आयुष्मान के नाम पर इलाज या मरीजों की जेब पर वार? हरिकृष्णा हॉस्पिटल की 68 मोबाइल नंबरों वाली कहानी ने खोली व्यवस्था की पोल!
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
मरीजों से नगद राशि लेने के बयान, भर्ती रिकॉर्ड में 68 गलत मोबाइल नंबर, नवजात शिशुओं के उपचार में अनियमितता और जांच में गायब पैथोलॉजी-अल्ट्रासोनोग्राफी के अभिलेख। स्वास्थ्य विभाग ने कटघोरा के हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल का आयुष्मान पंजीयन एक साल के लिए किया निरस्त। अब सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, मरीजों के अधिकारों और जवाबदेही का भी है।
कोरबा ACGN:- गरीबों को बेहतर इलाज का भरोसा देकर शुरू की गई आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का मकसद साफ है—पैसों की कमी किसी मरीज के उपचार में बाधा न बने। लेकिन जब इसी योजना से जुड़े अस्पतालों में मरीजों के परिजनों से नगद राशि लेने के बयान सामने आएं, भर्ती रजिस्टर में दर्ज मोबाइल नंबरों की विश्वसनीयता पर सवाल उठें और नवजात शिशुओं के उपचार तक में अनियमितताएं मिलें, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मरीजों को राहत देने वाली योजना के साथ हो क्या रहा है?
कोरबा जिले के कटघोरा स्थित हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल में स्वास्थ्य विभाग की जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी सामान्य लापरवाही की ओर इशारा नहीं करते, बल्कि अस्पताल की कार्यप्रणाली और योजना के तहत किए जा रहे रिकॉर्ड संधारण पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की 5 नवंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को अस्पताल का औचक निरीक्षण किया गया था। जांच दल को मरीजों के परिजनों से नगद राशि लिए जाने संबंधी बयान मिले। वहीं भर्ती फाइलों में दर्ज 68 मोबाइल नंबर गलत अथवा उपयोग में नहीं पाए गए।
अब सवाल यह है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के रिकॉर्ड में 68 मोबाइल नंबर गलत या उपयोग में नहीं थे, तो मरीजों और उनके परिजनों से संपर्क तथा उपचार की पुष्टि आखिर किस आधार पर होती रही? क्या इन नंबरों का सत्यापन कभी किया गया? क्या मरीजों की वास्तविक स्थिति और उपचार संबंधी जानकारी की निगरानी के लिए दर्ज विवरण पर्याप्त रूप से विश्वसनीय थे?
मामला यहीं नहीं थमता। जांच में नवजात शिशुओं के उपचार से संबंधित अनियमितताएं भी सामने आईं। पैथोलॉजी और अल्ट्रासोनोग्राफी से जुड़े अभिलेख भी उपलब्ध नहीं कराए जा सके। आखिर जिन जांचों और उपचार प्रक्रियाओं का संबंध सीधे मरीजों की सेहत और जीवन से है, उनके रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना कितनी गंभीर बात है? विशेषकर नवजात शिशुओं के मामले में तो पारदर्शिता और दस्तावेजी जवाबदेही और भी जरूरी हो जाती है।
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन विभाग के अनुसार अस्पताल की ओर से दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। मरीजों से संबंधित अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण में गंभीर वित्तीय एवं प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आने के बाद कार्रवाई की गई।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी के अनुसार, राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा जुलाई 2026 में जारी दिशा-निर्देशों की कंडिका क्रमांक 6.4.1 के तहत हरिकृष्णा केयर हॉस्पिटल, कटघोरा का आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत पंजीयन एक वर्ष के लिए निरस्त किया गया है। इस अवधि में अस्पताल को आयुष्मान योजना के तहत नए मरीज भर्ती नहीं करने और अस्पताल परिसर से योजना के प्रचार-प्रसार संबंधी सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एक साल के लिए पंजीयन निरस्त कर देना ही मरीजों के साथ हुई कथित अनियमितताओं का पूरा हिसाब है? यदि मरीजों के परिजनों से वास्तव में नगद राशि ली गई है, तो कितने मरीजों से कितनी राशि ली गई? क्या संबंधित मरीजों को उनकी राशि वापस दिलाने की कार्रवाई होगी? 68 गलत मोबाइल नंबरों के पीछे केवल रिकॉर्ड की लापरवाही थी या इसके पीछे कोई दूसरी वजह भी है? नवजात शिशुओं के उपचार और गायब अभिलेखों की विस्तृत जांच कौन करेगा?
आयुष्मान योजना गरीबों के इलाज का अधिकार है, किसी अस्पताल के लिए कमाई का खुला रास्ता नहीं। सरकारी योजनाओं के नाम पर मरीजों को आर्थिक बोझ उठाना पड़े, तो यह केवल अस्पताल की कार्यप्रणाली का सवाल नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था की परीक्षा है।
अब स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा है कि वह केवल पंजीयन निरस्त करने तक सीमित न रहे, बल्कि मरीजों के बयान, भुगतान संबंधी शिकायतों, भर्ती रिकॉर्ड और उपचार के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराए। यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या मरीजों के अधिकारों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो नियमानुसार आगे की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
क्योंकि सवाल सीधा है—आयुष्मान का भरोसा मरीजों के लिए था या अस्पतालों के लिए? गरीब मरीज आखिर इलाज कराने जाए तो जाए कहां?
प्रदीप मिश्रा [संपादक]
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।
जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण खबर, शिकायत या समस्या हमारे साथ साझा करें। समाचार एवं जनहित के मुद्दों के लिए संपर्क करें : 7647981711, 9303948009।
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space
आणखी कथा
















































