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कोयला कारोबार पर उठे सवाल, कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना; 3 नवंबर को अमित शाह को काले झंडे दिखाने का ऐलान

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

ACB ग्रुप की कोलवाशरियों, रिजेक्ट कोल आधारित पावर प्लांट और SECL से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप; भारतीय जनाधिकार पार्टी ने CBI जांच, SIT गठन और कोयले का फोरेंसिक ऑडिट कराने की मांग उठाई।


कोरबा ACGN:- कोयला कारोबार, कोलवाशरियों, रिजेक्ट कोल आधारित पावर प्लांटों और पर्यावरणीय प्रदूषण से जुड़े मामलों को लेकर कोरबा में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। भारतीय जनाधिकार पार्टी, छत्तीसगढ़ ने 30 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। पार्टी ने जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को ज्ञापन सौंपकर ACB ग्रुप से संबंधित कोलवाशरियों, पावर प्लांटों और SECL से जुड़ी शिकायतों की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, CBI जांच तथा संयुक्त विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की।


पार्टी के अध्यक्ष एवं संयोजक दीपक दुबे ने कहा कि ACB ग्रुप और उससे संबंधित विभिन्न कोलवाशरियों तथा पावर प्लांटों के संबंध में लंबे समय से केंद्र एवं राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, नियामक संस्थाओं और जांच एजेंसियों के समक्ष शिकायतें प्रस्तुत की जा रही हैं। इन शिकायतों में कोलवाशरियों की स्वीकृत क्षमता, वास्तविक उत्पादन, कोयला लिंकेज, उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की प्राप्ति और उपयोग, रिजेक्ट कोल एवं मिडलिंग्स की मात्रा, बिजली उत्पादन तथा पर्यावरणीय नियमों के पालन की जांच की मांग शामिल है।


रिजेक्ट कोल से लेकर बिजली उत्पादन तक मांगा पूरा हिसाब
दीपक दुबे ने सवाल उठाया कि जिस कोलवाशरी से रिजेक्ट कोल निकलता है और जिस पावर प्लांट में उसके उपयोग का दावा किया जाता है, उन दोनों इकाइयों के रिकॉर्ड का आमने-सामने मिलान क्यों नहीं कराया जा रहा है? उन्होंने मांग की कि कोयले की प्राप्ति से लेकर वाशरी में उसकी प्रोसेसिंग, स्वच्छ कोयला, मिडलिंग्स, रिजेक्ट कोल, स्लरी, परिवहन और पावर प्लांट में वास्तविक खपत तक का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए।
उनका कहना है कि केवल दस्तावेजों के आधार पर नहीं, बल्कि भौतिक सत्यापन और वैज्ञानिक जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए।


         शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप
धरने को संबोधित करते हुए किसान श्रमिक नेता कमल साव ने आरोप लगाया कि बार-बार शिकायतें, अभ्यावेदन और ज्ञापन देने के बावजूद प्रमुख सवालों पर ठोस एवं पारदर्शी कार्रवाई की जानकारी नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि जनता को केवल शिकायतों को एक विभाग से दूसरे विभाग भेजे जाने की जानकारी नहीं, बल्कि वास्तविक जांच और उसके निष्कर्ष मिलने चाहिए।
युवा नेता एवं युवा मोर्चा प्रदेश संयोजक संजय रत्नाकर तथा महामंत्री शैलेन्द्र गोपाल ने कोलवाशरियों की स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन, लिंकेज के तहत प्राप्त कोयले की मात्रा एवं गुणवत्ता, रिजेक्ट कोल और मिडलिंग्स की वास्तविक स्थिति तथा पावर प्लांटों में ईंधन की खपत और बिजली उत्पादन के आंकड़ों का मिलान कराने की मांग की।


उन्होंने कहा कि कोलवाशरी और पावर प्लांट के स्टॉक, वेटब्रिज, परिवहन और डिस्पैच रिकॉर्ड का स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट होना चाहिए। इसके साथ ही जल प्रदूषण, फ्लाई ऐश, ऐश डाइक, स्लरी और अन्य औद्योगिक अपशिष्टों के प्रबंधन की वैज्ञानिक जांच भी कराई जानी चाहिए।


            संयुक्त तकनीकी जांच दल बनाने की मांग
जिला संयोजक दिनेश यादव और जिलाध्यक्ष सूरजभान दास बैरागी ने मांग की कि Coal Controller Organisation (CCO), SECL, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, खान एवं भूविज्ञान विभाग, जिला प्रशासन तथा अन्य तकनीकी संस्थाओं के विशेषज्ञों को शामिल कर संयुक्त जांच टीम बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि संबंधित कोलवाशरियों और पावर प्लांटों का वास्तविक भौतिक सत्यापन किया जाए। जांच में उपलब्ध साक्ष्यों और निष्कर्षों के आधार पर CBI जांच की आवश्यकता पर निर्णय लिया जाए तथा संयुक्त SIT के गठन की मांग पर भी कार्रवाई हो। SECL से संबंधित कोयला परिवहन, टेंडर, भुगतान, स्टॉक और संविदा संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी उठाई गई।


3 नवंबर को अमित शाह के रायपुर आगमन पर काले झंडे दिखाने का ऐलान
प्रदेश उपाध्यक्ष विन्देश सिंह राठौर और प्रदेश सचिव मुकेश भारतीय ने कहा कि 23 सितंबर 2026 को SECL मुख्यालय बिलासपुर में हुए धरना-आंदोलन के दौरान ही घोषणा की गई थी कि यदि ACB ग्रुप और SECL से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं हुई तो छत्तीसगढ़ आने वाले केंद्रीय मंत्रियों एवं अधिकारियों के सामने काले झंडे दिखाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
इसी घोषणा के तहत पार्टी ने 3 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के समापन समारोह के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्तावित रायपुर आगमन के दौरान काले झंडे दिखाकर लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराने का ऐलान किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस माध्यम से कोयला कारोबार और SECL से संबंधित जनहित की शिकायतों को केंद्र सरकार तक पहुंचाया जाएगा।
6.50 लाख कोयला जब्ती और कोल लेवी को लेकर भी उठाए सवाल
पार्टी नेताओं ने अपने आरोपों में दावा किया कि जिस कंपनी के परिसर से 6.50 लाख टन अवैध कोयला जब्त किए जाने तथा वाशरी, पावर प्लांट और कटाघर सील किए जाने की बात सामने आई थी, उस मामले में अब तक अपेक्षित कार्रवाई क्यों नहीं हुई? उन्होंने कोल लेवी का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि पहले 25 रुपये प्रति टन की वसूली होती थी, जबकि अब 100 रुपये प्रति टन वसूली की बात कही जा रही है।
उन्होंने सवाल किया कि जिन वाशरियों और लिंकेज डीओ धारकों द्वारा कथित तौर पर भुगतान किया गया, उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? पार्टी ने इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।


MCCPL, रतिजा वाशरी और बाँधाखार पावर प्लांट के रिकॉर्ड की जांच की मांग
प्रवक्ता कृष्णा टंडन ने कहा कि ACB ग्रुप से संबंधित सभी कोलवाशरियों और पावर प्लांटों की स्थापना से लेकर वर्तमान समय तक स्वतंत्र तकनीकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कोयला लिंकेज, उच्च गुणवत्ता वाले कोयले, रिजेक्ट कोल और मिडलिंग्स का संपूर्ण Material Balance ऑडिट कराने की मांग की।
उन्होंने सवाल उठाया कि रिजेक्ट कोल आधारित पावर प्लांटों में रिजेक्ट कोल के स्थान पर लिंकेज से प्राप्त एक करोड़ टन से अधिक कोयला कैसे पहुंच रहा है? इस संबंध में वास्तविक रिकॉर्ड और ईंधन उपयोग की जांच जरूरी है।
टंडन ने MCCPL, रतिजा कोलवाशरी और बंधाखार स्थित 1×300 MW पावर प्लांट के अभिलेखों का समग्र फोरेंसिक ऑडिट कराने, जल एवं वायु प्रदूषण की वैज्ञानिक जांच करने तथा SECL से जुड़ी शिकायतों पर स्वतंत्र जांच और CBI जांच की मांग दोहराई। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की मांग भी की।
          जनसंसाधनों की सुरक्षा और जवाबदेही जरूरी
युवा नेता एवं अनुसूचित जाति प्रदेश संयोजक हेमंत पैगवार ने कहा कि कोरबा देश के प्रमुख कोयला और ऊर्जा क्षेत्रों में शामिल है। यहां के कोयले, जल, भूमि, पर्यावरण और सार्वजनिक संसाधनों से जुड़े प्रत्येक मामले में पारदर्शिता एवं जवाबदेही जरूरी है। जनहित में उठाए गए सवालों का जवाब जांच और सरकारी रिकॉर्ड के माध्यम से सामने आना चाहिए।
धरना-प्रदर्शन में प्रभु कश्यप, पुष्पेंद्र यादव, गंगा प्रसाद, संतोष कुमार, बजरंग रत्नाकर, शिव कुमार, छतराम यादव, सुनील कुमार, खिलेश्वर कश्यप, भीम यादव, संतोष यादव, अजय सूर्यवंशी, संतोष बेरेट, सूरज दास महंत, सुनील कंवर, प्रमोद मरकाम, तरुण कश्यप, किरण कंवर, सरोज सारथी, रजत पैगवार, सतीश कुमार, आशीष पैगवार, गीतेश कुमार, अनुराग पैगवार सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
पार्टी की ओर से जारी ज्ञापन में कोयला लिंकेज, कोलवाशरी विस्तार, रिजेक्ट कोल, पावर प्लांटों में ईंधन उपयोग, पर्यावरणीय प्रदूषण और SECL से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। अब देखना होगा कि शासन और संबंधित जांच एजेंसियां इन शिकायतों पर क्या कदम उठाती हैं।


प्रदीप मिश्रा
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