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सच की तह तक

छत्तीसगढ़ का बरनवापारा अभयारण्य बना विलुप्ति के कगार पर पहुंचे काले हिरणों के पुनर्जीवन का मजबूत उदाहरण

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

‘मन की बात’ में मिली राष्ट्रीय पहचान, स्थानीय विलुप्ति से बढ़कर लगभग 200 काले हिरणों की सुरक्षित वापसी पर प्रदेश को गर्व
छत्तीसगढ़ के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें संस्करण में राज्य के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों और विशेष रूप से काले हिरणों के पुनर्जीवन का उल्लेख किया। इस उल्लेख ने न केवल राज्य की पहचान को मजबूत किया है बल्कि जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे वन विभाग और संरक्षण टीमों के प्रयासों को राष्ट्रीय मंच पर सराहना दिलाई है।


बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित लगभग 245 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला बरनवापारा अभयारण्य आज वन्यजीव संरक्षण की एक महत्वपूर्ण सफलता की कहानी बन चुका है। एक समय ऐसा था जब यह क्षेत्र अपने प्रमुख वन्यजीव काले हिरण से लगभग खाली हो गया था, लेकिन आज यही अभयारण्य लगभग 200 काले हिरणों का सुरक्षित आवास बन चुका है।


1970 के दशक के बाद अतिक्रमण और प्राकृतिक आवास के नुकसान के कारण काले हिरण इस क्षेत्र से लगभग समाप्त हो गए थे और लंबे समय तक स्थानीय रूप से विलुप्त माने जाते रहे। लेकिन अप्रैल 2018 में राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्वीकृति के बाद पुनर्स्थापन योजना शुरू की गई, जिसने इस क्षेत्र की तस्वीर बदल दी।


वन विभाग के योजनाबद्ध प्रयास, वैज्ञानिक प्रबंधन, नियमित निगरानी और बेहतर आवास व्यवस्था के चलते काले हिरणों की संख्या धीरे-धीरे बढ़कर लगभग 200 तक पहुंच गई। इस दौरान शुरुआती चरण में कुछ चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं प्रमुख रहीं, लेकिन समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए गए।


बाड़ों में सुधार, जल निकासी व्यवस्था, स्वच्छता प्रबंधन और पशु चिकित्सकीय निगरानी को मजबूत किया गया, जिससे काले हिरणों की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। आज ये प्रजाति न केवल सुरक्षित है बल्कि अपने नए प्राकृतिक परिवेश में सफलतापूर्वक अनुकूलित भी हो चुकी है।


मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और यह साबित करती है कि सही योजना और निरंतर प्रयासों से विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों को फिर से जीवन दिया जा सकता है।


काला हिरण भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाने वाला एक संकटग्रस्त मृग है, जिसकी पहचान नर के काले-भूरे रंग, सर्पिलाकार लंबे सींग और खुले घास के मैदानों में इसकी सक्रिय उपस्थिति से होती है। यह प्रजाति अब संरक्षण प्रयासों के कारण पुनः स्थिरता की ओर बढ़ रही है।


बरनवापारा अभयारण्य की यह सफलता न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए वन्यजीव संरक्षण का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है।


प्रदीप मिश्रा :- देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ हम लाते है निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबरे

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