श्री जगन्नाथ परंपरा से कोई समझौता नहीं: गजपति महाराजा ने इस्कॉन को दी सख्त चेतावनी
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पुरी, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी विजयानंद जी महाराज
स्नान यात्रा और रथयात्रा पारंपरिक तिथि पर ही मनाने की अपील, धार्मिक मर्यादा से समझौता नहीं होगा
पुरी ACGN :- भगवान श्री जगन्नाथ के आद्य सेवक एवं श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष गजपति महाराजा श्री दिव्यसिंह देव ने इस्कॉन (ISKCON) के गवर्निंग बॉडी कमिशन (जेबीसी) को पत्र लिखकर स्नान यात्रा और रथयात्रा के आयोजन को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि इन दोनों पवित्र उत्सवों को पारंपरिक तिथियों से हटकर मनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है तथा श्री जगन्नाथ परंपरा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
गजपति महाराजा ने अपने पत्र में इस्कॉन से आग्रह किया है कि वह दुनिया भर में संचालित अपने सभी मंदिरों में स्नान यात्रा और रथयात्रा का आयोजन निर्धारित वैदिक तिथियों के अनुसार ही सुनिश्चित करे। उन्होंने कहा कि श्री जगन्नाथ संस्कृति की मूल भावना यही है कि ये पवित्र उत्सव पूरी दुनिया में एक ही तिथि पर मनाए जाएं। अलग-अलग दिनों में आयोजन करना परंपरा और धार्मिक मर्यादा के विरुद्ध है।

पत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि स्नान यात्रा केवल ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही आयोजित की जानी चाहिए। वर्ष 2026 में यह तिथि 29 जून थी। उन्होंने याद दिलाया कि अक्टूबर 2025 में इस्कॉन ने वैश्विक स्तर पर स्नान यात्रा इसी तिथि पर मनाने पर सहमति जताई थी, लेकिन इसके बावजूद भारत के बाहर कई इस्कॉन मंदिरों में इसका आयोजन अन्य तिथियों पर किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई।
रथयात्रा के संबंध में गजपति महाराजा ने कहा कि यह उत्सव आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया से प्रारंभ होकर नौ दिनों तक ही सीमित रहना चाहिए। वर्ष 2026 में रथयात्रा 16 जुलाई से प्रारंभ हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत में अधिकांश स्थानों पर इस अवधि के भीतर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन कुछ देशों और मंदिरों में इसे निर्धारित समय सीमा से आगे बढ़ाया जा रहा है, जो परंपरा के अनुरूप नहीं है।
गजपति महाराजा ने अपने पत्र में सितंबर और अक्टूबर 2025 में भेजे गए पूर्व पत्राचार, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति द्वारा अनुमोदित विद्वानों की राय तथा मुक्तिमंडप पंडित सभा के हालिया वक्तव्य का भी उल्लेख किया है। उन्होंने जेबीसी से वर्ष 2025 में लिए गए निर्णय की पुनः समीक्षा करने और उसे शास्त्रीय परंपराओं तथा शंकराचार्य एवं वैष्णवाचार्यों के मार्गदर्शन के अनुरूप संशोधित करने का आग्रह किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि समय, स्थान और परिस्थितियों के अनुसार उत्सव के आयोजन की व्यवस्था में कुछ व्यावहारिक परिवर्तन संभव हो सकते हैं, लेकिन मूल तिथि में किसी भी प्रकार का परिवर्तन स्वीकार नहीं किया जा सकता। श्री जगन्नाथ की परंपरा की पवित्रता, धार्मिक एकरूपता और सनातन मर्यादा को बनाए रखना सभी श्रद्धालुओं और संस्थाओं की सामूहिक जिम्मेदारी है।
गजपति महाराजा ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे में उनके प्रमुख उत्सवों का आयोजन शास्त्रसम्मत तिथि पर ही होना चाहिए, ताकि परंपरा की गरिमा और सनातन संस्कृति की अखंडता बनी रहे।
प्रदीप मिश्रा
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