कर भुगतान उपकार नहीं, कानूनी दायित्व है; कोरबा के विकास का हिसाब दे वेदांता-बालको – पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
पूर्व मंत्री ने कंपनी के सामाजिक योगदान के दावों पर उठाए सवाल, हॉकी मैदान, आईटी कॉलेज सहयोग, रोजगार और पर्यावरण के मुद्दों पर मांगा जवाब
कोरबा ACGN:- पूर्व मंत्री श्री जयसिंह अग्रवाल ने वेदांता-बालको द्वारा पिछले 10 वर्षों में सरकार के खजाने में 5 लाख करोड़ रुपये के योगदान के प्रचार को लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि कर भुगतान किसी कंपनी का उपकार या दान नहीं बल्कि कानून के तहत उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आयकर, जीएसटी, सीमा शुल्क, रॉयल्टी और अन्य करों का भुगतान प्रत्येक उद्योग की वैधानिक बाध्यता है, जिसे सामाजिक योगदान के रूप में प्रस्तुत कर जनता को भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए।
श्री अग्रवाल ने कहा कि असली सवाल यह है कि कोरबा की धरती से प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर लाभ कमाने वाली कंपनी ने यहां की जनता और क्षेत्र के विकास के लिए वास्तव में कितना कार्य किया है। उन्होंने कहा कि कोरबा आज भी प्रदूषण, स्वास्थ्य समस्याओं, स्थानीय युवाओं के रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेल सुविधाओं और आधारभूत विकास जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है।
पूर्व मंत्री ने वेदांता-बालको द्वारा हॉकी खेल को बढ़ावा देने के लिए हॉकी को गोद लेने और राष्ट्रीय स्तर का एस्ट्रोटर्फ हॉकी मैदान बनाने के सार्वजनिक वादे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वादा अब तक पूरा नहीं हुआ है। आधुनिक खेल सुविधाओं के अभाव में कोरबा के प्रतिभाशाली खिलाड़ी प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने आईटी कॉलेज की स्थापना के समय कंपनी द्वारा आर्थिक सहयोग देने के आश्वासन का भी मुद्दा उठाते हुए कहा कि पर्याप्त सहयोग नहीं मिलने के कारण कॉलेज का संचालन प्रभावित हो रहा है और विद्यार्थियों का भविष्य संकट में पड़ रहा है।
श्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च करने वाली कंपनी को अपने किए गए वादों को पूरा करना चाहिए। उन्होंने वेदांता-बालको से कोरबा की जनता के सामने श्वेत पत्र जारी कर यह स्पष्ट करने की मांग की कि पिछले 10 वर्षों में कंपनी ने कोरबा से कितना लाभ अर्जित किया, क्षेत्र के विकास पर कितना निवेश किया, कितने स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार दिया, पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या कदम उठाए और CSR की राशि कहां-कहां खर्च की गई।
उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र से कोई उद्योग अपनी समृद्धि प्राप्त करता है, उसके विकास में भागीदारी निभाना उसकी नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी होती है। कोरबा की जनता को चमकदार प्रचार नहीं बल्कि स्वच्छ पर्यावरण, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक खेल सुविधाएं और रोजगार चाहिए।
पूर्व मंत्री ने कहा कि जनता अब विज्ञापनों से नहीं बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले कार्यों से किसी भी संस्था का मूल्यांकन करेगी। उन्होंने कहा कि कोरबा की जनता का संदेश स्पष्ट है — “प्रचार नहीं, विकास का हिसाब दीजिए; वादे नहीं, उन्हें पूरा करके दिखाइए।”
प्रदीप मिश्रा (प्रधान संपादक)
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