योगों के साथ नियमित संवाद, समीक्षा और प्रभावी समन्वय तंत्र विकसित करेगा।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा सीएसआर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘पंखुड़ी’ पोर्टल विकसित किया गया है। वहीं राज्य शासन ‘स्टेट सीएसआर पोर्टल’ के माध्यम से विभागीय प्राथमिकताओं और औद्योगिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर रहा है, जिससे सामाजिक विकास योजनाओं का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ सकें।
प्रदीप मिश्रा
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