उदंती-सीतानदी में ऊदबिलाव की मौजूदगी से बढ़ी पर्यावरण संरक्षण की उम्मीद
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गरियाबंद, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
कैमरा ट्रैप में कैद हुए दुर्लभ ऊदबिलाव, स्वस्थ जल स्रोत और समृद्ध जैव विविधता का मिला बड़ा प्रमाण
गरियाबंद/ACGN:- विश्व ऊदबिलाव दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी पर्यावरणीय उपलब्धि सामने आई है। गरियाबंद जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के जल स्रोतों में ऊदबिलाव यानी ओटर की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं। वन विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के संयुक्त प्रयासों से लगाए गए कैमरा ट्रैप में ऊदबिलाव की स्पष्ट तस्वीरें कैद हुई हैं, जिससे यह साबित हुआ है कि क्षेत्र का जलीय पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी सुरक्षित और संतुलित बना हुआ है।
यह सफलता प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी श्री अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन और गरियाबंद वनमंडल के डीएफओ श्री वरुण जैन के सहयोग से संभव हो पाई है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार ऊदबिलाव की मौजूदगी किसी भी जल स्रोत की स्वच्छता और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊदबिलाव बेहद संवेदनशील वन्यजीव है, जो केवल स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोतों में ही निवास करता है। नदियों, तालाबों और मीठे पानी के अन्य स्रोतों की गुणवत्ता को आंकने में इसे जैव संकेतक माना जाता है। इसकी मौजूदगी किसी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ पर्यावरण का प्रमाण होती है।
दुनियाभर में ऊदबिलाव की 13 प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि भारत में इसकी तीन प्रमुख प्रजातियां मौजूद हैं। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में इन तीनों प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है, जो राज्य की समृद्ध प्राकृतिक संपदा को दर्शाती है।
वन विभाग के अनुसार वर्ष 2021 से राज्य में ऊदबिलाव संरक्षण को लेकर लगातार शोध और अध्ययन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा को संरक्षण अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कोरबा, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर संभाग में कैमरा ट्रैप और मैदानी सर्वे के माध्यम से इनके व्यवहार, आवास और प्रजनन से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। शोधकर्ता श्रीमती निधि सिंह के नेतृत्व में तैयार अध्ययन रिपोर्ट भी वन विभाग को सौंपी गई है।
वन विभाग और विज्ञान सभा द्वारा स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका असर अब देखने को मिल रहा है। स्थानीय ग्रामीण और मछुआरे अब ऊदबिलाव संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक हुए हैं और कई जगहों से इनके रेस्क्यू की जानकारी भी लोगों द्वारा स्वयं दी जा रही है।
वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जल स्रोतों को स्वच्छ रखें और प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक, कांच और अन्य कचरा न फैलाएं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊदबिलाव जैसे दुर्लभ वन्यजीवों का संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि जनभागीदारी से ही संभव है।
प्रदीप मिश्रा
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