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NDPS मामलों की विवेचना को सशक्त बनाने ऑनलाइन कार्यशाला, पुलिस अधिकारियों को दिए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

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बिलासपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

बिलासपुर रेंज के पुलिस अधिकारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण, तकनीकी त्रुटियों से बचकर मजबूत विवेचना पर जोर

बिलासपुर । बिलासपुर रेंज में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की विवेचना को अधिक प्रभावी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग के निर्देशन में आयोजित की गई, जिसमें रेंज के विभिन्न जिलों के पुलिस अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय के मीटिंग हॉल से आयोजित इस ऑनलाइन कार्यशाला में एनडीपीएस प्रकरणों की विवेचना के दौरान होने वाली प्रक्रियात्मक त्रुटियों और उनके समाधान पर विशेष चर्चा की गई। कार्यशाला में सारंगढ़ के पुलिस अधीक्षक आंजनेय वार्ष्णेय, बिलासपुर शहर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल, सिविल लाइन के नगर पुलिस अधीक्षक निमितेश सिंह तथा पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय बिलासपुर रेंज के उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि एनडीपीएस प्रकरणों की विवेचना के दौरान छोटी-सी तकनीकी या प्रक्रियात्मक त्रुटि भी पूरे मामले को कमजोर कर देती है, जिसका प्रत्यक्ष लाभ आरोपी को न्यायालय में मिलता है और वे दोषमुक्त हो जाते हैं। उन्होंने विवेचना को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप उन्नत करने तथा कानूनी प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन करने पर विशेष जोर दिया।


कार्यशाला में सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक अभियोजन बिलासपुर संभाग माखनलाल पाण्डेय ने प्रशिक्षक के रूप में अधिकारियों को विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत जप्ती और तलाशी की कार्रवाई के दौरान धारा 42, 50 और 57 के प्रावधानों का अक्षरशः पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि इन प्रावधानों में छोटी सी चूक भी पूरे प्रकरण को न्यायालय में कमजोर बना सकती है।
उन्होंने धारा 52 के तहत जब्त मादक पदार्थों के मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रमाणीकरण तथा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (जप्ती, भंडारण, नमूनाकरण और निपटान) नियम 2022 के तहत ही जप्ती और सैंपलिंग की कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता पर विस्तार से जानकारी दी।
माखनलाल पाण्डेय ने विवेचकों को यह भी निर्देशित किया कि विवेचना केवल जप्ती तक सीमित न रहे, बल्कि मादक पदार्थों के स्रोत और उनके गंतव्य तक की पूरी श्रृंखला की जांच की जाए, जिससे पूरे ड्रग नेटवर्क को उजागर कर प्रभावी कार्रवाई की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय में चालान प्रस्तुत करने से पहले वरिष्ठ अधिकारियों और अभियोजन शाखा द्वारा उसका परीक्षण किया जाना आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार की तकनीकी कमी न रह जाए।
कार्यशाला के दौरान दस्तावेजीकरण और साक्ष्यों के संकलन को भी महत्वपूर्ण बताया गया। पंचनामा, नोटिस और जप्ती मेमो तैयार करते समय स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति तथा समय और स्थान की सटीकता का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई। साथ ही पारंपरिक पुलिसिंग के साथ आधुनिक तकनीकी उपकरणों और डिजिटल साक्ष्यों के उपयोग पर भी जोर दिया गया, जिससे विवेचना को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
प्रशिक्षण सत्र के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को साझा किया। प्रशिक्षक माखनलाल पाण्डेय ने इन समस्याओं का विस्तार से समाधान प्रस्तुत करते हुए विवेचना को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय बताए।
इस ऑनलाइन कार्यशाला में बिलासपुर रेंज के सभी जिलों से लगभग 100 पुलिस अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए और प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य एनडीपीएस प्रकरणों में विवेचना के दौरान होने वाली तकनीकी और प्रक्रियात्मक कमियों को दूर कर विवेचना की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, ताकि आरोपी तकनीकी त्रुटियों का लाभ उठाकर न्यायालय से दोषमुक्त न हो सकें।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने सफल प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षक माखनलाल पाण्डेय को धन्यवाद देते हुए स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का समापन पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय बिलासपुर रेंज के उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा द्वारा किया गया।

प्रदीप मिश्रा
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