खदान बंद हुई तो 1100 श्रमिकों का क्या होगा? पर्यावरणीय मंजूरी पर फंसा भविष्य
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू
13 सूत्रीय मांगों को लेकर 27 अक्टूबर से बीएमएस की क्रमिक भूख हड़ताल जारी, प्रबंधन को आंदोलन तेज करने की चेतावनी।
सूरजपुर भटगांव ACGN:- भटगांव भूमिगत कोयला खदान के भविष्य पर बंदी का संकट मंडराने की आशंका ने श्रमिकों की चिंता बढ़ा दी है। पर्यावरणीय सहमति नहीं मिलने के कारण खदान का संचालन प्रभावित होने की स्थिति के बीच यहां कार्यरत करीब 1100 श्रमिकों के रोजगार, स्थानांतरण और भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से जुड़े श्रमिक संगठन ने 27 अक्टूबर से खदान के बाहर 13 सूत्रीय मांगों को लेकर क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है।
श्रमिकों का कहना है कि वर्षों से खदान में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के भविष्य को लेकर प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदार विभागों को समय रहते ठोस पहल करनी चाहिए। यदि खदान बंद होती है तो इसका असर केवल श्रमिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनसे जुड़े हजारों परिजनों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।
आंदोलन के क्रम में संगठन के उप महामंत्री दिलीप मंडल और संयुक्त सलाहकार समिति के सदस्य हरेंद्र सिंह ने 24 घंटे की भूख हड़ताल शुरू की। बीएमएस पदाधिकारियों का कहना है कि श्रमिकों के रोजगार और भविष्य की सुरक्षा को लेकर जल्द समाधान जरूरी है। संगठन ने प्रबंधन के समक्ष 13 सूत्रीय मांगें रखी हैं और मांगों की अनदेखी किए जाने पर आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दी है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बीएमएस ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती और समस्या का समाधान नहीं निकलता तो धरना-प्रदर्शन के साथ चक्काजाम जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। संगठन का कहना है कि श्रमिकों के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
आंदोलन में बीएमएस के कंपनी सुरक्षा समिति सदस्य संजय सिंह, जेसीसी सदस्य राजेंद्र सिंह, कोमल सक्सेना, शिवराम सिंह, जगन्नाथ शर्मा, राजेश पटेल, अभिषेक गोल्डी, संतोष प्रजापति, सौरभ मंडल, मंगलू राम, प्रमोद सिंह, संदीप पटेल और कृपा शंकर मिश्रा सहित अनेक सदस्य शामिल होकर श्रमिकों की मांगों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं।
1100 श्रमिकों के साथ हजारों परिजनों की आजीविका का सवाल
भटगांव भूमिगत कोयला खदान का मामला अब केवल एक औद्योगिक इकाई के संचालन तक सीमित नहीं है। इससे करीब 1100 श्रमिकों और उनके परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। खदान बंद होने की स्थिति में श्रमिकों का स्थानांतरण कहां और किस व्यवस्था के तहत होगा, रोजगार की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी तथा विस्थापन की स्थिति में उनके हितों का संरक्षण कौन करेगा, ये सवाल अब महत्वपूर्ण हो गए हैं।
फिलहाल बीएमएस की क्रमिक भूख हड़ताल जारी है। अब निगाहें प्रबंधन और संबंधित विभागों की पहल पर टिकी हैं। बड़ा सवाल यह है कि पर्यावरणीय सहमति से जुड़ी समस्या का समाधान निकालकर खदान का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा या 1100 श्रमिकों को रोजगार की अनिश्चितता के बीच अपनी लड़ाई जारी रखनी पड़ेगी।
प्रदीप मिश्रा
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