बस्तर की हर्बल कॉफी ने बनाई नई पहचान, जंगल के बीजों से तैयार हुआ अनोखा उत्पाद
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
छिंद के बेकार बीजों से युवा उद्यमी ने तैयार की कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी, मुख्यमंत्री ने भी सराहा नवाचार
रायपुर ACGN:- बस्तर अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आदिवासी संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि एक अनोखे नवाचार के लिए भी देशभर में नई पहचान बना रहा है। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा उद्यमी विशाल हालदार ने जंगलों में फेंके जाने वाले छिंद, खजूर और पाम के बीजों से कैफीन मुक्त हर्बल कॉफी तैयार कर एक नई मिसाल पेश की है। इस अनोखे प्रयोग ने न केवल बेकार समझे जाने वाले बीजों को उपयोगी बना दिया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार के लिए भी नई संभावनाएं खोल दी हैं।

बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की पढ़ाई कर चुके विशाल हालदार ने करीब दो वर्षों तक लगातार शोध और प्रयोग के बाद इस हर्बल कॉफी को विकसित किया है। बस्तर के जंगलों में बड़ी मात्रा में मिलने वाले छिंद के बीज अब तक बेकार समझकर फेंक दिए जाते थे, लेकिन विशाल ने इन्हीं बीजों को एक स्वास्थ्यवर्धक पेय में बदल दिया। यह कॉफी पूरी तरह कैफीन मुक्त है, जिससे अनिद्रा, हाई ब्लड प्रेशर और एसिडिटी जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह बेहतर विकल्प बन सकती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व इसे सामान्य कॉफी की तुलना में अधिक लाभकारी बनाते हैं।
विशाल के इस नवाचार को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, जगदलपुर में आयोजित इनोवेशन महाकुंभ में प्रथम स्थान मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उन्हें सम्मानित करते हुए इस पहल की सराहना की। वहीं प्रदेश के वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहित कई विशेषज्ञों और प्रबुद्धजनों ने भी कॉफी के स्वाद और खुशबू की तारीफ की है।

इस परियोजना का सबसे खास पहलू यह है कि इससे स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं को रोजगार का नया अवसर मिलेगा। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के सहयोग से विशाल हालदार ग्रामीण युवाओं को उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। गांवों और जंगलों से छिंद के बीज एकत्रित करने वाले लोगों को इससे अतिरिक्त आय का साधन मिलेगा। स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर वैश्विक स्तर का उत्पाद तैयार करने की यह पहल आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विशाल हालदार का कहना है कि यदि सोच और दृष्टि स्पष्ट हो तो स्थानीय स्तर पर बेकार समझे जाने वाले संसाधनों को भी वैश्विक स्तर के बेहतरीन उत्पाद में बदला जा सकता है। आने वाले समय में बस्तर की यह हर्बल कॉफी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच खास पहचान बना सकती है।

फिलहाल यह प्रोजेक्ट टेस्टिंग और विकास के अंतिम चरण में है और जल्द ही इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग की तैयारी की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि बाजार में आने के बाद बस्तर की यह अनोखी हर्बल कॉफी देश और दुनिया में अपनी अलग खुशबू बिखेरेगी।
प्रदीप मिश्रा
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