कोरबा में ‘बिना रजिस्ट्रेशन’ इलाज पर कड़ा शिकंजा, अस्पताल-क्लीनिक में सेवा देने वाले हर डॉक्टर को कराना होगा पंजीयन
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
सीएमएचओ डॉ. एस.एन. केशरी का सख्त अल्टीमेटम, नियम तोड़ने पर 20 हजार जुर्माना, दोबारा उल्लंघन पर जेल और 50 हजार तक का दंड
कोरबा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब जिले में संचालित अस्पताल, नर्सिंग होम, मेटरनिटी होम, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटर में सेवाएं देने वाले सभी चिकित्सकों के लिए नर्सिंग होम एक्ट के तहत पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बिना पंजीयन के किसी भी चिकित्सक द्वारा क्लीनिकल संस्थानों में ओपीडी या अन्य सेवाएं देना नियमों के विरुद्ध माना जाएगा और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोरबा जिले में कई ऐसे क्लीनिकल संस्थान संचालित हैं, जहां राज्य के विभिन्न जिलों से आने वाले चिकित्सक तथा शासकीय चिकित्सक भी निजी तौर पर ओपीडी सेवाएं देते हैं। ऐसे सभी चिकित्सकों को अपनी सेवाएं शुरू करने से पहले नर्सिंग होम एक्ट के तहत विधिवत पंजीयन कराना होगा। इसके लिए चिकित्सकों को आयुर्विज्ञान परिषद में पंजीयन का प्रमाण पत्र और सेवा देने के समय से संबंधित शपथ पत्र मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में जमा करना अनिवार्य होगा।
सीएमएचओ ने क्लीनिकल संस्थाओं के संचालकों को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि उनके यहां कार्यरत सभी चिकित्सकों का नर्सिंग होम एक्ट के तहत आवश्यक दस्तावेजों सहित पंजीयन सुनिश्चित कराया जाए। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से जिले में संचालित निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी बेहतर होगी और मरीजों को सुरक्षित एवं मानक के अनुरूप उपचार सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि किसी क्लीनिकल स्थापना में बिना पंजीकृत चिकित्सकों से सेवाएं ली जाती हैं तो छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम 2010 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। नियमों के अनुसार पहली बार उल्लंघन करने पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया जाएगा, जबकि दूसरी बार नियमों का उल्लंघन दोहराने पर तीन वर्ष तक का कारावास या 50 हजार रुपये तक का अर्थदंड अथवा दोनों दंड दिए जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी संबंधित संस्था संचालक की होगी।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी अस्पताल, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करते हुए जल्द से जल्द आवश्यक पंजीयन प्रक्रिया पूरी करें, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बनी रहे और आम नागरिकों को सुरक्षित व भरोसेमंद चिकित्सा सुविधा मिल सके।
प्रदीप मिश्रा
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