नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 7647981711 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , अमृत सरोवर विवाद में नया मोड़, ग्रामीण ने जमीन पर जताया निजी मालिकाना हक – Anjor Chhattisgarh News

Anjor Chhattisgarh News

सच की तह तक

अमृत सरोवर विवाद में नया मोड़, ग्रामीण ने जमीन पर जताया निजी मालिकाना हक

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता:- संजय जेठवानी
पंचायत की आपत्ति के बाद अधर में लटका मामला, ग्रामीण बोला- मेरी निजी जमीन पर रुका काम
रायगढ़ ACGN:- धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम सिसरिंगा में अमृत सरोवर को लेकर चल रहा विवाद अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। अब तक जिस मामले को सरकारी भूमि और अमृत सरोवर निर्माण से जोड़कर देखा जा रहा था, उसमें अब संबंधित ग्रामीण ने जमीन पर अपना निजी हक जताते हुए कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं। ग्रामीण की ओर से सामने आई जानकारी के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
ग्रामीण का कहना है कि जिस भूमि को लेकर विवाद खड़ा हुआ है वह उसकी निजी भूमि है, जिसका खसरा क्रमांक 840/1ग एवं रकबा 1.489 हेक्टेयर बताया जा रहा है। ग्रामीण के अनुसार इस जमीन पर उसका वर्षों पुराना अधिकार है और इसके समर्थन में उसके पास जरूरी दस्तावेज एवं साक्ष्य भी मौजूद हैं। उसका दावा है कि संबंधित भूमि किसी शासकीय तालाब की नहीं, बल्कि उसकी निजी उपयोग की जमीन रही है, जहां पूर्व में मछली पालन का कार्य भी किया जाता था।


ग्रामीण ने बताया कि उसने अपनी मेहनत और लागत से वहां तालाब का निर्माण कराया था तथा शासन की मत्स्य पालन योजना का लाभ लेकर तालाब में मछली पालन शुरू किया था। शुरुआती समय में तालाब में पर्याप्त पानी रहा और उत्पादन भी अच्छा हुआ, लेकिन बाद में पानी का स्रोत सूख जाने से तालाब धीरे-धीरे अनुपयोगी हो गया और पूरी तरह सूख गया।


इसी दौरान क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य और मिट्टी निकासी के बीच यह मामला सामने आया। जानकारी के अभाव में पंचायत द्वारा संबंधित कंपनी को कार्य रोकने का पत्र जारी कर दिया गया, जिसके बाद पूरा काम अधर में लटक गया। ग्रामीण का कहना है कि इस विवाद का सबसे बड़ा नुकसान उसकी जमीन को हुआ है, क्योंकि न तो भूमि समतल हो पाई और न ही उसे पहले जैसी स्थिति में लौटाया गया। अब जमीन खेती योग्य स्थिति से भी बाहर होती जा रही है।
ग्रामीण ने मांग की है कि यदि जमीन से मिट्टी निकाली गई है तो उसे व्यवस्थित तरीके से समतल किया जाए ताकि वह दोबारा खेती योग्य बन सके। वहीं यदि काम आगे नहीं बढ़ाया जाना है तो निकाली गई मिट्टी को वापस भरकर खेत को पहले जैसी स्थिति में लाया जाए।
इस मामले में Dilip Buildcon Limited के वरिष्ठ अधिकारी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंपनी का कहना है कि कार्य ग्रामीण की सहमति और आपसी एग्रीमेंट के आधार पर शुरू किया गया था। अधिकारी के अनुसार कंपनी का उद्देश्य भूमि को समतल कर ग्रामीण को राहत पहुंचाना था, लेकिन पंचायत की आपत्ति के बाद काम रोकना पड़ा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पंचायत की आपत्ति हटती है तो ग्रामीण द्वारा तय दिन और तारीख के अनुसार कार्य दोबारा शुरू किया जा सकता है।
अब इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि भूमि वास्तव में निजी है और ग्रामीण के पास दस्तावेज मौजूद हैं, तो बिना पूरी जांच के पंचायत द्वारा आपत्ति क्यों दर्ज की गई। वहीं यदि पंचायत को संदेह था तो पहले राजस्व रिकॉर्ड और भूमि की वास्तविक स्थिति की जांच क्यों नहीं की गई। फिलहाल यह मामला प्रशासन, पंचायत और कंपनी के बीच समन्वय की कमी को उजागर करता दिखाई दे रहा है, जबकि सबसे अधिक परेशानी संबंधित ग्रामीण को झेलनी पड़ रही है।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबरों एवं जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल — अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now