योग : मधुमेह-मुक्त जीवन की कुंजी और स्वस्थ भविष्य का आधार
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बिलासपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
विश्व मधुमेह दिवस पर स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश, श्रीमती शांति सोनी ने विद्यार्थियों को योग, ध्यान और संतुलित जीवनशैली अपनाने का दिया मंत्र
बिलासपुर। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते मधुमेह (डायबिटीज) जैसी बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विश्व मधुमेह दिवस पर स्वास्थ्य एवं योग के महत्व को लेकर विशेष संदेश दिया गया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महमंद, विकासखंड बिल्हा, जिला बिलासपुर की व्याख्याता एवं योग प्रशिक्षिका श्रीमती शांति सोनी ने कहा कि स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है और स्वस्थ जीवन के लिए नियमित योग, संतुलित आहार एवं अनुशासित दिनचर्या आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि मधुमेह केवल रक्त में शर्करा बढ़ने की समस्या नहीं, बल्कि शरीर की जैविक प्रक्रिया में होने वाला परिवर्तन है, जिसमें इंसुलिन की कमी या उसके सही उपयोग में बाधा के कारण यह बीमारी उत्पन्न होती है। वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव और असंतुलित खानपान के कारण मधुमेह का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
श्रीमती शांति सोनी ने कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान से शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है तथा तनाव नियंत्रित होता है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में प्रत्येक शनिवार स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को योग, प्राणायाम, ध्यान और स्वस्थ जीवनशैली की जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही प्रतिदिन 20 मिनट ध्यान का अभ्यास भी कराया जाता है।
विद्यार्थियों को सूर्य नमस्कार, वज्रासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, भुजंगासन, धनुरासन, पवनमुक्तासन सहित विभिन्न योग आसनों का अभ्यास कराया जाता है। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से अर्धमत्स्येन्द्रासन जैसे योगासन पाचन तंत्र एवं शरीर की आंतरिक क्रियाओं को संतुलित रखने में सहायक होते हैं।
श्रीमती सोनी ने कहा कि स्वस्थ जीवन केवल दवाइयों पर निर्भर नहीं है, बल्कि सही खानपान, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और सकारात्मक सोच से भी स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है। विद्यार्थियों को हरी सब्जियां, फल, अंकुरित अनाज, पर्याप्त जल सेवन और जंक फूड से दूरी रखने के लिए प्रेरित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि योग को केवल किसी विशेष दिवस तक सीमित न रखकर जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। जागरूक विद्यार्थी ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।
उन्होंने प्रेरक संदेश देते हुए कहा —
“योग अपनाओ, मधुमेह भगाओ।”
“स्वस्थ विद्यार्थी, उज्ज्वल भविष्य।”
“योग, ध्यान और प्राणायाम — स्वास्थ्य सुरक्षा के तीन आयाम।”
श्रीमती शांति सोनी ने संकल्प दिलाया कि हम नियमित योग करेंगे, संतुलित आहार अपनाएंगे और स्वयं स्वस्थ रहकर समाज को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाएंगे।
प्रदीप मिश्रा
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