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कांतामाल में आदिवासियों पर पुलिस अत्याचार के आरोप, राज्यसभा सांसद ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

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बलांगीर, ओडिशा

By ACGN 7647981711, 9303948009

ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज

20 वर्षों से लंबित वनाधिकार मामलों के शीघ्र निपटारे और निर्दोष आदिवासियों की रिहाई की मांग
बलांगीर –निरंजन विशी  ने रायगढ़ा जिले के सिजीमाली क्षेत्र अंतर्गत कांतामाल गांव के आदिवासी परिवारों पर कथित पुलिस अत्याचार, अवैध बेदखली के प्रयास तथा लगभग दो दशकों से लंबित व्यक्तिगत वनाधिकार (IFR) और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (CFR) मामलों को लेकर तत्काल निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सांसद ने अपने ज्ञापन में कहा कि वनाधिकार कानून लागू होने के करीब 20 वर्ष बीत जाने के बावजूद क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति परिवार अब तक अपने वैधानिक भूमि अधिकारों और सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों से वंचित हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि वास्तविक लाभार्थियों को अब तक न्याय क्यों नहीं मिला और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ठोस पहल क्यों नहीं कर सका।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 7 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि को कांतामाल गांव में ग्रामीणों को डराया-धमकाया गया, कुछ घरों को नुकसान पहुंचाया गया, फायरिंग और मारपीट की घटनाएं हुईं तथा आदिवासी परिवारों को जबरन बेदखल करने का प्रयास किया गया। सांसद ने कहा कि इस प्रकार के आरोप अत्यंत गंभीर हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
राज्यसभा सांसद ने प्रशासन से लंबित व्यक्तिगत वनाधिकार और सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के दावों का शीघ्र निपटारा करने, ग्राम सभा आधारित पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया अपनाने तथा झूठे मामलों में गिरफ्तार निर्दोष आदिवासियों को तत्काल रिहा करने की मांग की है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और यदि किसी प्रकार की क्षति हुई हो तो प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास और मुआवजा देने की भी मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजातियों को संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षा और वनाधिकार कानून का पूर्ण रूप से पालन होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आदिवासी समुदाय के साथ अन्याय की भावना बढ़ेगी और सामाजिक असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।


प्रदीप मिश्रा
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