नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 7647981711 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , धरमजयगढ़ में मिला सदियों पुरानी पांडुलिपियों का खजाना, पूर्वजों की विरासत पर संकट – Anjor Chhattisgarh News

Anjor Chhattisgarh News

सच की तह तक

धरमजयगढ़ में मिला सदियों पुरानी पांडुलिपियों का खजाना, पूर्वजों की विरासत पर संकट

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी

ज्ञान भारतम मिशन के सर्वे में सामने आया इतिहास का अनमोल भंडार, संरक्षण की जरूरत

रायगढ़ ACGN:- छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का धरमजयगढ़ क्षेत्र इन दिनों पुरातत्वविदों और इतिहास शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां ग्रामीण परिवारों के घरों में सदियों पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां आज भी सुरक्षित हैं, जिनमें प्राचीन चिकित्सा पद्धति, तंत्र-मंत्र, धार्मिक ग्रंथों और पारंपरिक ज्ञान का अनमोल संग्रह मौजूद है। लेकिन इन धरोहरों के बीच एक चिंता की खबर भी सामने आई है कि पूर्वजों से मिली कई पांडुलिपियां धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं।


भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना ज्ञान भारतम मिशन के तहत सामाजिक वैज्ञानिक एवं पुरातत्वविद् प्रो. डी.एस. मालिया अपनी टीम के साथ धरमजयगढ़ क्षेत्र के गांवों में प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वे कर रहे हैं। मई और जून 2026 में किए गए सर्वे के दौरान टीम ने 146 दुर्लभ पांडुलिपियों को चिन्हित कर उनके संरक्षण और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया शुरू की है।
बताया गया कि धरमजयगढ़ क्षेत्र में इससे पहले वर्ष 2003 और 2007 में भी सर्वे किया गया था। पुराने सर्वे और वर्तमान स्थिति की तुलना में कई परिवारों के पास सुरक्षित पांडुलिपियों की संख्या में कमी पाई गई है।


सर्वे के दौरान सामने आया कि जसकेतन परिवार के पास वर्ष 2003 में तीन दुर्लभ पांडुलिपियां थीं, लेकिन वर्तमान में उनके पुत्र गौतम के पास केवल एक पांडुलिपि ही बची है। इसी तरह भोय परिवार के पास पहले 16 पांडुलिपियां थीं, जो अब घटकर 9 रह गई हैं। परिजनों से पूछताछ में जानकारी मिली कि परिवार के बंटवारे और अलग-अलग स्थानों पर चले जाने के कारण कई पांडुलिपियां अन्य लोगों के पास चली गईं या उनका संरक्षण नहीं हो सका।
विशेषज्ञों का कहना है कि ये पांडुलिपियां केवल पुराने दस्तावेज नहीं हैं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, चिकित्सा, संस्कृति और वैज्ञानिक सोच का प्रमाण हैं। इनमें चिकित्सा मंजरी, गौ चिकित्सा, तंत्र विद्या, चंडी पाठ और लक्ष्मी पुराण जैसे दुर्लभ ग्रंथों का उल्लेख मिला है।


ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत अब इन पांडुलिपियों की पहचान, भौतिक सत्यापन, सूची तैयार करने और डिजिटल संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। विशेषज्ञ टीम पांडुलिपियों की भाषा, लिपि और विषय के आधार पर उनका दस्तावेजीकरण कर रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों तक यह विरासत सुरक्षित पहुंच सके।
प्रो. डी.एस. मालिया ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी परिवार के पास ताड़पत्र, ताम्रपत्र या पुराने कागजों पर लिखी कोई प्राचीन सामग्री मौजूद है तो उसे छिपाने के बजाय सरकार के संरक्षण अभियान से जोड़ें। उन्होंने कहा कि इससे मालिकाना हक समाप्त नहीं होगा, बल्कि उस परिवार और पूर्वजों का नाम ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण से जुड़ जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह अभियान केवल पुरानी किताबों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक शोध, विज्ञान और वैश्विक अध्ययन के लिए उपयोगी संसाधन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
धरमजयगढ़ की ये पांडुलिपियां इस बात का प्रमाण हैं कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आज भी ऐसा ज्ञान छिपा हुआ है, जो देश और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। जरूरत है तो केवल समय रहते इसे संरक्षित करने की।

प्रदीप मिश्रा (प्रधान संपादक)
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
अपने क्षेत्र के समाचार एवं विज्ञापन प्रसारित करने हेतु इस नंबर पर भेजें 7647981711 – 9303948009

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now