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55 किताबों में 1,678 गलतियां! हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

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कटक, ओडिशा

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजयानंद जी महाराज, ओडिशा ब्यूरो

कक्षा 1 से 8वीं तक की पाठ्यपुस्तकों में गंभीर त्रुटियों का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, एक सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश; अगली सुनवाई 9 नवंबर को।

कटक ACGN:- ओडिशा में स्कूली विद्यार्थियों को त्रुटिरहित पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने में कथित लापरवाही का मामला अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ओडिशा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार को एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 9 नवंबर को निर्धारित की गई है।
मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति चित्तरंजन दास की खंडपीठ ने मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता प्रबीर कुमार दास की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।


              55 पुस्तकों में 1,678 त्रुटियों का दावा
याचिकाकर्ता के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा कक्षा 1 से 8वीं तक प्रकाशित 55 पाठ्यपुस्तकों में कुल 1,678 गंभीर त्रुटियां पाई गई हैं। याचिका में कहा गया है कि छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को सही और त्रुटिरहित पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 21ए और शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 का हवाला देते हुए कहा कि निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के तहत विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और त्रुटिरहित पाठ्यपुस्तकें मिलना उनका अधिकार है।
                    पहले भी हुई थी कार्रवाई
पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों को लेकर विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ने 17 जून को विकास आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने एससीईआरटी के पूर्व निदेशक मनोज कुमार पाढ़ी सहित चार वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया था। मामले की जांच अपराध शाखा को सौंपी गई थी और इस सिलसिले में पूर्व एससीईआरटी निदेशक की गिरफ्तारी भी हुई थी।


                175 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
याचिका में आरोप लगाया गया है कि त्रुटिपूर्ण पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन और वितरण से सरकारी खजाने को लगभग 175 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि सरकार को निर्धारित समयसीमा में विद्यार्थियों के लिए त्रुटिरहित पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने का निर्देश दिया जाए। साथ ही विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को लागू करने और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
अब निगाहें 9 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं। सवाल केवल पाठ्यपुस्तकों में गलतियों का नहीं, बल्कि लाखों बच्चों की शिक्षा और सरकारी धन के उपयोग की जवाबदेही का भी है।


प्रदीप मिश्रा
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