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बदलते बस्तर की नई पहचान: अब नक्सल नहीं, विकास की राह पर दौड़ रहा सुकमा

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सुकमा छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


दुर्गम जंगलों में बाइक से पहुंचे कलेक्टर-सीईओ, गांवों में स्कूल, अस्पताल, सड़क और पानी की सुविधाओं को मिली मंजूरी

सुकमा, बस्तर की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। कभी नक्सलवाद और भय के कारण मुख्यधारा से कटे रहने वाले सुकमा जिले के दूरस्थ गांव अब विकास और सुशासन की नई कहानी लिख रहे हैं। प्रशासन अब उन इलाकों तक पहुंच रहा है, जहां वर्षों तक सरकारी व्यवस्था की मौजूदगी बेहद सीमित थी। इसी बदलाव की मिसाल उस समय देखने को मिली जब सुकमा कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर खुद मोटरसाइकिल पर सवार होकर कोंटा विकासखंड के धुर नक्सल प्रभावित और पहुंचविहीन गांवों तक पहुंचे।


भेज्जी, मैलासुर, दंतेषपुरम, गछनपल्ली, बुर्कलंका, बोदराजपदर और डब्बाकोंटा जैसे गांवों तक पहुंचने के लिए अधिकारियों को पथरीले और उबड़-खाबड़ रास्तों से गुजरना पड़ा। कई जगह सड़कें नहीं थीं, फिर भी प्रशासनिक टीम गांवों तक पहुंची। अधिकारियों को अपने बीच देखकर ग्रामीणों में उत्साह और भरोसा साफ दिखाई दिया। ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के बाद पहली बार किसी कलेक्टर ने उनके गांव पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनी हैं।


दौरे के दौरान बुर्कलंका में बन रहे “सुशासन परिसर” का निरीक्षण किया गया। इस परिसर में स्कूल, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, पीडीएस केंद्र और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर विकसित की जा रही हैं। कलेक्टर श्री अमित कुमार ने इस मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि यह दूरस्थ गांवों में शासन की सुविधाएं एक साथ उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम है।
मैलासुर पंचायत में आयोजित चौपाल में अधिकारी जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से सीधे संवाद करते नजर आए। सरपंच, पटेल, मुखिया और ग्रामीणों ने गांवों की समस्याओं और आवश्यकताओं से प्रशासन को अवगत कराया। अधिकारियों ने भी भरोसा दिलाया कि सभी कार्यों को समय-सीमा में पूरा किया जाएगा।


स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भेज्जी पंचायत में उप स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। मैलासुर में स्वास्थ्य केंद्र के लिए तत्काल भूमि चिन्हांकन के निर्देश दिए गए। गछनपल्ली में स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए स्टाफ क्वार्टर निर्माण को मंजूरी दी गई, ताकि ग्रामीणों को चौबीसों घंटे चिकित्सा सुविधा मिल सके।


शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दंतेषपुरम में निर्माणाधीन प्राथमिक शाला भवन को बारिश से पहले हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए। साथ ही अंदरूनी गांवों के स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
ग्रामीणों की आजीविका बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए मछली पालन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया। मैलासुर और दंतेषपुरम में तालाबों का चिन्हांकन कर मछली बीज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। दंतेषपुरम में नए डैम और तालाब निर्माण की मंजूरी दी गई, जबकि क्रेडा विभाग को पानी टंकी निर्माण के निर्देश दिए गए।

पेयजल संकट को दूर करने के लिए मैलासुर और बोदराजपदर में नए हैंडपंप और बोरिंग की स्वीकृति दी गई। पीएचई विभाग को निर्देश दिए गए कि जिन गांवों में जल जीवन मिशन का कार्य पूरा हो चुका है वहां तुरंत जलापूर्ति शुरू की जाए और बाकी गांवों में तेजी से कार्य पूरा किया जाए।
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य नक्सलवाद से प्रभावित इन अंतिम छोर के गांवों तक विकास की हर सुविधा पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि बारिश से पहले स्कूल, अस्पताल, सड़क, पुल-पुलिया और जल जीवन मिशन से जुड़े सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएंगे।
सड़क संपर्क को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बोदराजपदर, मैलासुर, दंतेषपुरम, गछनपल्ली और बुर्कलंका को मुख्य सड़कों से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए। आरईएस विभाग द्वारा डब्बाकोंटा में निर्माणाधीन आश्रम भवन का भी निरीक्षण किया गया।
सुकमा के इन गांवों में अधिकारियों का यह बाइक सफर केवल एक दौरा नहीं बल्कि बदलते बस्तर की नई तस्वीर बन गया है। अब यहां बंदूक और भय की जगह विकास, विश्वास और सुशासन की नई उम्मीद दिखाई दे रही है।

प्रदीप मिश्रा
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