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जनदर्शन में पहुंचे भिलाई बाजार के ग्रामीण, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन; SECL नौकरी में मूल प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता देने की मांग

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कोरबा छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009

अर्जन भाग-2 में बाहरी लोगों को रोजगार लाभ देने का विरोध, ग्रामीणों ने कहा- वास्तविक भू-स्वामियों के साथ हो न्याय

कोरबा ACGN:- ग्राम भिलाई बाजार, तहसील दीपका के ग्रामीणों ने सोमवार को कोरबा कलेक्ट्रेट में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।

ग्रामीणों ने SECL गेवरा परियोजना द्वारा किए जा रहे भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को स्थायी नौकरी देने की प्रक्रिया में ग्राम के मूलनिवासी एवं वास्तविक प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता देने की मांग रखी।
ग्रामीणों ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि ग्राम भिलाई बाजार अर्जन भाग-2 के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के लिए मिलने वाली स्थायी नौकरी उनके जीवन, आजीविका और भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए रोजगार का पहला अधिकार उन परिवारों को मिलना चाहिए जिनकी जमीन और जीवन सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि धारा-4 अधिसूचना जारी होने के बाद कुछ बाहरी व्यक्तियों द्वारा केवल SECL में नौकरी प्राप्त करने के उद्देश्य से ग्राम में जमीन खरीदी गई है। ऐसे लोगों का ग्राम से पुराना सामाजिक और पारंपरिक जुड़ाव नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल जमीन खरीद लेने के आधार पर ऐसे लोगों को प्रभावित परिवारों के समान रोजगार का लाभ नहीं दिया जाए।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें :-
• अर्जन भाग-2 से मिलने वाली स्थायी नौकरी में ग्राम भिलाई बाजार के मूलनिवासी एवं वास्तविक प्रभावित परिवारों को प्रथम प्राथमिकता दी जाए।
• प्रभावित परिवारों की पहचान राजस्व अभिलेख, अधिकार पत्र एवं वर्ष 2011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना के आधार पर की जाए।
• धारा-4 अधिसूचना के बाद नौकरी के उद्देश्य से खरीदी गई जमीनों की जांच कर उन्हें रोजगार पात्रता से बाहर रखा जाए।
• बाहरी व्यक्तियों द्वारा की गई भूमि खरीदी की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
• डीआरआरसी बैठक में इस विषय को प्राथमिकता से रखते हुए निर्णय लिया जाए।
• पुनर्वास एवं रोजगार नीति में वास्तविक प्रभावित परिवारों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों ने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन अधिग्रहण से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले मूल निवासियों के साथ न्याय होना चाहिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो वे अपने अधिकारों के लिए आगे आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

प्रदीप मिश्रा
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