सोमवार अब जनता के नाम: ओड़िशा सरकार का बड़ा फैसला, बैठकों पर लगी रोक, शिकायतों को मिलेगी पहली प्राथमिकता
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भुवनेश्वर ओड़िशा
By ACGN 7647 9817119303 948009
ओड़िशा ब्यूरो स्वामी बिजया नंद जी महाराज
भुवनेश्वर। राज्य सरकार ने प्रशासन को जनता के और करीब लाने की दिशा में एक अहम और सराहनीय कदम उठाया है। सरकार ने निर्णय लिया है कि अब हर सोमवार को सभी सरकारी कार्यालयों में किसी भी प्रकार की आधिकारिक या विभागीय बैठक नहीं होगी। यह निर्देश मुख्य सचिव अनु गर्ग द्वारा जारी किया गया है। इस फैसले का साफ़ उद्देश्य है जनता की शिकायतों को प्राथमिकता देना और उनका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना।
दरअसल, सरकार चाहती है कि सोमवार का दिन पूरी तरह से आम नागरिकों के नाम हो। इसी सोच के तहत प्रत्येक सोमवार को आयोजित होने वाली जनशिकायत सुनवाई में अधिकारियों की पूरी मौजूदगी और संवेदनशीलता सुनिश्चित की जा रही है। अब अधिकारी बैठकों में उलझे नहीं रहेंगे, बल्कि सीधे जनता की समस्याएं सुनेंगे और उनका समाधान करेंगे।
यह फैसला इसी महीने की शुरुआत में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया था, जिसमें प्रशासनिक कार्यप्रणाली, जनसेवा वितरण और जवाबदेही जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर मंथन हुआ। बैठक में यह स्पष्ट रूप से तय किया गया कि यदि शासन को सच में जनोन्मुखी बनाना है, तो अधिकारियों का अधिकतम समय जनता के लिए होना चाहिए।
इस निर्देश की खास बात यह है कि यह केवल राज्य सचिवालय या बड़े कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायत स्तर तक के सभी सरकारी कार्यालयों पर भी लागू होगा। यानी गांव से लेकर राजधानी तक, सोमवार को बैठकें स्थगित रहेंगी और पूरा फोकस जनता की समस्याओं पर होगा।
अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से न केवल शासन प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी, बल्कि जनता का भरोसा भी प्रशासन पर और मजबूत होगा। शिकायतें दबेंगी नहीं, टलेंगी नहीं, बल्कि सीधे सुनी और सुलझाई जाएंगी।
हर महीने होगी विकास की कसौटी, तीसरे सोमवार को बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा
सरकार ने केवल शिकायत निवारण ही नहीं, बल्कि विकास कार्यों की निगरानी को भी मजबूत करने का फैसला किया है। मुख्य सचिव द्वारा तय किए गए नए ढांचे के तहत हर महीने के तीसरे सोमवार को प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।
इन बैठकों में 10 से 11 बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की जाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्य समय पर पूरे हों और किसी भी तरह की प्रशासनिक या तकनीकी अड़चन को तुरंत दूर किया जा सके।
सरकार का मानना है कि इन दोनों फैसलों सोमवार को जनशिकायत को प्राथमिकता और मासिक परियोजना समीक्षा से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, जवाबदेही तय होगी और शासन व्यवस्था ज्यादा संवेदनशील व प्रभावी बनेगी।
कुल मिलाकर, ओड़िशा सरकार का यह निर्णय यह संदेश देता है कि “सरकार फाइलों के लिए नहीं, लोगों के लिए होती है”
और जब प्रशासन जनता की बात सुनने के लिए एक पूरा दिन समर्पित करता है, तो लोकतंत्र सच में ज़मीन पर उतरता है।
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