निजी विद्यालयों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की पुस्तकें पढ़ाना अनिवार्य : मंत्री नित्यानंद गोंड
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भुवनेश्वर ओड़िशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
ओड़िशा ब्यूरो – स्वामी बिजया नंद जी महाराज
भुवनेश्वर: राज्य में शिक्षा व्यवस्था को अधिक समान, पारदर्शी और सुलभ बनाने के उद्देश्य से ओड़िशा के विद्यालय एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने कहा है कि निजी विद्यालयों में विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की पुस्तकों से ही पढ़ाई कराना अनिवार्य किया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार पूरे देश में शिक्षा की गुणवत्ता को एक समान बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी नीति के तहत विद्यार्थियों को परिषद द्वारा तैयार मानक पाठ्यपुस्तकों से पढ़ाई कराई जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निजी विद्यालय इस व्यवस्था से अलग हटते हैं तो इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल उद्देश्य को क्षति पहुंचती है।

मंत्री नित्यानंद गोंड ने निजी विद्यालयों द्वारा महंगी निजी प्रकाशनों की पुस्तकें लागू करने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई विद्यालय अपनी मनमर्जी से निजी प्रकाशकों की पुस्तकें अनिवार्य कर देते हैं, जिससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ता है। शिक्षा के नाम पर अभिभावकों से अधिक धन वसूलना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार के संज्ञान में यह भी आया है कि कुछ निजी विद्यालय विद्यार्थियों और अभिभावकों को परिषद की पुस्तकों के स्थान पर निजी प्रकाशनों की पुस्तकें खरीदने के लिए बाध्य करते हैं। ऐसी स्थिति में सरकार इस विषय को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक जांच कराएगी और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करेगी।
मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी निजी विद्यालय के विरुद्ध अभिभावकों की ओर से शिकायत प्राप्त होती है तो तथ्यों की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित संस्थान के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि इस प्रकार की अनियमितताओं को रोकने के लिए राज्य सरकार विद्यालय एवं जनशिक्षा विभाग के साथ विस्तृत चर्चा कर रही है। जल्द ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा, ताकि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों का किसी भी प्रकार का शोषण न हो।
मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता ऐसी शिक्षा व्यवस्था स्थापित करना है जो न्यायसंगत, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण हो तथा जिसमें सभी विद्यार्थियों को समान अवसर प्राप्त हों।
प्रदीप मिश्रा
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