राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में चमकी छत्तीसगढ़ की रामनामी परंपरा
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘राम-नामी’ बनी सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण।
रायपुर ACGN :- छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में ‘राम-नामी’ डॉक्यूमेंट्री को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म का सम्मान मिलने पर पूरे प्रदेश में खुशी की लहर है। इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के लिए ऐतिहासिक बताते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक भरतबाला गणपति तथा पूरी निर्माण टीम को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि यह सम्मान केवल एक फिल्म की सफलता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का राष्ट्रीय सम्मान है। उन्होंने कहा कि रामनामी समाज अपनी अनूठी परंपराओं, भगवान श्रीराम के प्रति अटूट आस्था, सादगीपूर्ण जीवनशैली और सामाजिक समरसता के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है।
उन्होंने कहा कि शरीर पर ‘श्रीराम’ नाम अंकित कराने की अनोखी परंपरा, भक्ति, समानता और आध्यात्मिक जीवन मूल्यों का संदेश देने वाला रामनामी समाज छत्तीसगढ़ की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है। डॉक्यूमेंट्री ‘राम-नामी’ ने इन परंपराओं और जीवन मूल्यों को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर देश-दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है।
संस्कृति मंत्री ने कहा कि इस राष्ट्रीय सम्मान से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक अस्मिता को नई प्रतिष्ठा मिलेगी। साथ ही प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार को भी नई गति प्राप्त होगी। यह उपलब्धि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
श्री अग्रवाल ने विश्वास व्यक्त किया कि इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, जनजातीय विरासत, लोककलाओं और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति देश-विदेश में लोगों की रुचि और बढ़ेगी। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी तथा सांस्कृतिक पर्यटन को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।
उन्होंने निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी निर्माण टीम की सराहना करते हुए कहा कि उनकी यह सफलता छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाली प्रेरणादायी उपलब्धि है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी प्रदेश की लोक संस्कृति और परंपराओं पर आधारित ऐसे उत्कृष्ट रचनात्मक प्रयास निरंतर होते रहेंगे, जिससे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त होगी।

प्रदीप मिश्रा
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