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विदेशी सैलानियों की पहली पसंद बनता छत्तीसगढ़, वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर बढ़ी पहचान

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बस्तर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति और आधुनिक सुविधाएं विदेशी पर्यटकों को कर रही आकर्षित

बस्तर ACGN :- घने जंगलों की हरियाली, कल-कल बहते जलप्रपात, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों से सजा  छत्तीसगढ़ अब विदेशी सैलानियों के लिए नया आकर्षण बनता जा रहा है। कभी केवल देश के भीतर अपनी पहचान रखने वाला छत्तीसगढ़ अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। वर्ष 2025 में 820 विदेशी पर्यटकों के आगमन ने यह साबित कर दिया है कि राज्य की प्राकृतिक संपदा, शांत वातावरण और सांस्कृतिक विविधता दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।


पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ को वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य की जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और लोगों की आत्मीयता विदेशी पर्यटकों को अनूठा अनुभव प्रदान करती है। सरकार पर्यटन स्थलों में आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, बेहतर सड़क संपर्क, सुरक्षित वातावरण और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है।


मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि बस्तर, सरगुजा, मैनपाट और जशपुर जैसे क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए विशेष योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

पर्यटन केवल राज्य की पहचान मजबूत नहीं करता, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है। आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ विदेशी पर्यटकों के लिए भारत का एक प्रमुख और आकर्षक पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा।

छत्तीसगढ़ की पहचान अब प्रकृति और संस्कृति के अनूठे संगम के रूप में बन रही है। चित्रकोट जलप्रपात की भव्यता, तीरथगढ़ जलप्रपात की प्राकृतिक सुंदरता, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता और सिरपुर तथा रतनपुर जैसे ऐतिहासिक स्थल विदेशी सैलानियों को खास तौर पर आकर्षित कर रहे हैं।

वहीं बस्तर की जनजातीय परंपराएं, लोकनृत्य और प्रसिद्ध बस्तर दशहरा विश्व स्तर पर अलग पहचान बना रहे

बस्तर क्षेत्र अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां के घने जंगल, प्राकृतिक झरने, हस्तशिल्प और आदिवासी संस्कृति विदेशी पर्यटकों को अनूठा अनुभव प्रदान कर रहे हैं।

राज्य सरकार चित्रकोट जलप्रपात के पास तीर्था गांव में प्रीमियम लक्जरी टेंट सिटी विकसित करने की योजना पर कार्य कर रही है। साथ ही “चित्रकोट स्वदेशी प्रकृति विश्राम केंद्र” परियोजना के माध्यम से चित्रकोट को वैश्विक स्तर के प्रकृति और संस्कृति पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।


राज्य में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से हो रहे विकास ने भी पर्यटकों का विश्वास बढ़ाया है। आज बस्तर में पर्यटक खुद को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सहज महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी की संभावना मजबूत हो रही है।


हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मार्गदर्शक एवं हिवा प्रशिक्षण और परामर्श संस्था की संस्थापक Kirsi Hyvärinen की बस्तर यात्रा ने भी छत्तीसगढ़ पर्यटन को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है।

उन्होंने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवनशैली की सराहना करते हुए इसे दुनिया के लिए अनूठा पर्यटन अनुभव बताया।


सरकार द्वारा पर्यटक सूचना केंद्र, होटल, होम-स्टे सुविधाएं, डिजिटल प्रचार-प्रसार और पर्यटन अधोसंरचना को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

साथ ही स्थानीय हस्तशिल्प, लोकनृत्य और पारंपरिक उत्सवों को पर्यटन से जोड़कर छत्तीसगढ़ को विशिष्ट सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है।


प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता, आधुनिक सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण के चलते छत्तीसगढ़ अब वैश्विक पर्यटन जगत में अपनी नई पहचान बनाने की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

बस्तर अब केवल घने जंगलों और जनजातीय संस्कृति तक सीमित पहचान नहीं रहा, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के बदलते स्वरूप, शांति, विकास और सांस्कृतिक समृद्धि का नया प्रतीक बनकर उभर रहा है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता, लोक परंपराएं, हस्तशिल्प, जलप्रपात और आत्मीय जीवनशैली देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। वर्षों तक चुनौतियों से जूझने वाला बस्तर आज पर्यटन, संस्कृति और विकास के नए युग की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
वहीं छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक संपदा, जनजातीय विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और आधुनिक विकास के संतुलन के साथ वैश्विक पहचान बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है। राज्य सरकार की पर्यटन और सांस्कृतिक विकास योजनाएं आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर भी मजबूत स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। प्रकृति, संस्कृति और आत्मीयता से भरपूर यह धरती आने वाले वर्षों में विश्व पर्यटन जगत के लिए एक नई और आकर्षक पहचान बनकर  यह राज्य विदेशी सैलानियों के लिए भारत का शांत, सुरक्षित और आकर्षक पर्यटन केंद्र बनकर उभरेगा।

“बस्तर और छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जंगल, जलप्रपात और जनजातीय संस्कृति हमारी अमूल्य धरोहर हैं। प्रकृति बचाएं, पर्यावरण की रक्षा करें और अपनी विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें।”

प्रदीप मिश्रा
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