SECL की जनसुनवाई से पहले किसका हिसाब?
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा- लंबित मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के मुद्दे सुलझाए बिना मानिकपुर परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई स्वीकार नहीं होगी।
कोरबा ACGN:- पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की प्रस्तावित मानिकपुर ओपनकास्ट विस्तार परियोजना को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि प्रभावित ग्रामीणों से किए गए वर्षों पुराने वादे पूरे किए बिना पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित करना केवल औपचारिकता होगी, जिसे प्रभावित जनता स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक को पत्र भेजकर मांग की है कि 21 अगस्त 2026 को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले लंबित मुआवजा, पुनर्वास, रोजगार और विस्थापन से जुड़े सभी मामलों का समाधान किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो जनसुनवाई को तत्काल स्थगित कर नई तिथि घोषित की जाए।

जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि पर्यावरणीय जनसुनवाई केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा विषय है जिनकी भूमि, आवास, खेती, रोजगार और सामाजिक जीवन इस परियोजना से प्रभावित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भिलाई खुर्द, दादरखुर्द, मानिकपुर, इमलीडुग्गू, उरगा, कुरूडीह, बेन्दरकोना, गोढ़ी, पंडरीपानी और सेमीपाली सहित कई गांवों के लोगों से पूर्व में किए गए अधिकांश वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं।
उन्होंने कहा कि पिछली जनसुनवाइयों में रोजगार, पुनर्वास, मुआवजा, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, धूल नियंत्रण, ब्लास्टिंग से नुकसान की भरपाई, हरित पट्टी विकास और स्थानीय परिवहनकर्ताओं को अवसर देने जैसे अनेक आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अधिकांश अब भी अधूरे हैं। ऐसे में नई जनसुनवाई में दिए जाने वाले आश्वासनों पर जनता का विश्वास करना कठिन है।
पूर्व मंत्री ने भिलाई खुर्द के सर्वेक्षण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लगभग 50 परिवारों को मुआवजा और सर्वे प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जबकि समान परिस्थितियों वाले अन्य परिवारों को शामिल किया गया। उन्होंने सभी छूटे परिवारों का निष्पक्ष पुनः सर्वे कराने की मांग की।

उन्होंने पुनर्वास पैकेज को भी अपर्याप्त बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में 6.91 लाख रुपये में जमीन खरीदकर सम्मानजनक आवास बनाना संभव नहीं है। उन्होंने एसईसीएल से प्रभावित परिवारों के लिए विकसित पुनर्वास कॉलोनी बसाने की मांग की।
जयसिंह अग्रवाल ने कचांदी नाला को किसानों की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि बिना वैज्ञानिक अध्ययन, वैकल्पिक व्यवस्था और ग्रामीणों की सहमति के इसके डायवर्सन का निर्णय स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कोयला परिवहन के लिए आबादी से अलग रेलवे लाइन के समानांतर वैकल्पिक सड़क निर्माण का भी सुझाव दिया।
उन्होंने वर्ष 1964 से 1968 के बीच तत्कालीन एनसीडीसी द्वारा अधिग्रहित भूमि के लंबित मुआवजा मामलों को भी उठाते हुए कहा कि लगभग छह दशक बाद भी कई परिवार अपने वैधानिक अधिकारों के लिए भटक रहे हैं। एसईसीएल को ग्रामवार समीक्षा कर सभी पात्र उत्तराधिकारियों को उनका मुआवजा दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने मांग की कि जनसुनवाई से पहले पूर्व के सभी वादों की अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, लंबित मुआवजा एवं पुनर्वास मामलों का निराकरण हो, पुनर्वास पैकेज का पुनर्मूल्यांकन किया जाए, भिलाई खुर्द के सभी छूटे परिवारों को सर्वे में शामिल किया जाए तथा जिला प्रशासन, एसईसीएल और प्रभावित ग्रामीणों की संयुक्त बैठक आयोजित कर सभी विवादों का समाधान किया जाए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस विकास की विरोधी नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर स्थानीय लोगों के अधिकारों और सम्मान से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 21 अगस्त 2026 से पहले प्रमुख मुद्दों का समाधान नहीं किया गया और केवल औपचारिक जनसुनवाई आयोजित की गई, तो उसके दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।
प्रदीप मिश्रा
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