पेलमा कोयला खदान की जनसुनवाई को लेकर बढ़ा विरोध
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रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी
पूर्व पार्षद संजय देवांगन ने प्रशासन और कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप, जनसुनवाई रद्द करने की मांग
रायगढ़ ACGN:- जिले के तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित एसईसीएल की पेलमा कोयला खदान परियोजना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। 19 मई को होने वाली जनसुनवाई के विरोध में अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर आवाजें तेज होने लगी हैं। नगर निगम रायगढ़ के पूर्व वरिष्ठ पार्षद संजय देवांगन ने परियोजना को जनविरोधी बताते हुए प्रशासन और कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
संजय देवांगन ने कहा कि इस परियोजना के पीछे बड़े कॉर्पोरेट घरानों का दबाव काम कर रहा है और प्रशासन केवल औपचारिकता निभाने के उद्देश्य से जनसुनवाई आयोजित कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेलमा कोयला खदान परियोजना से तमनार क्षेत्र के कई गांव प्रभावित होंगे और बड़ी संख्या में ग्रामीणों के विस्थापन की स्थिति बन सकती है।
उन्होंने अनुसूचित क्षेत्रों में लागू पेशा कानून की अनदेखी का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि ग्राम सभाओं की वास्तविक और पारदर्शी सहमति के बिना जनसुनवाई कराना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह स्थानीय लोगों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास है।
पर्यावरण और आदिवासी संस्कृति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए संजय देवांगन ने कहा कि यह मामला केवल जमीन अधिग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े स्थानीय अधिकारों का गंभीर मुद्दा है। उन्होंने आशंका जताई कि परियोजना लागू होने से क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होगा और वन्यजीवों के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति पर भी गहरा असर पड़ेगा।
प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने 19 मई को प्रस्तावित जनसुनवाई को तत्काल रद्द करने, ग्राम सभाओं की पारदर्शी सहमति सुनिश्चित करने, सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों का पुनर्मूल्यांकन कराने तथा स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जनभावनाओं की अनदेखी कर जबरन जनसुनवाई आयोजित की गई तो कांग्रेस पार्टी और स्थानीय लोग लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करेंगे।
इस पूरे मामले को लेकर तमनार क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों के बीच भी परियोजना को लेकर चर्चा का माहौल बना हुआ है। लोग प्रशासन से पारदर्शिता और स्थानीय हितों को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं।
प्रदीप मिश्रा
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